संभल हिंसा पर बड़ा खुलासा: "जांच आयोग की 857 पेज की रिपोर्ट में हुआ बड़ा पर्दाफाश, सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क की थी मुख्य भूमिका; सर्वे से पहले ही रची गई थी साजिश"
लखनऊ/संभल। संभल की जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद में 24 नवंबर 2024 को सर्वे के दौरान हुई भीषण हिंसा अचानक उपजा विवाद नहीं, बल्कि एक **पूर्व नियोजित साजिश (Pre-planned Conspiracy)** थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में गठित तीन-सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने सरकार को अपनी **857 पेज की विस्तृत रिपोर्ट** सौंप दी है, जिसमें समाजवादी पार्टी के सांसद जिया-उर-रहमान बर्क समेत कई लोगों को हिंसा भड़काने और षड्यंत्र का आरोपी बताया गया है।
🔍 857 पेज की जांच रिपोर्ट के प्रमुख और सनसनीखेज खुलासे:
- सर्वे से पहले रची गई साजिश: 19 नवंबर 2024 को कोर्ट द्वारा जामा मस्जिद के सर्वे आदेश के तुरंत बाद ही हिंसा का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया गया था।
- अफवाह और भ्रामक प्रचार: फर्जी वीडियो फैलाकर लोगों को यह विश्वास दिलाया गया कि सर्वे के बहाने मस्जिद को ढहाने या हड़पने की कोशिश की जा रही है।
- प्रमुख नाम: रिपोर्ट में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क, संभल विधायक पुत्र सोहेल इकबाल, जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली, एडवोकेट कासिम जमाल, सचिव मशहूद अली फारूकी, उपसदर लहदन खान और अन्य सदस्यों के नाम मुख्य साजिशकर्ताओं के रूप में शामिल हैं।
- राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई: बर्क और सोहेल इकबाल के बीच पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, तुर्क और पठान गुटों में वर्चस्व की जंग तथा सरकार-पुलिस को बदनाम करने की होड़ ने माहौल को और अधिक हिंसक बनाया।
🚨 पथराव, दंगा सामग्री की लूट और 12-बोर के कारतूस
आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, 24 नवंबर को उपद्रवियों ने सुनियोजित तरीके से पुलिस टीम पर भारी पथराव किया, गोलीबारी की और दंगा नियंत्रण सामग्री तक लूट ली। इस हिंसक झड़प में 28 पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी घायल हुए थे।
🎯 चारों मौतें 'मुस्लिम पक्ष की ओर से हुई फायरिंग' से हुईं: आयोग
रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि हिंसा के दौरान हुई **चारों मौतों का कारण मुस्लिम पक्ष की ओर से की गई सुनियोजित गोलीबारी** थी। मृतकों के परिजनों ने भी पुलिस फायरिंग से मौत का दावा नहीं किया। FSL (फॉरेंसिक लैब) और सीन री-क्रिएशन की जांच रिपोर्ट में भी यही तथ्य साबित हुए हैं। घटनास्थल से 12-बोर के कारतूस बरामद किए गए थे।
“भीषण पथराव, गोलीबारी और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पुलिस-प्रशासन ने बेहद संयम और तत्परता से स्थिति पर काबू पाया। हिंसा और आगजनी पर त्वरित नियंत्रण पाने के लिए न्यायिक जांच आयोग ने जिला प्रशासन की भूमिका की सराहना की है।”
🏛️ तीन सदस्यीय आयोग ने तैयार की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश सरकार ने 28 नवंबर 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस **देवेंद्र कुमार अरोड़ा** की अध्यक्षता में इस तीन-सदस्यीय आयोग का गठन किया था। आयोग ने तमाम सबूतों, FSL रिपोर्ट, गवाहों के बयानों और साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन कर यह 857 पेज का व्यापक दस्तावेज तैयार किया है, जिसने संभल हिंसा के पीछे के पूरे षड्यंत्र को बेनकाब कर दिया है।
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