फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया की जगह लेगा नेशनल फार्मेसी आयोग: ड्राफ्ट बिल को प्रभावी बनाने के लिए फार्मासिस्ट फेडरेशन ने केंद्र सरकार को भेजे विस्तृत सुझाव
लखनऊ। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा फार्मेसी एक्ट 1948 के स्थान पर नेशनल फार्मेसी कमीशन (National Pharmacy Commission) बिल, 2026 का ड्राफ्ट सार्वजनिक किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में फार्मेसी शिक्षा, पंजीकरण और पेशेवर नियमन को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाना है। इसी क्रम में फार्मासिस्ट फेडरेशन की वैज्ञानिक विंग ने स्वास्थ्य मंत्रालय को धारा-वार एवं विस्तृत सुझाव प्रेषित किए हैं।
🎙️ 10 दिनों के गहन मंथन के बाद तैयार हुए सुझाव
फार्मासिस्ट फेडरेशन (केंद्रीय समिति) की वैज्ञानिक विंग ने डॉ. हरलोकेश यादव (एडिशनल प्रोफेसर, एम्स नई दिल्ली) की अध्यक्षता में देश के वरिष्ठ फार्मेसी शिक्षकों, वैज्ञानिकों, कम्युनिटी व हॉस्पिटल फार्मासिस्टों और शोधकर्ताओं के साथ लगातार 10 दिनों तक प्रतिदिन ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा कर ये बिंदुवार सुझाव तैयार किए हैं।
📌 फार्मासिस्ट फेडरेशन द्वारा प्रेषित प्रमुख बिंदु व सुझाव:
- वेटरनरी फार्मेसी का समावेशन: वेटरनरी फार्मेसी को आधुनिक चिकित्सा प्रणाली से अलग किए जाने पर आपत्ति जताते हुए इसे 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940' के अनुरूप फार्मेसी की परिभाषा में शामिल रखने की मांग की गई।
- फार्मेसी प्रैक्टिस की नई परिभाषा: फार्मेसी प्रैक्टिस के दायरे को बढ़ाते हुए इसमें डिजिटल फार्मेसी सेवाएं, टेलीफार्मेसी (Telepharmacy), चिकित्सीय निगरानी (Therapeutic Monitoring) और आधुनिक क्लिनिकल सेवाओं को स्पष्ट रूप से शामिल करने का सुझाव दिया गया।
- केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट ही बांटें दवाएं: फार्मेसी एक्ट 1948 की धारा 42 की तर्ज पर यह सख्त प्रावधान हो कि केवल पंजीकृत (Registered) फार्मासिस्ट ही दवाओं की कंपाउंडिंग, मिश्रण और डिस्पेंसिंग कर सकें। अपंजीकृत व्यक्तियों द्वारा दवा वितरण पर दंडात्मक कार्रवाई और सख्त हो।
- आयोग में सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व: नेशनल कमीशन और राज्य फार्मेसी परिषदों में कम्युनिटी, हॉस्पिटल, क्लिनिकल, इंडस्ट्रियल, रेगुलेटरी अफेयर्स एवं फार्माकोविजिलेंस क्षेत्रों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
- आधुनिक तकनीक और एग्जिट टेस्ट: डिजिटल गवर्नेंस, नेशनल डिजिटल रजिस्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फार्माकोजीनोमिक्स, पर्सनलाइज्ड मेडिसिन और राष्ट्रीय एग्जिट टेस्ट के पूर्व फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम लागू करने का सुझाव दिया गया।
✉️ स्वास्थ्य मंत्रालय और संस्थानों के निदेशकों को भेजे गए पत्र
फेडरेशन द्वारा तैयार विस्तृत सुझाव-पत्र केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अवर सचिव (AHS) श्री संतोष कुमार को ईमेल के माध्यम से प्रेषित कर दिया गया है। साथ ही देश भर के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों, विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों के निदेशकों को भी पत्र भेजकर इन सुझावों का समर्थन करने का अनुरोध किया गया है।
“यह प्रस्ताव देशभर के अनुभवी विशेषज्ञों के सामूहिक मंथन का परिणाम है। हमें विश्वास है कि भारत सरकार इन सुझावों पर सकारात्मक विचार कर एक ऐसा नेशनल फार्मेसी कमीशन कानून लागू करेगी, जो फार्मेसी शिक्षा, रोगी सुरक्षा और सुशासन को और अधिक मजबूत करेगा।”
— सुनील कुमार यादव, अध्यक्ष (फार्मासिस्ट फेडरेशन)सुझाव पत्र निर्माण में फेडरेशन के सलाहकार प्रो. प्रकाश वी. दीवान, प्रो. मंदीप अरोरा, प्रो. अनिल कुमार, डॉ. आर. एस. ठाकुर, डॉ. विशाल विश्वकर्मा का विशेष योगदान रहा। वहीं महामंत्री अशोक कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जे पी नायक, संगठन मंत्री आर पी सिंह व उपाध्यक्ष राजेश सिंह ने सभी का आभार प्रकट किया।


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