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यूपी में बिजली आउटसोर्स कर्मियों का हल्लाबोल: 25,000 कर्मचारियों की बहाली और 55 वर्ष की उम्र सीमा हटाने की मांग

⚡ यूपी पावर कॉरपोरेशन समाचार 📍 लखनऊ |
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले आउटसोर्स (संविदा) कर्मचारियों की छंटनी को लेकर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन और कर्मचारी संगठन के बीच तकरार बेहद बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन निविदा संविदा कर्मचारी संघ ने ऊर्जा मंत्री के निर्देशों का हवाला देते हुए प्रबंधन से बड़ी मांग की है। संघ का कहना है कि 'मैनपावर रेशनलाइजेशन' के नाम पर अक्टूबर 2024 से मनमाने तरीके से हटाए गए लगभग 25,000 आउटसोर्स कर्मचारियों को तत्काल कार्य पर वापस लिया जाए।

संघ के प्रदेश महामंत्री देवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने बताया कि ऊर्जा मंत्री द्वारा बिना किसी ठोस कारण के संविदा कर्मियों को सेवा से न हटाए जाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर छंटनी की गई है, जो पूरी तरह गलत और अन्यायपूर्ण है। इसके कारण प्रभावित हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

📊 2017 के तय मानकों को दरकिनार करने का आरोप

संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2017 में जारी सरकारी आदेश के तहत शहरी क्षेत्रों के विद्युत उपकेंद्रों पर 36 तथा ग्रामीण क्षेत्रों के उपकेंद्रों पर 20 आउटसोर्स कर्मचारी तैनात करने की व्यवस्था निर्धारित थी। इसी मानक के आधार पर सालों तक प्रदेश की बिजली व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित होती रही। लेकिन नए टेंडरों में इन निर्धारित मानकों को पूरी तरह आधा कर दिया गया है:

  • शहरी क्षेत्र: पहले निर्धारित 36 कर्मचारियों के स्थान पर अब मात्र 18.5 कर्मियों का प्रावधान किया जा रहा है।
  • ग्रामीण क्षेत्र: 20 कर्मियों के स्थान पर केवल 12.5 कर्मियों को ही तैनात किया जा रहा है।
  • लखनऊ (वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग क्षेत्र): राजधानी लखनऊ सहित जिन स्थानों पर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग हुआ है, वहां प्रति उपकेंद्र महज 7.5 कर्मचारी ही तैनात किए जा रहे हैं।

🚨 कर्मचारियों की कमी से बढ़ रहे हैं दर्दनाक हादसे

पदाधिकारियों ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि कर्मचारियों की संख्या लगातार घटाए जाने से बचे हुए स्टाफ पर काम का बोझ असहनीय रूप से बढ़ गया है। उनसे नियम विरुद्ध तरीके से काम कराया जा रहा है, जिसके कारण बिजली लाइनों पर होने वाले हादसों में बड़े पैमाने पर आउटसोर्स कर्मचारियों की मृत्यु हो रही है। संगठन द्वारा मृत कर्मचारियों की याद में 'श्रद्धांजलि सभा' आयोजित कर प्रबंधन का ध्यान इस ओर आकृष्ट करने की कोशिश की गई, लेकिन इसके बाद भी कॉरपोरेशन प्रशासन ने इन हादसों का संज्ञान नहीं लिया और मौत का यह सिलसिला लगातार जारी है।

👴 55 वर्ष की उम्र सीमा का निर्णय पूरी तरह अमानवीय

संघ ने 55 वर्ष की आयु का हवाला देकर अनुभवी कर्मचारियों को सेवा से हटाए जाने के निर्णय को पूरी तरह अन्यायपूर्ण और अमानवीय बताया है। उन्होंने कहा कि अनेक ऐसे संविदा कर्मी हैं जिन्होंने बिजली व्यवस्था को बनाए रखने के दौरान दुर्घटनाओं में अपने हाथ-पैर तक गंवा दिए, लेकिन प्रबंधन ने उन्हें भी दया दिखाए बिना सेवा से बाहर कर दिया।

"जब पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष अधिकारियों और प्रबंध निदेशकों (MD) की सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष है, तो कड़ा परिश्रम करने वाले बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों को 55 वर्ष की आयु में हटाने का क्या औचित्य है?" — देवेन्द्र कुमार पाण्डेय (प्रदेश महामंत्री) उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन निविदा संविदा कर्मचारी संघ

🔥 भीषण गर्मी में उपभोक्ता परेशान, बढ़े फॉल्ट

वर्तमान में भीषण गर्मी के कारण विद्युत उपभोक्ताओं, ट्रांसफार्मरों और 11 केवी पोषकों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। ऐसे समय में फॉल्टों को तत्काल ठीक करने वाले अनुभवी कर्मचारियों की संख्या घटाए जाने से जनता को लंबे समय तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है और मौजूदा कर्मचारियों पर भी कार्यभार असहनीय रूप से बढ़ गया है। संविदा कर्मचारी संघ ने पुरजोर मांग की है कि विद्युत आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने और उपभोक्ताओं व कर्मचारियों के व्यापक हित में हटाए गए सभी 25,000 आउटसोर्स कर्मचारियों को तत्काल सेवा में बहाल किया जाए।

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