"हमारे ग्राम स्वराज में परिवारवादी मॉडल की कोई जगह नहीं": गांधी जयंती पर विपक्ष पर बरसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ; 57,600 ग्राम सचिवालयों से बदली ग्रामीण यूपी की तस्वीर
लखनऊ: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्राम स्वराज के वास्तविक स्वरूप को रेखांकित करते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर बिना नाम लिए तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने दो टूक कहा कि जिन्होंने गांवों को केवल वोट बैंक माना और उन्हें अराजकता व जातिवाद की आग में झोंका, उन्होंने ग्रामीण भारत के विकास को दशकों पीछे धकेला। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार के ‘ग्राम स्वराज’ में किसी भी तरह के परिवारवादी मॉडल के लिए कोई स्थान नहीं है।
📌 मुख्यमंत्री के संबोधन के प्रमुख बिंदु:
- परिवारवाद पर सीधा प्रहार: गांवों को वोट बैंक समझकर जातिवाद व अराजकता फैलाने वालों ने ग्रामीण प्रगति को बाधित किया।
- 2017 से पहले की बदहाली: ग्रामीणों को आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों के लिए तहसील व जिला मुख्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे।
- 57,600 ग्राम सचिवालय: सभी मूलभूत नागरिक सुविधाएं अब गांव स्तर पर ही उपलब्ध; प्रत्येक गांव में 5 से 7 रोजगार के अवसर सृजित।
- 11,350 डिजिटल लाइब्रेरी: ग्रामीण छात्र-छात्राओं को आधुनिक शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना।
- पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था: ई-ग्राम स्वराज पोर्टल, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और प्रत्यक्ष डिजिटल भुगतान से भ्रष्टाचार पर लगी पूर्ण लगाम।
📊 उत्तर प्रदेश ग्रामीण सशक्तिकरण: 2017 से पहले बनाम वर्तमान स्थिति
| प्रमुख क्षेत्र / मानक | वर्ष 2017 से पूर्व (विपक्षी शासन) | वर्तमान स्थिति (योगी सरकार) |
|---|---|---|
| प्रशासनिक सुविधाएं | तहसील और थानों के निरंतर चक्कर | 57,600 ग्राम सचिवालयों से गांव में ही समाधान |
| वित्तीय पारदर्शिता | कागजी विकास और अपारदर्शी व्यवस्था | ई-ग्राम स्वराज व 100% डिजिटल भुगतान |
| शिक्षा व अध्ययन संसाधन | पुस्तकालयों और इंटरनेट का अभाव | 11,350 ग्राम पंचायतों में आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी |
| स्थानीय स्तर पर रोजगार | गांवाें से शहरों की ओर पलायन | प्रत्येक ग्राम सचिवालय से 5 से 7 युवाओं को काम |
"2017 से पहले गांवों को मिले सिर्फ वादे, न पारदर्शिता थी न जवाबदेही": सीएम योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने विचार साझा करते हुए पिछली सरकारों के कार्यकाल पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि 2017 से पूर्व ग्रामीण अंचल केवल राजनीतिक भाषणों और वादों तक सीमित थे।
"गांवों को केवल वोट बैंक समझने और उन्हें अराजकता व जातिवाद की आग में झोंकने वाली राजनीति ने गांवों को दशकों तक विकास की मुख्यधारा से दूर रखा। हमारी सरकार गांव को विकास की अंतिम सीढ़ी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की पहली बुनियादी इकाई मानती है। हमारे ग्राम स्वराज में परिवारवादी मॉडल की कोई जगह नहीं है।"
— योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)
57,600 ग्राम सचिवालय: गांव स्तर पर ही समाधान और रोजगार
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान प्रदेश सरकार ने ग्रामीण प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह बदल दिया है। वर्तमान में प्रदेश भर के 57,600 ग्राम सचिवालयों में पंचायत सहायक, बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट (BC सखी) और तकनीकी सहायक नियमित रूप से सेवाएं दे रहे हैं।
इसके चलते गांव के बुजुर्गों, महिलाओं और किसानों को छोटे-छोटे प्रमाण पत्रों व योजनाओं के सत्यापन के लिए ब्लॉक या तहसील जाने की मजबूरी समाप्त हो गई है। ग्राम सचिवालयों के प्रभावी संचालन ने प्रत्येक गांव में प्रत्यक्ष रूप से 5 से 7 युवाओं को रोजगार से भी जोड़ा है।
11,350 ग्राम पंचायतों में आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी
ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं और आधुनिक ज्ञान से लैस करने के लिए राज्य सरकार 11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित कर रही है। इन पुस्तकालयों में कंप्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट और डिजिटल पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे किसान और मजदूर परिवारों के बच्चे भी गांव में रहकर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), यूपीपीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें।
"ग्राम स्वराज नारा नहीं, आत्मनिर्भर गांव का दृढ़ संकल्प"
सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार के लिए ग्राम स्वराज केवल एक राजनीतिक जुमला नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सपनों के स्वावलंबी और सशक्त गांव की परिकल्पना को साकार करने का संकल्प है।
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल, जियो-टैगिंग, पारदर्शी ऑनलाइन टेंडरिंग और सीधा लाभार्थियों के खातों में फंड ट्रांसफर जैसी पहलों ने पंचायतों के कामकाज को बिचौलियों से पूरी तरह मुक्त कर दिया है।

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