'रील के लाइक्स नहीं, रियल लाइफ में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाती हैं किताबें': पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा के हिंदी संस्करण का लोकभवन में सीएम योगी ने किया विमोचन
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोकभवन सभागार में देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण का भव्य विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने युवाओं को सोशल मीडिया और स्मार्टफोन की आभासी दुनिया के सम्मोहन से बाहर निकलकर ज्ञानवर्धक पुस्तकों से जुड़ने का प्रेरक आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर 5 से 7 घंटे रील देखकर केवल 'लाइक्स' बटोरने के बजाय यदि युवा एक-दो घंटे भी अच्छी पुस्तकों को दें, तो उनकी 'रियल लाइफ' संवर जाएगी और वे जीवन के संघर्षों को पार कर नई ऊंचाइयां छू सकेंगे।
📌 विमोचन समारोह के प्रमुख बिंदु:
- आत्मकथा का विमोचन: रूपा पब्लिकेशंस द्वारा प्रकाशित पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा के अधिकृत हिंदी संस्करण का लोकार्पण।
- युवाओं को मुख्यमंत्री की सीख: आभासी चमक-दमक के बजाय महापुरुषों के संघर्ष और पुरुषार्थ से सीखने की आवश्यकता।
- गांव-गांव पुस्तकालय क्रांति: उत्तर प्रदेश के 57,600 ग्राम सचिवालयों में स्थापित लाइब्रेरी और डिजिटल पुस्तकालयों तक पहुंचेगी यह आत्मकथा।
- परौंख से रायसीना हिल्स तक का सफर: कानपुर देहात के एक मिट्टी के घर से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की अद्भुत व निष्कलंक गाथा।
- विधानसभा सदस्यों को उपहार: विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने विधायकों के अध्ययन हेतु पुस्तक की 500 प्रतियों की मांग रखी।
📊 आत्मकथा एवं विमोचन कार्यक्रम: संक्षिप्त रूपरेखा
| विवरण / घटक | तथ्य एवं सूचनाएं |
|---|---|
| पुस्तक का नाम | ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ (हिंदी संस्करण) |
| लेखक / केंद्रीय व्यक्तित्व | रामनाथ कोविन्द (पूर्व राष्ट्रपति, भारत गणराज्य) |
| मुख्य अतिथि (विमोचनकर्ता) | योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश) |
| प्रकाशक समूह | रूपा पब्लिकेशंस (प्रबंध निदेशक: कपिश मेहरा) |
| आयोजन स्थल | लोकभवन सभागार, विधान सभा मार्ग, लखनऊ |
'अभावों को ढाल नहीं, संघर्ष का आधार बनाएं युवा': मुख्यमंत्री योगी
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द का जीवन भारतीय लोकतंत्र और गणतंत्र की सबसे सुंदर मिसाल है। कानपुर के परौंख गांव में एक अत्यंत साधारण परिवार में जन्मे कोविन्द जी ने बाल्यावस्था में ही मातृ छाया खो दी थी, लेकिन उन्होंने कभी अभावों को अपनी प्रगति में बाधा नहीं बनने दिया।
“बड़ा वही बनता है जिसमें विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला करने का साहस हो। आज के युवा यदि सोशल मीडिया पर 5 से 7 घंटे बर्बाद करने के बजाय 1-2 घंटे महापुरुषों की आत्मकथाओं और ग्रंथों को समर्पित करें, तो उनका जीवन सार्थक हो सकता है। रील के लाइक्स क्षणिक हैं, जबकि पुस्तकों से अर्जित ज्ञान ही रियल लाइफ में दिशा दिखाता है।”
— योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद भी रामनाथ कोविन्द का अपनी जन्मभूमि और पुराने साथियों के प्रति आत्मीय भाव कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने अपने पैतृक घर को समाज सेवा हेतु समर्पित किया, जिसे आज आवासीय विद्यालय के रूप में संचालित किया जा रहा है।
57,600 ग्राम सचिवालयों में पुस्तकालय, गोरखपुर-लखनऊ में पुस्तक प्रेम
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में पठन-पाठन की संस्कृति को पुनर्जीवित करने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया:
- ग्राम सचिवालयों में लाइब्रेरी: प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों के सचिवालय भवनों में एक विशेष कक्ष को पुस्तकालय के रूप में विकसित किया गया है, जहां ग्रामीण बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
- डिजिटल लाइब्रेरी नेटवर्क: बेसिक, माध्यमिक से लेकर विश्वविद्यालयों तक डिजिटल लाइब्रेरी का नेटवर्क खड़ा किया जा रहा है। सरकार प्रयास करेगी कि पूर्व राष्ट्रपति की यह प्रेरणादायी आत्मकथा इन सभी पुस्तकालयों में उपलब्ध हो।
- पुस्तक मेलों की सफलता: राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के मेलों का जिक्र करते हुए सीएम ने बताया कि लखनऊ और विशेषकर गोरखपुर में बड़ी संख्या में युवाओं ने पुस्तकें खरीदीं, जिससे सिद्ध होता है कि अवसर मिलने पर आज की पीढ़ी भी पढ़ने में गहरी रुचि रखती है।
'कच्चे घर से पक्के इरादों की यात्रा': उपमुख्यमंत्री व विधानसभा अध्यक्ष के विचार
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पूर्व राष्ट्रपति के जीवन को 'कच्चे घर, पक्के इरादे' की संज्ञा देते हुए प्रकाशक से आग्रह किया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा के सभी माननीयों (विधायकों) के अध्ययन हेतु इस पुस्तक की 500 प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यह आत्मकथा सार्वजनिक जीवन में शुचिता, सादगी और निरहंकार बने रहने की सीख देती है। वहीं उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि एक निर्धन ग्रामीण पृष्ठभूमि के व्यक्ति का देश के सर्वोच्च पद पर आसीन होना बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान और गणतंत्र की जीवंत शक्ति है।
कार्यक्रम में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण, पूर्व प्रथम महिला सविता कोविन्द और रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपिश मेहरा सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, अधिकारी व प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।


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