📘 🐦 📸
तेज़, सटीक और भरोसेमंद खबरें
🔴 Breaking
Loading news...
Voice of Capital को Google पर पसंदीदा स्रोत बनाएं
ताजा खबरों के लिए हमें Google पर Follow करें

Pages

'पीड़ित की संतुष्टि सरकार का ध्येय': मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में सुनीं समस्याएं; जमीन कब्जामुक्त कराने और दोषियों को सजा के आदेश

जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त रुख: वास्तविक समस्या लेकर फरियादी दोबारा आया तो अफसरों की तय होगी जवाबदेही; अवैध कब्जे तत्काल खाली कराने के निर्देश

📍 स्थान: 5-कालिदास मार्ग (जनता दर्शन), लखनऊ | 📅 दिनांक: 05 अक्टूबर 2026 | 🏛️ श्रेणी: जनता दर्शन, सुशासन, जनशिकायत निस्तारण, राजस्व-पुलिस प्रशासन एवं उत्तर प्रदेश शासन

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह अपने सरकारी आवास पर आयोजित 'जनता दर्शन' में प्रदेश के दूर-दराज के जनपदों से आए सैकड़ों नागरिकों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनीं। जनता की शिकायतों के निस्तारण में प्रशासनिक शिथिलता पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दो टूक चेतावनी दी कि हर जायज समस्या का निस्तारण तय समयसीमा में पारदर्शी ढंग से होना चाहिए। यदि कोई फरियादी अपनी वास्तविक समस्या को लेकर दूसरी बार 'जनता दर्शन' में आने को मजबूर हुआ, तो संबंधित लापरवाह अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

📌 जनता दर्शन के प्रमुख निर्देश:

  • सख्त जवाबदेही: वास्तविक समस्या पर फरियादी के दोबारा आने पर संबंधित नोडल व फील्ड अफसरों पर गिरेगी गाज।
  • समयबद्ध निस्तारण: पीड़ित की पूर्ण संतुष्टि ही सरकारी तंत्र का अंतिम ध्येय; जायज समस्या का समय पर समाधान न होना अक्षम्य।
  • भू-माफिया व दबंगों पर प्रहार: गरीबों और असहायों की भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश।
  • संवेदनशील जनसंवाद: मुख्यमंत्री ने कुर्सियों पर बैठे प्रत्येक नागरिक के पास खुद पहुंचकर प्रार्थना पत्र लिए और आश्वस्त किया।
  • पारदर्शिता की हिदायत: शिकायतों के निस्तारण में खानापूरी करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों पर कड़ी निगरानी रखने का आदेश।

📊 जनता दर्शन 2026: प्रशासनिक समीक्षा एवं प्रमुख दिशानिर्देश

प्रमुख बिंदु मुख्यमंत्री के निर्देश एवं कार्यप्रणाली
जनसंवाद की रूपरेखा सोमवार सुबह, मुख्यमंत्री आवास परिसर (लखनऊ)
प्राथमिकता का मूलमंत्र 'पीड़ित की संतुष्टि ही शासन का मुख्य ध्येय'
पुनरावृत्ति पर रुख वास्तविक शिकायत लेकर दूसरी बार आने पर अफसर होंगे सीधे जिम्मेदार
भूमि विवाद व अवैध कब्जा दबंगों से जमीन तत्काल मुक्त कराने व दोषियों को कानूनी दंड दिलाने के आदेश
कार्यवाही का प्रारूप प्रार्थना पत्रों पर त्वरित संदर्भ अंकित कर संबंधित जिलों के डीएम/एसपी को प्रेषित

प्रत्येक फरियादी तक खुद पहुंचे मुख्यमंत्री, जानी जमीनी हकीकत

जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक औपचारिकता से परे जाकर कुर्सियों पर बैठाए गए बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं और दिव्यांगजनों के पास व्यक्तिगत रूप से पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने धैर्यपूर्वक हर व्यक्ति की व्यथा जानी, उनके प्रार्थना पत्र लिए और उपस्थित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के लिए निर्देशित किया।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि तहसील और थाना स्तर पर ही अधिकांश मामलों का गुणवत्तापूर्ण समाधान किया जाए, जिससे आम नागरिकों को लंबी दूरी तय करके राजधानी तक न आना पड़े। यदि स्थानीय स्तर पर उदासीनता बरती गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच संस्थित की जाएगी।

दबंगों द्वारा जमीन कब्जाने पर भड़के सीएम: "कड़ा कानूनी सबक सिखाएं"

संवाद के दौरान विभिन्न जिलों से आए कई लोगों ने अपनी पैतृक या निजी भूमि पर स्थानीय दबंगों और भू-माफियाओं द्वारा जबरन कब्जा किए जाने की शिकायतें दर्ज कराईं। इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए मुख्यमंत्री ने राजस्व और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए।

"यदि किसी दबंग या भू-माफिया ने गरीब, असहाय अथवा कमजोर वर्ग की जमीन पर कब्जा करने का दुस्साहस किया है, तो उसके विरुद्ध बिना किसी रियायत के कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। जमीन हर हाल में कब्जामुक्त होनी चाहिए। केवल कब्जा छुड़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कब्जा करने वालों को ऐसा कड़ा कानूनी सबक सिखाया जाए कि कोई दोबारा ऐसा करने की हिम्मत न जुटा सके। पीड़ित को अविलंब न्याय मिले और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाए।"
— योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)

आईजीआरएस और जनता दर्शन फीडबैक की होगी थर्ड-पार्टी मॉनिटरिंग

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायतों के निस्तारण में केवल कागजी औपचारिकता पूरी करने की प्रवृत्ति कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर से जनता दर्शन में प्राप्त सभी प्रार्थना पत्रों की ऑनलाइन ट्रैकिंग (IGRS Portal) की जाती है।

अधिकारियों को आगाह किया गया कि निस्तारण के बाद शिकायतकर्ता से सीधे संपर्क कर उनकी संतुष्टि की पुष्टि की जाती है। यदि निस्तारण रिपोर्ट में विसंगति पाई गई या समस्या वास्तविक होने के बावजूद अनिस्तारित रही, तो संबंधित जिला प्रशासन के अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप तय होगा।

स्पष्ट संदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कड़ा रुख स्पष्ट करता है कि प्रदेश में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता और जनशिकायतों के त्वरित न्याय में भी समान रूप से लागू है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

📢 WhatsApp से जुड़ें