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राम ने खाये शबरी के जूठे बेर, सुग्रीव से की मित्रता

लखनऊ। श्रीराम लीला समिति ऐशबाग लखनऊ के तत्वावधान में रामलीला मैदान के तुलसी सभागार में ऑनलाइन चल रहे रामोत्सव-2021 के सातवें दिन बुधवार को राम शबरी मिलन, राम सुग्रीव मित्रता, सुग्रीव-बालि युद्ध, बालि वध और तारा विलाप लीला ने दर्शकों को मंत्र मुग्ध किया। रामलीला के पूर्व हार्ट एण्ड सोल कल्चरल वेलफेयर सोसाइटी के कलाकारों ने नृत्य नाटिका के माध्यम से भगवती देवी दुर्गा के नौं रूपों के दर्शन करवाए। भक्ति भावना से ओतप्रोत इस प्रस्तुति के उपरान्त अमृत सिन्हा के नृत्य निर्देशन में रिदम डिवाइन डान्स एकेडमी के कलाकारों ने स्तुति नृत्य प्रस्तुत कर भगवती देवी दुर्गा की भक्ति के सागर में आकण्ठ डुबोया।

रामलीला की शुरूआत राम शबरी मिलन से हुई। जब सीता को खोजते हुए राम दण्डकारण्य वन भटक रहे थे, तो वन में राम और लक्ष्मण ने एक जगह देखा कि एक वृद्ध महिला को कुछ वनवासी बच्चे हंसी-ठिठोली करके परेशान कर रहें हैं। जैसे ही राम मतंग मुनि के आश्रम के पास पहुंचते हैं और उस वृद्ध महिला से पूछते हैं कि मतंग मुनि का आश्रम कहां है, तो मन ही मन वह राम को पहचान जान जाती है। फिर भी वह उनसे उनका परिचय पूछती है। इस पर राम अपना परिचय और पूरा वृतान्त बताते हैं। इस बात से शबरी प्रसन्न होकर उनके चरणों पर गिर पड़ती है और उनको अपने जूठे बेर खाने को देती है। राम तो वह बेर चाव से खा लेते हैं, लेकिन लक्ष्मण उसे फेंक देते हैं।

इसके पश्चात राम सुग्रीव मित्रता लीला हुई। राम रिष्यमूक पर्वत की ओर प्रस्थान करते हैं और सुग्रीव को ढूंढते हैं तभी एक ब्राह्मण उधर से गुजरते हैं और राम से वन में आने का कारण पूछते हैं। राम उनको पहचान जाते हैं और फिर ब्राह्मण अपने वास्तविक रूप में आकर अपना परिचय हनुमान के रूप में देते हैं। हनुमान राम के चरणों पर गिर जाते हैं और राम व लक्ष्मण को कंधे पर बैठाकर सुग्रीव के पास ले जाकर मिलवाते हैं। राम से मिलने के उपरान्त सुग्रीव बताते हैं कि उनके बड़े भाई बालि ने उनका राज्य और उनकी पत्नी को उनसे छीन लिया है। इस पर राम उनको उनका राज्य और उनकी पत्नी को वापस दिलाने का वचन देते हैं। इसके उपरान्त बालि और सुग्रीव के मध्य युद्ध होता है। राम बालि को अपने बाण से मार देते हैं और सुग्रीव को उनका राज्य व पत्नी वापस मिल जाती है। बालि के मर जाने पर तारा विलाप करने लगती है।

ऑनलाइन रामलीला के उपरान्त सृजन और साहित्यगन्धा संस्था की संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ’काव्य संगम’ का आयोजन किया गया, जिसमें डॉ. सर्वेश अस्थाना के संयोजन में मुकुल महान (संचालन), नंदिनी हर्ष, सौरभ श्रीवास्तव, अमित अवस्थी, डॉ. ऋचा आर्या ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को भाव विभोर किया। इस अवसर पर श्रीरामलीला समिति ऐशबाग के अध्यक्ष हरीशचन्द्र अग्रवाल, सचिव पं. आदित्य द्विवेदी, प्रमोद अग्रवाल उपस्थित थे।

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