Lucknow News: कमिश्नर विजय विश्वास पंत का सख्त आदेश- ब्लैक स्पॉट सुधरेंगे, ओवरलोड वाहनों और अनफिट स्कूली बसों पर होगी एफआईआर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी में सड़क हादसों और मौतों के ग्राफ को नीचे लाने के लिए शासन ने कमर कस ली है। सोमवार (29 जून 2026) को लखनऊ के मण्डलायुक्त (कमिश्नर) विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में आयुक्त सभागार में 'मण्डलीय सड़क सुरक्षा समिति' की एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-लेवल बैठक संपन्न हुई। बैठक में कमिश्नर ने साफ लफ्जों में कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकना योगी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस बैठक में अपर जिलाधिकारी पूर्वी, एसीपी यातायात (Traffic Police), परिवहन विभाग (RTO), पीडब्ल्यूडी (PWD), एनएचएआई (NHAI), स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम सहित तमाम बड़े विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कमिश्नर ने ब्लैक स्पॉट सुधारने से लेकर ओवरलोडिंग और स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
मण्डलीय सड़क सुरक्षा बैठक 2026: कमिश्नर के 5 बड़े और कड़े फैसले
लखनऊ मण्डल के सभी जिलों में सड़क सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए तय किए गए मुख्य बिंदु नीचे तालिका में दिए गए हैं:
| विभाग / मुख्य फोकस क्षेत्र | मण्डलायुक्त द्वारा जारी सख्त निर्देश |
|---|---|
| ब्लैक स्पॉट (Black Spots) | चिन्हित दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) का गुणवत्तापूर्ण सुधार जल्द पूरा हो और अधिकारियों द्वारा उसका भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जाए। |
| ओवरलोडिंग पर एक्शन | टोल प्लाजा पर स्थापित 'वे-इन-मोशन' (Way-in-Motion) सिस्टम से ओवरलोड गाड़ियों का डेटा लेकर तुरंत जब्ती और चालान की प्रवर्तन कार्रवाई की जाए। |
| स्कूली वाहन सुरक्षा | सभी विद्यालय वाहनों की फिटनेस, परमिट और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच होगी। नियम तोड़ने पर सीधे कठोर विधिक कार्रवाई। |
| हादसों की मजिस्ट्रेटी जांच | जिस भी सड़क दुर्घटना में 3 या उससे अधिक मौतें होंगी, उसकी गहन जांच तय समय में पूरी कर रिपोर्ट कमेटी को सौंपनी होगी। |
'गुड सेमेरिटन' को मिलेगा सम्मान, घायलों का होगा कैशलेस इलाज
बैठक में मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत ने मानवीय दृष्टिकोण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़क हादसों में घायल लोगों की मदद करने वाले 'गुड सेमेरिटन' (नेक मददगारों) को प्रताड़ित करने के बजाय सरकार की योजना के अनुसार पुरस्कृत और सम्मानित किया जाए। इसके लिए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि वे सभी हाईवे, ट्रॉमा सेंटर और बड़े सरकारी अस्पतालों में इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करें। इसके अलावा, गोल्डन ऑवर (हादसे के ठीक बाद का पहला घंटा) में घायलों को त्वरित चिकित्सा देने के लिए **कैशलेस उपचार योजना** का लाभ समय से मिलना सुनिश्चित करने को कहा गया है।
स्कूल बसों की अनफिट फिटनेस पर नपेंगे स्कूल प्रबंधन और मालिक
मासूम बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए कमिश्नर ने सभी जिलाधिकारियों (DMs) और कप्तानों को निर्देश दिया कि जिला विद्यालय वाहन सुरक्षा समिति की बैठकें हर महीने अनिवार्य रूप से की जाएं। आरटीओ और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमें स्कूलों में चलने वाली बसों, वैन और ऑटो की औचक चेकिंग करें। यदि कोई भी वाहन बिना वैलिड परमिट, अनफिट या ओवरलोडेड बच्चों को ले जाता मिला, तो गाड़ी सीज करने के साथ-साथ संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी सख्त एक्शन लिया जाएगा।


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