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दादी-नानी की कहानी : बच्चों ने जानी ढपोरशंख की वास्तविकता

स्टोरीमैन जीतेश ने सुनाई कहानी, दिया प्रेरणात्मक संदेश

लखनऊ। लोक संस्कृति शोध संस्थान की श्रृंखला दादी-नानी की कहानी में स्टोरीमैन जीतेश श्रीवास्तव ने ढपोरशंख कहानी सुनाई। रविवार को जानकीपुरम के सेक्टर एच स्थित पुनर्नवा परिसर में कथा के माध्यम से बच्चों में मेहनत करने, लालच से दूर रहने, अपनी वस्तु संभाल कर रखने, सतर्क रहने जैसे प्रेरणात्मक सन्देश बच्चों को दिये गये।

स्टोरीमैन जीतेश श्रीवास्तव ने कहानी की शुरुआत एक गरीब व मेहनती व्यक्ति के संघर्ष की चर्चा से की जिसने तपस्या कर मनोकामना पूर्ति करने वाला सपोरशंख प्राप्त किया था। पड़ोसी द्वारा शंख चुरा लेने के बाद वह पुनः तपस्या कर ढपोरशंख नामक शंख ले आया जो मनोकामना की पूर्ति न कर केवल एक की जगह दो देने की बात करता था। पड़ोसी ने चोरी छिपे ढपोरशंख को सपोरशंख से बदल दिया। जब ढपोरशंख की वास्तविकता का पता चला तो उसने अपना माथा पकड़ लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत में बच्चों को टेढ़े-मेढ़े वाक्य देकर उनका उच्चारण अभ्यास कराया गया। सहयोगी संस्था नीलाक्षी लोक कला कल्याण समिति की अध्यक्ष नीलम वर्मा, शालिनी वैद्य आदि ने कथा प्रस्तोता समूह का स्वागत किया। लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव सुधा द्विवेदी, राजनारायण वर्मा, डॉ. एस.के. गोपाल सहित अन्य की प्रमुख उपस्थिति रही।

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