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डेंगू-मलेरिया पर वार को मास्टर ट्रेनर तैयार, अस्पतालों में बेड आरक्षित

 • दोनों बीमारियों के इलाज व केस मैनेजमेंट पर राज्यस्तरीय प्रशिक्षण आयोजित 

• दो दिवसीय प्रशिक्षण में चिकित्सा अधिकारियों को दी गई महत्वपूर्ण जानकारी   
• प्रदेश के सभी जिलों में डेंगू की होगी फ्री जांच 

लखनऊ। राजधानी में स्वाइन फीवर, डायरिया व कालरा सहित संक्रामक बीमारियां दस्तक दे चुकी हैं। वहीं बारिश के मौसम में डेंगू, मलेरिया सहित मच्छरजनित बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। जिससे लोगों में दहशत है। हालांकि बीते कई वर्षों में संवेदनशील क्षेत्र फैजुल्लागंज सहित राजधानी में डेंगू पर काफी हद तक नियंत्रण रहा है और महामारी नहीं फैली। वहीं इस बात की भी चर्चा है कि इस कार्य में अहम भूमिका निभाने वाले महकमे के जिम्मेदारों का अन्य जनपदों में स्थान्तरण कर दिया गया है। जिसका असर संचारी रोग नियंत्रण अभियान पर पड़ सकता है।

इस बीच डेंगू और मलेरिया के फैलाव को रोकने के लिए हर जिले में दो मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं। अब ये ट्रेनर अपने जिले के डाक्टरों को इलाज के नए प्रोटोकाल के बारे में बताएंगे। स्वयंसेवी संस्था पाथ-सीएचआरआई के सहयोग से प्रदेश के 150 मास्टर ट्रेनर को सहभागीय शिक्षण संस्थान में दो दिन का प्रशिक्षण दिया गया। संयुक्त निदेशक, मलेरिया डॉ. अवधेश यादव ने बताया कि अब मलेरिया कंफर्म होने पर ही मरीज को दवा दी जाएगी। सामान्य मलेरिया वाले मरीजों को 14 दिन लगातार दवा खानी होगी। दिमागी मलेरिया वाले मरीजों को तीन दिन दवा खानी होगी। 

उन्होंने बताया कि विभाग की टीमें लगातार इन मरीजों का फोन पर फालोअप करेंगी ताकि किसी भी मरीज की दवा एक दिन भी न छूटे। डॉ. यादव ने बताया कि इन 150 मास्टर ट्रेनर को मलेरिया के इलाज के नए प्रोटोकाल के बारे में विस्तार से बताया गया। अब ये अपने जिले के डाक्टरों को इस प्रोटोककाल के बारे में बताएंगे। 
निदेशक, संचारी रोग डॉ. एके सिंह ने बताया कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया पर नियन्त्रण के लिए ब्लाक स्तर पर रैपिड रेस्पांस (आरआर) टीम व अन्य कर्मचारियों का क्षमतावर्धन भी किया जाएगा ताकि वह किसी भी आपात स्थिति को नियंत्रित करने में सक्षम हों। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल स्तर 10 बेड और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर पांच बेड आरक्षित किए गए हैं। अपर निदेशक, मलेरिया एवं वेक्टर बार्न डिजीज डॉ. आर.सी. पाण्डेय ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य वेक्टर बार्न डिजीज, खासकर डेंगू और मलेरिया के मरीजों को समय रहते उचित और सही उपचार उपलब्ध कराना है।  
पांच बैच में 150 डाक्टर प्रशिक्षित  
प्रदेश के सभी 75 जिलों से आए 150 चिकित्सा अधिकारियों को पांच बैच में प्रशिक्षण दिया गया। एक बैच में 30 चिकित्सा अधिकारियों को रखा गया ताकि उनको स्टैण्डर्ड प्रोटोकॉल की जानकारी भलीभांति दी जा सकें जो डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया के नियन्त्रण और केस मैनेजमेंट में सहायक साबित हो सके।
संयुक्त निदेशक, वेक्टर बार्न डिजीज डॉ विकास सिंघल ने बताया कि मच्छरजनित बीमारियों में डेंगू सबसे संक्रामक रोग है। आमतौर पर बुखार के मरीज़ का उपचार संक्रमण की पहचान और गंभीरता के स्तर के आधार पर किया जाता है। इस प्रशिक्षण में डेंगू और मलेरिया के संक्रमण की पहचान, गंभीरता और विभिन्न स्तरों पर उपचार और प्रबंधन पर उठाए जाने वाले आवश्यक कदम पर जानकारी दी गई ताकि सभी चिकित्सकों को स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल की जानकारी हो और मरीज़ को एक जैसा उपचार मिल सके। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में डेंगू की फ्री जांच की जाएगी।  

राज्य कीट विशेषज्ञ सुदेश कुमार ने बताया कि हर रविवार मच्छर पर वार, लार्वा पर प्रहार अभियान को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए और आशा को रोज 10 घरों में जाकर मच्छर के लार्वा को नष्ट करने में जुटाया जाए। 

पाथ के डॉ. अचिन्त्य श्रीवत्स ने बताया कि ये प्रशिक्षण मलेरिया एवं डेंगू के प्रहार पर काफी अहम साबित होगा। ये प्रशिक्षण गोदरेज कंजूमयर प्रोडक्ट लिमिटेड के सहयोग से हुआ है जो एक पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप का बहुत बेहतरीन उदाहरण है। इस मौके पर सी.एच.आर.आई की डॉ. शिवानी, डॉ. अमृत शुक्ला, एम.एंड इ. ऑफिसर भानु शुक्ला मौजूद थे। 

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