खाद्य प्रतिष्ठानों में लाइसेंस से लेकर तापमान रिकॉर्ड तक दुरुस्त रखना अनिवार्य: यूपी खाद्य सुरक्षा विभाग ने जारी की सख्त गाइडलाइन; लापरवाही पर ‘जीरो टॉलरेंस’
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के नागरिकों को मिलावटरहित, सुरक्षित और पौष्टिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) विभाग ने प्रदेश भर के सभी खाद्य कारोबारियों (FBOs) के लिए विस्तृत अनुपालन गाइडलाइन जारी की है। इस नई नियमावली के तहत होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, मिठाई दुकानों और कैटरर्स के लिए FSSAI लाइसेंस व रजिस्ट्रेशन से लेकर खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण, डीप फ्रीजर के तापमान नियंत्रण, प्रयुक्त खाद्य तेल (UCO) के वैज्ञानिक निस्तारण और कर्मचारियों के मेडिकल फिटनेस रिकॉर्ड का नियमित संधारण अनिवार्य कर दिया गया है।
📌 FSDA नई गाइडलाइन के प्रमुख प्रावधान:
- अनिवार्य डिस्प्ले: मुख्य काउंटर पर FSSAI लाइसेंस/पंजीकरण, फूड सेफ्टी डिस्प्ले बोर्ड और ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट ऐप’ का क्यूआर (QR) कोड लगाना बाध्यकारी।
- सख्त तापमान मानक: फ्रोजन फूड्स के लिए -18°C या उससे कम और चिल्ड फूड्स के लिए 5°C से कम तापमान का लॉगबुक रिकॉर्ड रखना आवश्यक।
- भोजन रीहीटिंग नियम: पकाए गए भोजन को दोबारा परोसने से पहले 74°C तापमान पर कम से कम 4 मिनट तक रीहीट करना होगा।
- प्रयुक्त तेल का निस्तारण: इस्तेमाल किए जा चुके खाद्य तेल (Used Cooking Oil) को सिर्फ अधिकृत बायो-डीजल संग्रह एजेंसियों को ही सौंपा जाएगा।
- पर्सनल हाइजीन व फिटनेस: रसोई में कार्यरत सभी कर्मचारियों के लिए हेयरनेट, एप्रन और दस्ताने पहनना अनिवार्य; संक्रामक रोग से ग्रस्त कर्मियों के कार्य पर रोक।
📊 खाद्य भंडारण एवं तापमान नियंत्रण मानक तालिका
| खाद्य श्रेणी / प्रक्रिया | निर्धारित तापमान मानक | अनिवार्य अनुपालन |
|---|---|---|
| जमे हुए खाद्य पदार्थ (Frozen Foods) | -18°C (माइनस 18 डिग्री सेल्सियस) | डीप फ्रीजर में डिजिटल तापमान डिस्प्ले व दैनिक लॉगबुक संधारण |
| ठंडे खाद्य पदार्थ (Cold/Chilled Foods) | 5°C या उससे कम | डेयरी उत्पाद, सॉस और सलाद का सुरक्षित चिलिंग प्रशीतन |
| भोजन रीहीटिंग (Reheating Food) | 74°C (न्यूनतम 4 मिनट तक) | बैक्टीरिया और रोगजनकों को समाप्त करने के लिए पूर्ण तापन |
| कच्चे व पके भोजन का भंडारण | पृथक-पृथक रैक/स्थान | शाकाहारी और मांसाहारी सामग्रियों के लिए अलग रंग-कोडेड कटिंग बोर्ड/बर्तन |
किचन इंफ्रास्ट्रक्चर और बर्तनों की गुणवत्ता पर जोर
गाइडलाइन के मुताबिक सभी खाद्य प्रतिष्ठानों में वेंटिलेशन, पर्याप्त रोशनी और सुचारू ड्रेनेज (जल निकासी) प्रणाली का होना आवश्यक है। मक्खियों और कीटों के प्रवेश को रोकने के लिए खिड़कियों और दरवाजों पर मजबूत कीटरोधी वायरमेश (जाली) लगानी होगी।
खाद्य सामग्री के सीधे संपर्क में आने वाले बर्तन, शेल्फ और कटलरी केवल जंगरोधी स्टेनलेस स्टील या फूड-ग्रेड प्लास्टिक की होनी चाहिए, जिसे आसानी से साफ और सैनिटाइज किया जा सके। फर्श, दीवारें और छत किसी भी प्रकार की सीलन या टूट-फूट से मुक्त होने चाहिए।
कर्मचारियों की फिटनेस और कुकिंग ऑयल निस्तारण
रसोईघर में कार्यरत स्टाफ की व्यक्तिगत स्वच्छता पर कड़ा पहरा रहेगा:
- व्यक्तिगत सुरक्षा: खाना पकाने और परोसने वाले कर्मियों को साफ सुथरे कपड़े, एप्रन, हेयरनेट और हैंड ग्लव्स पहनना अनिवार्य होगा।
- मेडिकल फिटनेस: संक्रामक रोगों, सर्दी-खांसी या त्वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित किसी भी कर्मचारी को खाद्य सामग्री के संपर्क में आने की अनुमति नहीं होगी। सभी कर्मियों का समय-समय पर अधिकृत चिकित्सक से फिटनेस सर्टिफिकेट लेना होगा।
- पेस्ट कंट्रोल: प्रतिष्ठान में प्रमाणित एजेंसी के माध्यम से नियमित पेस्ट कंट्रोल (कीट नियंत्रण) कराना होगा और इसका प्रमाण पत्र सुरक्षित रखना होगा।
- बायो-डीजल निस्तारण: खाद्य तेल को बार-बार गर्म करके पकाने से स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान को देखते हुए यूसीओ (Used Cooking Oil) को फेंकने या दोबारा इस्तेमाल करने के बजाय सीधे अधिकृत एग्रीगेटर्स को बेचना होगा।
इन लापरवाहियों पर रहेगा ‘जीरो टॉलरेंस’
खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले प्रतिष्ठानों पर बिना किसी रियायत के विधिक कार्रवाई की जाएगी। निम्न उल्लंघनों को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है:
"एक्सपायरी डेट पार कर चुकी सामग्री का प्रयोग, दूषित पेयजल व भोजन, रसोई में कॉकरोच/चूहों का प्रकोप, कच्ची और पकी सामग्री का क्रॉस-कंटैमिनेशन, असुरक्षित तापमान पर भंडारण और रासायनिक संदूषण पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत तत्काल प्रतिष्ठान सीज करने व लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई होगी।"


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