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UPMRC की बड़ी उपलब्धि: पुराने लखनऊ में दौड़ेगी मेट्रो; ₹5,801 करोड़ के फेज-1बी अंडरग्राउंड सेक्शन का काम 3 साल में होगा पूरा

एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मिला लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के अंडरग्राउंड सेक्शन का कॉन्ट्रैक्ट: ₹1,632 करोड़ में बनेंगे चारबाग से चौक तक 7 भूमिगत स्टेशन

📍 स्थान: लखनऊ (उत्तर प्रदेश) | 📅 दिनांक: 14 अक्टूबर 2026 | 🚇 श्रेणी: लखनऊ मेट्रो, यूपीएमआरसी, शहरी बुनियादी ढांचा, उत्तर प्रदेश विकास

लखनऊ: उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) ने लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (फेज-1बी) के निर्माण की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रतिष्ठित निर्माण कंपनी एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर (Afcons Infrastructure) ₹1,632 करोड़ (जीएसटी सहित) की सबसे कम वित्तीय बोली लगाकर चारबाग से चौक मेट्रो स्टेशन तक के 6.52 किलोमीटर लंबे भूमिगत सेक्शन के डिजाइन और निर्माण का टेंडर हासिल करने में सफल रही है। इस परियोजना के तहत पुराने लखनऊ के घनी आबादी वाले ऐतिहासिक इलाकों के नीचे सात भूमिगत मेट्रो स्टेशन और उससे जुड़े महत्वपूर्ण सिविल कार्यों का निर्माण किया जाएगा।

📌 लखनऊ मेट्रो ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर टेंडर के मुख्य बिंदु:

  • ₹1,632 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट: एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर ने सबसे कम बोली (L-1) लगाकर हासिल किया प्रतिष्ठित भूमिगत सेक्शन का कार्य।
  • चारबाग से चौक तक भूमिगत रूट: 6.52 किमी लंबे इस सेक्शन में पुराने लखनऊ के तहत 7 अत्याधुनिक अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन तैयार होंगे।
  • तीन वर्ष की समय-सीमा: लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (LOA) जारी होने के बाद कार्य पूरा करने के लिए 36 महीने (3 वर्ष) का समय तय।
  • कड़ी प्रतिस्पर्धा: टेंडर प्रक्रिया में एफकॉन्स के साथ लार्सन एंड टुब्रो (L&T), टाटा प्रोजेक्ट्स, एचसीसी और सैम इंडिया जैसी 5 शीर्ष कंपनियां शामिल थीं।
  • कुल ₹5,801 करोड़ का प्रोजेक्ट: फेज-1बी में कुल 12 स्टेशन (5 एलिवेटेड और 7 भूमिगत) होंगे, जिनका निर्माण समानांतर रूप से तेजी से कराया जाएगा।

📊 लखनऊ मेट्रो फेज-1बी (ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर): परियोजना का खाका

परियोजना घटक आधिकारिक विवरण व मानक
कॉरिडोर का नाम व चरण ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (चारबाग से वसंत कुंज) — फेज-1बी
सफल निर्माण एजेंसी मेसर्स एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर (Afcons Infrastructure)
अनुबंध मूल्य (बोली राशि) ₹1,632 करोड़ (जीएसटी सहित)
भूमिगत सेक्शन की लंबाई लगभग 6.52 किलोमीटर (चारबाग से चौक तक)
स्टेशनों का वर्गीकरण कुल 12 स्टेशन (7 भूमिगत एवं 5 एलिवेटेड)
परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग ₹5,801 करोड़
कार्य पूर्ण करने की अवधि एलओए जारी होने के बाद 3 वर्ष (36 माह)

5 दिग्गज कंपनियों के बीच मुकाबला, एफकॉन्स ने लगाई न्यूनतम बोली

चारबाग से चौक तक भूमिगत टनलिंग और 7 स्टेशनों के निर्माण के लिए आयोजित टेंडर प्रक्रिया में देश की पांच शीर्ष अवसंरचना कंपनियों ने तकनीकी और वित्तीय निविदाएं जमा की थीं। इनमें एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर, लार्सन एंड टुब्रो (L&T), टाटा प्रोजेक्ट्स, हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (HCC) और सैम इंडिया प्रोजेक्ट्स शामिल थीं।

यूपीएमआरसी द्वारा 5 अक्टूबर 2026 को वित्तीय निविदाएं खोली गईं, जिसमें एफकॉन्स की बोली सबसे प्रतिस्पर्धी पाई गई। औपचारिकताएं पूरी होने के साथ ही कंपनी को लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (LOA) सौंपा जाएगा, जिसके बाद धरातल पर यूटिलिटी शिफ्टिंग और टनल बोरिंग मशीन (TBM) की लॉन्चिंग की तैयारी शुरू होगी।

'पुराने और नए लखनऊ के बीच सेतु बनेगा ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर': एमडी सुशील कुमार

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक श्री सुशील कुमार ने इस उपलब्धि को लखनऊ के सार्वजनिक परिवहन तंत्र के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि फेज-1बी पुराने लखनऊ की यातायात समस्याओं का स्थायी समाधान साबित होगा।

“ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पुराने और नए लखनऊ के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। चारबाग से वसंत कुंज तक मेट्रो का विस्तार पुराने लखनऊ के घनी आबादी वाले और ऐतिहासिक क्षेत्रों के करीब तेज, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराएगा। आवागमन को सुगम बनाने के साथ-साथ यह परियोजना बुनियादी ढांचे के विकास को गति देगी और सड़क यातायात के दबाव को काफी हद तक कम करेगी।”
— सुशील कुमार (प्रबंध निदेशक, UPMRC)

एलिवेटेड सेक्शन और वसंत कुंज डिपो के टेंडर पहले ही आवंटित

लगभग ₹5,801 करोड़ की कुल लागत से बनने वाले फेज-1बी को समयबद्ध तरीके से संचालित करने के लिए UPMRC ने समानांतर कार्यनीति अपनाई है:

  • एलिवेटेड रूट: चौक से आगे वसंत कुंज तक पांच एलिवेटेड मेट्रो स्टेशनों के वायाडक्ट निर्माण का टेंडर निगम द्वारा पहले ही जारी किया जा चुका है।
  • वसंत कुंज डिपो: मेट्रो ट्रेनों के रखरखाव और संचालन के लिए वसंत कुंज में बनने वाले नए मेट्रो डिपो का कार्य भी आवंटित हो चुका है।
  • समानांतर निर्माण: भूमिगत और एलिवेटेड दोनों हिस्सों का सिविल कार्य एक साथ आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे अगले तीन वर्षों के भीतर पूरे कॉरिडोर पर वाणिज्यिक सेवाएं शुरू की जा सकें।
निष्कर्ष: एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर को अंडरग्राउंड पैकेज का कॉन्ट्रैक्ट मिलना लखनऊ मेट्रो फेज-1बी के लिए निर्णायक मील का पत्थर है। चारबाग, अमीनाबाद, चौक और ठाकुरगंज जैसे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों को भूमिगत मेट्रो से जोड़ने से राजधानी में सुगम, प्रदूषण-मुक्त और तीव्र गतिशीलता के एक नए युग का सूत्रपात होगा।

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