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"बहारों कीचड़ बरसाओ, एलडीए वाले आए हैं..." सोशल मीडिया पर वायरल हुआ LDA की पोल खोलता यह धमाकेदार गाना!

सड़कों पर फिर आया 'बहारों का कीचड़': सोशल मीडिया पर वायरल हुआ LDA की पोल खोलता यह धमाकेदार व्यंग्य गीत!

मुख्य बिंदु:

  • लखनऊ विकास प्राधिकरण' (LDA) और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर तीखा व्यंग्य।
  • सड़कों के गड्ढों को 'हार' और कीचड़ को 'बहार' बताकर साधा निशाना।
  • सोशल मीडिया पर लोग बोले- "ये सिर्फ गाना नहीं, हमारी कालोनी की हकीकत है।"

लखनऊ: मानसून आते ही जहां मौसम सुहाना हो जाता है, वहीं हमारे शहरों की सड़कों की सूरत देखकर जनता के आंसू निकल आते हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसा ऑडियो और वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने नगर निगम और विकास प्राधिकरणों (जैसे LDA) की कार्यप्रणाली पर एक अनोखा, सुरीला और मजेदार तंज कसा है।

इस गीत के बोल कुछ ऐसे हैं जो हर उस नागरिक के दिल को छू रहे हैं, जो रोजाना दफ्तर या बाजार जाते समय सड़कों पर बने जानलेवा गड्ढों और कीचड़ से जूझता है।

🎵 नीचे प्लेयर में प्ले बटन पर क्लिक करके गीत सुनें:


"बहारों की कीचड़ बरसाओ... एलडीए वाले आए हैं!"

वायरल हो रहे इस गाने में फिल्मी अंदाज में प्रशासन पर निशाना साधा गया है। गाने की शुरुआत ही इन धमाकेदार और तीखी लाइनों से होती है:

"बहारों की कीचड़ बरसाओ, एलडीए (LDA) वाले आए हैं...
गड्ढों का हार पहनाओ, एलडीए वाले आए हैं..."

यह गाना साफ तौर पर यह दिखाता है कि कैसे सालों-साल से कागजों पर 'स्मार्ट सिटी' और चमचमाती सड़कें बनाने के वादे तो किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में सड़कों पर 'समंदर' नजर आने लगता है।

जनता की तकलीफों को बयां करते मजेदार बोल

गाने के अंतरे में जनता के दैनिक दर्द को बेहद संजीदगी लेकिन मजाकिया अंदाज में पिरोया गया है:

  • "गड्ढों को आज सजाओ, पानी से उनको भर जाओ..." – यह लाइन उन सड़कों की याद दिलाती है जहां राहगीरों को यह पता ही नहीं चलता कि गड्ढे में सड़क है या सड़क में गड्ढा।
  • "सड़कें बनें समंदर सारी, नावें भी लेकर आओ..." – शहर के मुख्य चौराहों और कॉलोनियों में होने वाले जलभराव की समस्या पर इससे सटीक व्यंग्य और कुछ नहीं हो सकता।

हर मौसम में 'एक ही कहानी'

"जनेश्वर की गलियों में, हर मौसम में एक कहानी...
बरसात आई कीचड़ आया, फिर वही पुरानी निशानी!"

गीतकार(जनेश्वर इंक्लेव के पंकज राय) ने इन लाइनों के जरिए नेताओं के उन चुनावी वादों पर भी चोट की है, जो वोट मिलते ही गायब हो जाते हैं और जनता के हिस्से में सिर्फ वही 'पुरानी निशानी' यानी कीचड़ ही रह जाता है।


सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़

इस ऑडियो के इंटरनेट पर आते ही यूजर्स इस पर जमकर चटकारे ले रहे हैं। एक स्थानीय यूजर ने कमेंट किया, "यह गाना एलडीए के अधिकारियों और ठेकेदारों को रोज सुबह जगाने के लिए अलार्म टोन की तरह बजाना चाहिए।" वहीं दूसरे यूजर ने लिखा, "सालों से टैक्स भरने के बदले हमें यही 'बहारों का कीचड़' उपहार में मिलता है।"

आपकी क्या राय है?

क्या आपके इलाके की सड़कें भी इस मानसून में 'समंदर' बन चुकी हैं? हमें नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर बताएं और इस खबर को इतना शेयर करें कि यह ज़िम्मेदार अधिकारियों के कानों तक पहुंचे!

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