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कीर्तन से टूटता है माया का बंधन, विश्वास से मिलती है भक्ति की शक्ति - जगद्गुरु रामभद्राचार्य

लखनऊ: कीर्तन से टूटता है माया का बंधन, विश्वास से मिलती है भक्ति की शक्ति – जगद्गुरु रामभद्राचार्य

लखनऊ: कीर्तन से टूटता है माया का बंधन, विश्वास से मिलती है भक्ति की शक्ति – जगद्गुरु रामभद्राचार्य

स्थान: लखनऊ | दिनांक: 2 जून 2026 | श्रेणी: धार्मिक समाचार
कैप्शन: कथा व्यासपीठ से आशीर्वाद देते जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज

लखनऊ, 2 जून 2026: सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज ने नवधा भक्ति की दिव्य व्याख्या की। उन्होंने कीर्तन, ईश्वर में अटूट विश्वास और कर्मयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पंडाल में उपस्थित हजारों भक्तों को भावविभोर कर दिया।

1. कीर्तन और माया का अनूठा संबंध

जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी ने भक्ति के साधनों पर चर्चा करते हुए एक बहुत ही सुंदर भाषाई उदाहरण दिया। उन्होंने कहा:

"संस्कृत में माया को 'नर्तकी' कहा गया है। यदि इस शब्द के अक्षरों को उलट दिया जाए, तो यह 'कीर्तन' बन जाता है। इसका सीधा अध्यात्मिक अर्थ यही है कि जब कोई व्यक्ति प्रभु का कीर्तन शुरू करता है, तो माया का प्रभाव उसके जीवन से स्वतः ही समाप्त होने लगता है।"

उन्होंने आगे जोड़ा कि भक्ति का दूसरा सबसे मजबूत स्तंभ भगवान के प्रति अटूट विश्वास है। जिसके जीवन में यह विश्वास है, उसके लिए ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग अत्यंत सुगम हो जाता है।

2. प्रभु की सेवा में कोई 'रिटायरमेंट' नहीं

कथा के दौरान उपस्थित जनसमूह को कर्मयोग का उपदेश देते हुए महाराज श्री ने सरकारी सेवा और ईश्वर की सेवा की तुलना की। उन्होंने बड़े ही रोचक अंदाज में कहा:

  • सरकारी नौकरी: यहाँ एक निश्चित उम्र या समय सीमा के बाद व्यक्ति को सेवानिवृत्ति (Retirement) मिल जाती है।
  • राघवेन्द्र सरकार की सेवा: प्रभु की सेवा में कभी कोई सेवानिवृत्ति नहीं होती। यहाँ भक्तों को पेंशन या भविष्य की भी कोई चिंता नहीं रहती, क्योंकि स्वयं भगवान अपने भक्तों के योगक्षेम (भरण-पोषण और कल्याण) का दायित्व उठाते हैं।

उन्होंने समाज को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन का बहुमूल्य और अधिकाधिक समय लोकमंगल तथा नारायण की सेवा में अर्पित करना चाहिए।

कैप्शन: व्यासपीठ पर महाराज श्री का स्वागत और माल्यार्पण करते विशिष्ट अतिथि

3. रामजन्मभूमि आंदोलन का स्मरण और ‘कारसेवकावतार’

अपने उद्बोधन के एक भावुक क्षण में जगद्गुरु जी ने रामजन्मभूमि आंदोलन के संघर्ष के दिनों को याद किया। उन्होंने निहत्थे रामभक्तों पर चली गोलियों, कोठारी बंधुओं के बलिदान और कारसेवकों के उत्सर्ग का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस घोर संकट के समय भी उनका ईश्वर की न्याय-व्यवस्था पर से विश्वास कभी नहीं डिगा और वे जानते थे कि यह त्याग व्यर्थ नहीं जाएगा।

6 दिसंबर 1992 की ऐतिहासिक घटना पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा:

"मैं 6 दिसंबर 1992 के दिन को भारतीय इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ मानता हूँ, जहाँ भारत के माथे पर सदियों से लगा कलंक सरयू नदी में प्रवाहित कर दिया गया। जो ढांचा बुल्डोजर से भी नहीं ढहाया जा सकता था, वह ढह गया। मेरा तो स्पष्ट मानना है कि उस दिन साक्षात भगवान का अवतार हुआ था और मैं उसे 'कारसेवकावतार' की संज्ञा देता हूँ।"

4. कथा में उमड़ा जनसैलाब और वीआईपी अतिथियों की उपस्थिति

श्रीराम कथा के द्वितीय दिवस पर व्यासपीठ का आशीर्वाद लेने के लिए कई राजनेता, संत और प्रबुद्ध जन पहुंचे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:

  • रजनी तिवारी (उच्च शिक्षा राज्य मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार)
  • महंत पवन दास (नैमिषारण्य हनुमानगढ़ी)
  • डा. नीरज बोरा (विधायक)
  • जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति

कथा के अंत में हुई विशेष आरती में मुख्य यजमानों और आयोजकों सहित अजीत श्रीवास्तव, आशीष अग्रवाल, भारत भूषण गुप्ता, संजीव अग्रवाल, राकेश पाण्डेय (महामंत्री), सौरव बन्दोपाध्याय (संयोजक), कनुप्रिया जाजू, बिन्दू बोरा, वत्सल बोरा और सुनील अग्रवाल ने सपरिवार सहभागिता की।

कैप्शन: श्रीराम कथा रस का आनंद लेते भारी संख्या में श्रद्धालु भक्तगण
⏰ आगामी कथा की सूचना (Blogger Update):
मीडिया प्रभारी डा. एस.के.गोपाल द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बुधवार (3 जून 2026) को तीसरे दिन की श्रीराम कथा अपने निर्धारित समय सायं 5:00 बजे से आरंभ होगी। सभी भक्तों से समय से पहुंचने का अनुरोध किया गया है।

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