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बाल निकुंज : सीनियर बाल कवियों ने बांधा शमां

लखनऊ। बाल निकुंज स्कूल्स एंड कॉलेजेज में आयोजित दो दिवसीय ‘नवोदित बाल कवि सम्मेलन’ के दूसरे दिन बुधवार को सीनियर कवियों ने एक से बढ़कर एक पंक्तियों को सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। बाल निकुंज गर्ल्स एकेडमी बेलीगारद शाखा के श्रीशिवसहाय जी सभागार में आयोजित ‘नवोदित बाल कवि सम्मेलन’ में सभी शाखाओं से सीनियर बाल कवियों ने शिरकत की। कार्यक्रम का आरम्भ माँ सरस्वती को माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन के साथ सरस्वती वंदना व स्वागत गीत से हुआ। जिसमें कक्षा 7 से कक्षा 12 तक के कवियों ने पूरी तैयारी के साथ मंच पर धमाल मचाया।

बाल निकुंज इंग्लिश स्कूल पल्टन छावनी के कक्षा - 7 की छात्रा अविका दीक्षित ने "सरलता है संभलता है, संस्कार है हिंदी, माँ की गोद है हिंदी, पिता का प्यार है हिन्दी, मेरा अधिकार है हिन्दी, प्यार व्यवहार है हिंदी..." सुनाया तो सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वहीं सौम्या कनौजिया ने ‘राष्ट्रप्रेम की जन-जन में ज्योति जगायेंगे, अखिल विश्व में हिन्दी भाषा की पहचान करायेंगे’ प्रस्तुत कर हिन्दी को विश्व व्यापक बनाने की बात कही। वहीं बाल निकुंज गर्ल्स एकेडमी की खुशी त्रिवेदी ने अपने जोरदार कविता ‘इस जीती हुई दुनिया में एक सहारे को देखा है, संघर्षशील पिता को कभी हारते नहीं देखा है, पिता के प्यार से कोई अच्छी दौलत क्या है, माँ का आँचल जो सलामत है तो जन्नत क्या है’ के माध्यम से पिता की भूमिका की सराहना की। इसके बाद कक्षा 12 की कवियित्री सुमिति ने नारी सम्मान पर प्रकाश डालते हुए अपनी पंक्तियों ‘जो नारी का अपमान करे वो मर्द नहीं हो सकता है, मर्यादा के इस आँचल को फिर जार-जार कर डाला है’ को सुनाया।

बाल निकुंज इंटर कालेज मोहिबुल्लापुर ब्वायज विंग के कार्तिकेय शुक्ला ने हिन्दी भाषा की ऊंचाईयों को छूते हुए अपनी कविता ‘धरती सा धीरज है, आसमान सी ऊंचाई है, जिन्दगी को तरास कर खुदा ने तस्वीर बनायी है, दुख बच्चों का जो खुद पर सह लेते है, खुदा की उस जीवित प्रतिमा को पिता कहते हैं' सुनाकर खूब तालियां बटोरी। वहीं इसी शाखा के आर.एन. मिश्रा ने "वर्षों लग जाते हैं इज्जत बनाने में, जब घर की चौखट से बाहर कदम रखते हैं तब समझ आता है कि सालों लग जाता है घर बनाने में..." के माध्यम से जीवन में समय पालन पर जोर देते हुए झलकियां प्रस्तुत कीं।

इसी प्रकार अन्य धुरंधर कवियों ने समय अभाव की परवाह न करते हुए अपने भावों को व्यक्त करते थकते नहीं दिखे और देर शाम तक बाल कवियों ने अपनी अदाकारी से शमां को बांधे रखा। श्रोता मंत्र मुग्ध होकर कवियों का उत्साहवर्धन करते रहे। इसी प्रकार प्रस्मिता दुबे, साक्षी बाजपेयी, सौम्या शुक्ला, अंकिता मिश्रा, वर्षा तिवारी, रिया सिंह, प्रियांशी यादव, सचिन शुक्ला, विनय सिंह, विशाल रावत, कीर्ति प्रमुख, भावना गुप्ता आदि बाल कवियों ने खूब महफिल जमायी और लोगों में जागरूकता के साथ-साथ हिन्दी के प्रति जोश भरा।  

इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि सेण्ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया, अलीगंज शाखा की प्रबंधक नेहा जायसवाल, विद्यालय के प्रबंध निदेशक एच.एन. जायसवाल, कोआर्डिनेटर सुधीर मिश्रा, बाल निकुंज इंग्लिश स्कूल पल्टन छावनी की प्रधानाचार्या रश्मि शुक्ला, बाल निकुंज गर्ल्स एकेडमी की प्रधानाचार्या डॉ. अनूप कुमारी शुक्ला, हिन्दी विषय के शिक्षक व अभिभावक उपस्थित थे।

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