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राम नाम स्मरण से रोग व शोक का हरण सम्भव - स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी

रामकृष्ण मठ निरालानगर में मनाई गई रामनवमी, भक्तों ने किया आनलाईन दर्शन

लखनऊ। रामकृष्ण मठ निराला नगर में रामनवमी उत्सव पूरे हर्ष के साथ मनाया गया। भक्तों ने आनलाइन दर्शन कर सबके कल्याण के लिए प्रार्थना किया। रामनवमी उत्सव बड़े ही धार्मिक माहौल में पारम्परिक एवं पूर्ण रीतिरिवाजो के साथ विधिवत अनुष्ठानिक प्रक्रिया से प्रातः 4ः30 बजे से लेकर रात्रि 9ः00 बजे तक भक्तगणों की भागीदारी एवं जबरदस्त उत्साह के साथ मनाया गया। कोविड-19 महामारी के मद्देनजर सामाजिक दूरी एवं कोविड प्रोटोकॉल के अनुपालन में मनाए गए समस्त कार्यक्रम का यूट्यूब चैनेल ‘रामकृष्ण मठ लखनऊ’ के माध्यम से सीधा प्रसारण भी किया गया। कार्यक्रम को दूर दराज के भक्तगणों ने इन्टरनेट के माध्यम से घर बैठे सजीव प्रसारण देखा।

उत्सव का शुभारम्भ रामकृष्ण मठ के मंदिर के मुख्य प्रांगण में साधुओं द्वारा प्रातः 4ः30 बजे मंगल आरती एवं वैदिक मंन्त्रोंच्चारण एवँ गीता पाठ स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी महाराज के नेतृत्व, रामकृष्ण के साधुओं के साथ में संगत में हुआ। श्री रामकृष्ण वचनामृत पर स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी महाराज ने प्रवचन दिया। विशेष पूजा की शुरूआत स्वामी इष्टकृपानन्दजी द्वारा हुई और विस्तृत ‘षोड़शोपचार पूजा’ हुआ। जिसमें भगवान की पूजा सोलह तरह के विभिन्न पूज्य सामग्रियों द्वारा किया गया। रामनवमी उत्सव में रामकृष्ण मठ के ब्रह्मचारी अनादिचैतन्य चैतन्यजी के नेतृत्व में विष्णु सहस्र नाम स्तोत्रम् का पाठ किया गया। पाठ के पश्चात हवन किया गया एवं स्वामी इष्टकृपानन्दजी ने मधुर स्वर में भजनों की एक श्रृंखला की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर प्रभु को पुष्पांजलि अर्पित कर उनका आर्शिवाद प्राप्त किया गया। दोपहर 12 बजे भोगराति हुई और सुबह का कार्यक्रम देवों की प्रार्थना के साथ सम्पन्न हुआ।

साँयकाल प्रभु श्री रामकृष्ण एवं प्रभु श्री रामचन्द्रजी की संध्यारति के पश्चात रामकृष्ण मठ, लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज ने बाल्मीकि रामायण पर प्रवचन दिया। अपने प्रवचन में उन्होंने कहाकि ईश्वर के साक्षात अवतार भगवान श्रीराम के आगमन का मुख्य उद्देश्य मानव के अन्दर देवत्व गुण जगाना था। स्वामी जी ने कहाकि भगवान मनुष्य शरीर धारण करते हैं ताकि मनुष्य भगवान हो सकें। उन्होंने कहाकि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में रामचन्द्र जी को भगवान के रूप में प्रस्तुत किया। वही महर्षि बाल्मीकि जी जो कि रामचन्द्र के मूल जीवनीकार थें, वह रामचन्द्र जी को एक आर्दश मनुष्य के रूप में प्रस्तुत किये जो सभी मनुष्यों के लिए हर क्षेत्र में आदर्श के रूप में विराजमान है। स्वामी जी ने कहाकि राम ने एक आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श बन्धु, आदर्श योद्धा, आदर्श राजा, आदर्श संत एवं आदर्श शत्रु की शिक्षा समाज को दी। श्री राम के अमर जीवनी की शिक्षा सभी मानवों को उनके अनुरूप अपने जीवन को एक आकार देने के लिए निर्देशिका के रूप में हमेशा के लिए कार्य करती है।

स्वामी जी बताया कि श्री रामचन्द्र जी ने अपने जीवन के उन सभी चुनौतियों को स्वीकार किया जिसको सामान्यतः मानव जाति को सामना करना पड़ता है और दर्शाया की किस तरह कठिन से कठिन परिस्थितियों में स्थिरचित्त, आनन्दपूर्ण व प्रसन्नचित्त रहकर आगे निकला जा सके। जितना हम उनके जीवनी को पढ़तें है उतना ही ज्यादा मानवीय होते हैँ। स्वामी मुक्तिनाथानंद जी महाराज ने कहा कि भगवान राम का प्राकट्य संपूर्ण जगत के कल्याण के लिए हुआ था। श्रीराम ने मर्यादा का अनुसरण करते हुए सामान्य व्यक्ति की तरह जीवन जिया जिसमें उन्हें अनेक प्रकार के कष्ट भोगने पड़े। उन्होंने कहाकि इन कष्टों का सामना करते हुए श्री राम ने एक आदर्श प्रस्तुत किया तथा अपनी मर्यादा बनाए रखी, इसीलिए आज पूरा विश्व उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नाम से पुकारता है। कार्यक्रम का समापन रामनाम संकीर्तन (सामूहिक भजन) के साथ हुआ।

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