ऊर्जा निगमों के संविदा कर्मियों को आउटसोर्स निगम में शामिल कर न्यूनतम ₹18,000 वेतन सुनिश्चित किया जाए: संघर्ष समिति
लखनऊ: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने ऊर्जा निगमों में कार्यरत संविदा और आउटसोर्स कर्मियों की समस्याओं को लेकर प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार 'आउटसोर्स सेवा निगम' का गठन होने के बावजूद हजारों संविदा कर्मियों को आज तक इसके दायरे में नहीं लाया गया है, जिससे उनका आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक शोषण लगातार जारी है।
49 दिनों में 56 हादसे: बढ़ती दुर्घटनाओं पर गहरी चिंता
संघर्ष समिति ने प्रदेश में बिजली आउटसोर्स कर्मियों के साथ लगातार हो रही दुर्घटनाओं पर अत्यंत चिंता व्यक्त की है। समिति द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 49 दिनों में 56 बिजली आउटसोर्स कर्मी हादसों का शिकार हुए हैं, जिनमें से 30 कर्मियों की दर्दनाक मृत्यु हो चुकी है और 26 गंभीर रूप से घायल हैं। समिति का आरोप है कि अनुभवी कर्मियों को हटाने और अप्रशिक्षित जनशक्ति से काम कराने के कारण ये हादसे बढ़ रहे हैं।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की मुख्य मांगें:
- आउटसोर्स निगम में शामिल करना: ऊर्जा निगमों के सभी संविदा कर्मियों को तत्काल आउटसोर्स सेवा निगम के अंतर्गत लाया जाए।
- न्यूनतम वेतन: सभी आउटसोर्स और संविदा कर्मियों के लिए न्यूनतम ₹18,000 प्रति माह का वेतन सुनिश्चित किया जाए।
- कर्मियों की बहाली: पावर कॉरपोरेशन के आदेशों और ऊर्जा मंत्री के निर्देशों का पालन करते हुए हटाए गए संविदा कर्मियों को दोबारा काम पर लिया जाए।
- सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षण: हादसों पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, आवश्यक जनशक्ति और उचित प्रशिक्षण दिया जाए।
- कैशलेस इलाज और मुआवजा: दुर्घटना का शिकार हुए कर्मियों के लिए मुफ्त एवं कैशलेस उपचार की व्यवस्था हो, और मृतक आश्रितों को आर्थिक सहायता व रोजगार मिले।
बिजली व्यवस्था पर पड़ रहा है प्रतिकूल प्रभाव
समिति ने कहा कि संविदा कर्मी बिजली आपूर्ति को सुचारू रखने में रात-दिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षित कार्य परिस्थितियां नहीं मिल रही हैं। कई जगह मानकों के विपरीत बेहद कम वेतन देकर उनका शोषण किया जा रहा है, जिसका सीधा असर राज्य की बिजली व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
अंत में संघर्ष समिति ने प्रबंधन से मांग की है कि बिजली कर्मियों पर हो रही उत्पीड़न की कार्रवाइयों को तुरंत समाप्त कर औद्योगिक संबंधों को सामान्य बनाया जाए और संवाद (बातचीत) की बंद प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया जाए।



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