शासन ने मांगी आख्या, फिर भी आयुष्मान सुविधा का इंतजार; संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने लगाई भावुक गुहार।
लखनऊ: राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) सहित विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने सरकार से आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिए जाने की मांग तेज कर दी है। उत्तर प्रदेश क्षय रोग वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष करुणा शंकर मिश्रा ने मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर हजारों स्वास्थ्यकर्मियों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने की अपील की है।
मिश्रा ने कहा कि टीबी कार्यक्रम सहित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं में कार्यरत कर्मचारी वर्षों से संक्रमण और जोखिम के बीच रहकर जनता को स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद जब कोई कर्मचारी गंभीर बीमारी की चपेट में आता है तो उसके परिवार को इलाज के लिए आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। हाल ही में रजनीश झा, अभय सिंह, धर्मेंद्र द्विवेदी सहित कई स्वास्थ्य कर्मचारियों का असमय निधन हो चुका है, जबकि अनेक कर्मचारी कैंसर, किडनी, लीवर एवं अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।
विचित्र विडंबना: जो कार्ड बनाते हैं, वही सुरक्षा से वंचित
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जो कर्मचारी दिन-रात घर-घर जाकर आम जनता के आयुष्मान कार्ड बनवाते हैं और उन्हें सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ दिलाते हैं, वही आज स्वयं आयुष्मान जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा से वंचित हैं। बीमारी आने पर कई स्वास्थ्यकर्मियों के परिवार कर्ज के दलदल में डूब जाते हैं।
शासन के निर्देश के बाद भी अंतिम निर्णय का इंतजार
प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि इस संबंध में संघ द्वारा शासन को विस्तृत पत्र भेजकर संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों को आयुष्मान भारत योजना में शामिल करने की मांग की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन के स्तर से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजकर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए आख्या (Report) उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके बावजूद अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे कर्मचारियों और उनके परिवारों में निराशा और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
"सरकार हम पर दया करे, हमारे परिवारों पर दया करे। हम कोई विशेष सुविधा नहीं मांग रहे, केवल इतना चाहते हैं कि इलाज के अभाव में किसी स्वास्थ्यकर्मी का घर उजड़ने से बच जाए। जब किसी कर्मचारी की असमय मृत्यु होती है, तो छोटे बच्चों का भविष्य और बुजुर्ग माता-पिता की उम्मीदें एक झटके में बिखर जाती हैं।"
संघ ने मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री से बेहद करुण अपील करते हुए कहा है कि शासन द्वारा मामले का संज्ञान लिए जाने के बाद अब इस विषय में तत्काल सकारात्मक निर्णय लिया जाए तथा NTEP सहित सभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को अविलंब आयुष्मान भारत योजना का लाभ प्रदान किया जाए।



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