📘 🐦 📸
तेज़, सटीक और भरोसेमंद खबरें
🔴 Breaking
Loading news...

Pages

कजरी, पारंपरिक व्यंजन और देशभक्ति का संगम: नवयुग कन्या महाविद्यालय में धूमधाम से मना सावन उत्सव

नवयुग कन्या महाविद्यालय में 'सावन मेला' का भव्य आयोजन: लोक संस्कृति, कजरी और देशभक्ति के रंगों से सराबोर हुआ परिसर

📍 स्थान: लखनऊ | 📅 विषय: संस्कृति एवं शिक्षा
लखनऊ: नवयुग कन्या महाविद्यालय में पवित्र श्रावण मास के उपलक्ष्य में भारतीय भाषा, कला एवं संस्कृति के संरक्षण को समर्पित 'सावन मेला' धूमधाम से आयोजित किया गया। यह आयोजन महाविद्यालय की 'भारतीय भाषा कला एवं संस्कृति समिति' तथा 'अहिल्याबाई होलकर सांस्कृतिक क्लब' के संयुक्त तत्वावधान में प्राचार्या प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

दीप प्रज्ज्वलन व सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय और आमंत्रित अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्रम, स्मृति चिह्न और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाले पौधे भेंट कर किया गया।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती ऋतु शाही तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्य ललित कला अकादमी की निदेशक डॉ. श्रद्धा शुक्ला उपस्थित रहीं। इसके अलावा आकाशवाणी दूरदर्शन की शिप्रा चंद्रा की टीम ने गणेश वंदना, सरस्वती वंदना, पारंपरिक नृत्य एवं शिव भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। एफएम रेनबो व दूरदर्शन की प्रसिद्ध एंकर मोना चंद्रा की उपस्थिति भी विशेष रही।

अतिथियों व प्राचार्या का उद्बोधन

"सावन केवल वर्षा ऋतु या हरियाली का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय लोकजीवन में आस्था, उल्लास और सामाजिक समरसता का पर्व है। झूलों के संग गाए जाने वाले कजरी गीत हमारे भावनात्मक व सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाते हैं।"
— श्रीमती ऋतु शाही (सदस्य, राज्य महिला आयोग, उप्र)
"सावन मेला यह संदेश देता है कि संस्कृति सिर्फ पुस्तकों और संग्रहालयों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह जनजीवन, लोकगीतों, उत्सवों और हमारी सामूहिक स्मृतियों में हमेशा जीवंत रहती है।"
— डॉ. श्रद्धा शुक्ला (निदेशक, राज्य ललित कला अकादमी)
"मेला केवल मनोरंजन का जरिया नहीं, बल्कि यह लोक अर्थव्यवस्था और पारंपरिक कलाओं के संरक्षण का सशक्त माध्यम है। इसे हमें सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक सहभागिता के जीवंत उत्सव के रूप में देखना चाहिए।"
— प्रो. मंजुला उपाध्याय (प्राचार्या, नवयुग कन्या महाविद्यालय)

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर देशभक्ति और लोककला के स्टॉल

कार्यक्रम के दौरान 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के अवसर पर छात्राओं ने देशभक्ति गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुतियां दीं, जिसकी सभी ने सराहना की। रसायनशास्त्र विभाग की डॉ. चंदन मौर्या तथा डॉ. सुनीता सिंह द्वारा प्रस्तुत कजरी गीतों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मेले में महाविद्यालय की वर्तमान व पूर्व छात्राओं द्वारा पारंपरिक साज-सज्जा, हस्तशिल्प और स्वादिष्ट व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए गए, जो आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे।

सफल संचालन व उपस्थिति

कार्यक्रम का सफल संचालन अहिल्याबाई होल्कर सांस्कृतिक क्लब की नोडल अधिकारी प्रोफेसर सीमा सरकार द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्या प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय ने सभी अतिथियों, शिक्षिकाओं एवं छात्राओं का धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस अवसर पर भारतीय भाषा कला एवं संस्कृति समिति की संयोजिका प्रो. अंबिका वाजपेई, प्रो. आभा पाल, प्रो. वन्दना द्विवेदी, डॉ. अपूर्वा अवस्थी, डॉ. क्षितिज शुक्ला, डॉ. स्नेहा चौधरी, डॉ. रीमा छाबड़ा, डॉ. क्षमा तिवारी, श्रीमती ललिता पांडे, प्रो. मंजुला यादव, प्रो. ऋचा शुक्ला, विमला तिवारी, नवयुग इंटर कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. सीमा सिंह सहित महाविद्यालय की समस्त प्रवक्ताएं, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।

समारोह का समापन सामूहिक ‘वंदे मातरम्’ गान के साथ संपन्न हुआ।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

📢 WhatsApp से जुड़ें