मुख्य बातें (Highlights):
- लखीमपुर खीरी के गोकन विद्युत उपकेंद्र पर तैनात अकुशल श्रमिक अतुल मिश्रा की करंट लगने से दर्दनाक मौत।
- सहारनपुर के गदरहेडी विद्युत उपकेन्द्र पर तैनात अनिल (कुशल श्रमिक) की बिजली की चपेट में आने से मृत्यु हो गई।
- संघ का आरोप- सख्त आदेश के बावजूद अकुशल कर्मचारियों से कराया जा रहा है लाइन का जानलेवा काम।
- पिछले 1.5 महीने में हुए कुल हादसों में 70% शिकार अकुशल कर्मचारी, विभाग में कुशल स्टाफ की भारी कमी।
लखनऊ/लखीमपुर।
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) में संविदा कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर किया जा रहा दावा एक बार फिर खोखला साबित हुआ है। आज, 9 जून 2026 को लखीमपुर जनपद के गोकन विद्युत उपकेंद्र पर तैनात अकुशल श्रमिक (Unskilled Labor) अतुल मिश्रा की बिजली की चपेट में आने से दर्दनाक मृत्यु हो गई। सहारनपुर जिले से भी ऐसी ही एक घटना सामने आ रही है यहां गदरहेडी विद्युत उपकेन्द्र पर तैनात अनिल (कुशल श्रमिक) की बिजली की चपेट में आने से मृत्यु हो गई। दोनो घटनाओं के बाद उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ ने प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और इसे सीधे तौर पर 'हत्या' करार दिया है।
पावर कॉरपोरेशन का दोहरा चरित्र आया सामने: देवेंद्र कुमार पांडेय
संघ के प्रदेश महामंत्री देवेंद्र कुमार पांडेय ने इस हादसे पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त करते हुए कॉरपोरेशन प्रबंधन को सीधे कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा, "एक तरफ पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन बड़े-बड़े आदेश जारी कर कहता है कि किसी भी सूरत में अकुशल कर्मचारियों से लाइन (फाल्ट ठीक करने) का कार्य न कराया जाए। वहीं दूसरी तरफ, जमीनी हकीकत यह है कि उन्हीं अकुशल कर्मचारियों को जबरन मौत के मुंह में धकेला जा रहा है। यह बिजली विभाग के दोहरे चरित्र को दर्शाता है।"
संगठन ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए मामले की न्यायिक जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
खतरनाक आंकड़े: 1.5 महीने में 70% हादसे अकुशल कर्मियों के साथ
प्रदेश महामंत्री ने विभाग की पोल खोलते हुए एक बेहद डराने वाला आंकड़ा सामने रखा है। उन्होंने बताया कि पिछले महज डेढ़ महीने (1.5 माह) के भीतर विभाग में जितनी भी बिजली दुर्घटनाएं हुई हैं, उनमें से 70 प्रतिशत दुर्घटनाएं अकुशल कर्मचारियों की हुई हैं।
इन आंकड़ों से साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिजली विभाग में कुशल (Skilled) कर्मचारियों की कितनी भारी कमी है और इस कमी को पूरा करने के लिए बिना ट्रेनिंग वाले अकुशल श्रमिकों से जानलेवा काम कराया जा रहा है।
8 की जगह मात्र 3 कर्मचारियों से काम लेने का दबाव
इससे पहले संघ के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया था कि नियमित पदों पर कमी के कारण 15 मई 2017 को एक आधिकारिक आदेश जारी हुआ था। इसके तहत 8 घंटे की 3 रотेशन शिफ्ट में विद्युत उपकेंद्रों के परिचालन के लिए 4 संविदा उपकेंद्र परिचालकों (SSO) और 4 संविदा श्रमिकों (कुल 8 लोग) की तैनाती अनिवार्य की गई थी।
लेकिन वर्तमान में इस आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए मात्र 3 संविदा परिचालकों के भरोसे पूरा सब-स्टेशन चलाया जा रहा है। कम कर्मचारियों के कारण ऑन-ड्यूटी स्टाफ को कोई साप्ताहिक या आपातकालीन अवकाश नहीं मिल रहा है। थकावट और नींद पूरी न होने के कारण मानसिक तनाव बढ़ रहा है, जिसका सीधा नतीजा लखीमपुर जैसे दर्दनाक हादसों के रूप में सामने आ रहा है।
"लखीमपुर हादसे के दोषियों पर तुरंत कार्रवाई हो और मृतक अतुल मिश्रा के परिवार को उचित मुआवजा मिले। साथ ही हर उपकेंद्र पर 4 परिचालक और 4 श्रमिकों की तैनाती का नियम तुरंत लागू किया जाए, ताकि भविष्य में किसी और संविदा कर्मी को अपनी जान न गंवानी पड़े।"
- देवेन्द्र कुमार पाण्डेय, प्रदेश महामंत्री (उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ)


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