‘आयुष्मान भारत ने दिया स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत कवच’: इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित हुआ ‘आयुष्मान संवाद’; डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक बोले— गरीब मरीज का अधिकार सर्वोपरि
लखनऊ: प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के सफलतापूर्वक 8 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बुधवार को राजधानी के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में भव्य ‘आयुष्मान संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि ‘आयुष्मान भारत’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए देश के करोड़ों गरीब और वंचित परिवारों के लिए जीवनरक्षक स्वास्थ्य सुरक्षा का सबसे मजबूत कवच साबित हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गरीब मरीज का अधिकार सर्वोपरि है और योजना में गड़बड़ी करने वाले अस्पतालों पर निलंबन, डी-एम्पैनलमेंट व सख्त रिकवरी की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।
📌 आयुष्मान संवाद के प्रमुख बिंदु:
- सफलता के 8 वर्ष: प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना ने देश भर में स्वास्थ्य सेवा की दिशा बदलकर गरीबों को गंभीर बीमारियों के इलाज के वित्तीय संकट से मुक्त किया।
- मरीज का हित सर्वोपरि: अस्पताल की गुणवत्ता, फायर सेफ्टी, डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता और डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स पर विशेष जोर।
- गड़बड़ी करने वालों पर सख्त हंटर: डेटा एनालिटिक्स और फील्ड ऑडिट के जरिए संदिग्ध क्लेम पकड़कर लापरवाह अस्पतालों का निलंबन, डी-एम्पैनलमेंट और आर्थिक रिकवरी।
- कार्ड बनवाने की अपील: डिप्टी सीएम ने आह्वान किया कि जो भी पात्र परिवार छूटे हैं, वे तुरंत अपना आयुष्मान कार्ड बनवाएं ताकि इलाज के अभाव में कोई जान न जाए।
- कोरोना योद्धाओं व कार्यकर्ताओं का आभार: योजना के सफल संचालन में जुटे चिकित्सकों, आयुष्मान मित्रों, आशा बहुओं और सीएमओ की सराहना।
📊 आयुष्मान भारत योजना (PM-JAY) एवं सुशासन फ्रेमवर्क
| प्रमुख घटक | कार्यप्रणाली एवं सरकार का विजन |
|---|---|
| कार्यक्रम एवं अवसर | 'आयुष्मान संवाद' (PM-JAY के सफल 8 वर्ष पूर्ण होने पर) |
| प्राथमिक उद्देश्य | प्रत्येक पात्र परिवार तक कैशलेस उपचार, शत-प्रतिशत कार्ड सैचुरेशन |
| निगरानी तंत्र | एआई-संचालित डेटा एनालिटिक्स, फील्ड ऑडिट, रैंडम फिजिकल वेरिफिकेशन |
| अस्पताल मानक | NABH गुणवत्ता मानक, अनिवार्य फायर सेफ्टी एनओसी, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपस्थिति |
| अनियमितताओं पर कार्रवाई | पैनल से बाहर करना (De-empanelment), ब्लैकलिस्टिंग और वित्तीय रिकवरी |
"ईमानदार अस्पताल हमारे सहयोगी, लेकिन गड़बड़ी पर कोई रियायत नहीं": ब्रजेश पाठक
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने निजी व सरकारी सूचीबद्ध अस्पतालों को स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले संस्थानों को पूरा सहयोग और समय पर क्लेम भुगतान सुनिश्चित कर रही है। परंतु किसी भी स्तर पर मरीजों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने या फर्जी क्लेम जनरेट करने की प्रवृत्ति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
"सरकार का संकल्प बिल्कुल स्पष्ट है—गरीब और असहाय मरीज का अधिकार सबसे ऊपर है। जो अस्पताल निष्ठा से सेवा कर रहे हैं, वे हमारे साझीदार हैं। लेकिन अगर किसी अस्पताल ने फर्जीवाड़ा किया या मरीज से गैर-कानूनी वसूली की कोशिश की, तो उनके खिलाफ डी-एम्पैनलमेंट और आर्थिक दंड की ऐसी कार्रवाई होगी जो नजीर बनेगी। आर्थिक तंगी के कारण प्रदेश में किसी भी नागरिक का आवश्यक इलाज नहीं रुकेगा।"
— ब्रजेश पाठक (उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री, उत्तर प्रदेश)
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और आधुनिक ऑडिट प्रणाली से बढ़ेगी पारदर्शिता
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि आने वाले समय में योजना की पारदर्शिता को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के माध्यम से और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है। मरीजों के इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड्स (EHR) को डिजिटल रूप से जोड़ने से अनावश्यक जांचों और दोहरे क्लेम पर रोक लगेगी:
- रियल-टाइम डेटा एनालिटिक्स: किसी भी अस्पताल में असामान्य सर्जरी या संदिग्ध क्लेम ट्रेंड्स की पहचान के लिए सॉफ्टवेयर आधारित अलर्ट सिस्टम क्रियाशील है।
- त्वरित शिकायत निवारण: टोल-फ्री हेल्पलाइन और ऑनलाइन ग्रीवेंस पोर्टल के जरिए मरीजों की शिकायतों का 24 से 48 घंटे में समाधान।
- अस्पतालों की रैंकिंग व ग्रेडिंग: मरीजों के फीडबैक और क्लीनिकल आउटकम के आधार पर सूचीबद्ध अस्पतालों का स्वतंत्र मूल्यांकन।
शत-प्रतिशत पात्र परिवारों को कार्ड से जोड़ने का आह्वान
उपमुख्यमंत्री ने आम जनता से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों व अधिकृत सीएससी केंद्रों से ही अपना आयुष्मान कार्ड बनवाएं।
उन्होंने योजना की रीढ़ बने फील्ड कार्यकर्ताओं—विशेष रूप से आयुष्मान मित्रों, जमीनी स्तर पर काम कर रहीं आशा बहनों, स्वास्थ्य कर्मियों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) और प्रशासनिक टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया, जिनके प्रयासों से उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक आयुष्मान कार्ड जारी करने वाले राज्यों में अग्रणी बना हुआ है।
समारोह में उपस्थित रहे शीर्ष स्वास्थ्य नीति-निर्माता
‘आयुष्मान संवाद’ के इस गरिमामयी सत्र में राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के शीर्ष प्रशासनिक व चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे:
- हेकाली वी. झिमोमी: प्रमुख सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, उप्र
- रितु माहेश्वरी: सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, उप्र
- डॉ. पीयूष सिंगला: निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA)
- अर्चना वर्मा: मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO), स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज)
- डॉ. पवन कुमार अरुण: महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, उप्र
- डॉ. रंजना खरे: महानिदेशक, ट्रेनिंग, स्वास्थ्य विभाग
- डॉ. पराग रिंदनी: मुख्य कार्यपालक अधिकारी, एनएबीएच (NABH)

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