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'कच्चे घर थे लेकिन इरादे पक्के थे': पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा पर बोले सीएम योगी; युवाओं को दी रील छोड़ किताबें पढ़ने की सीख

'अभावों को ढाल नहीं, संघर्ष का मार्ग बनाया': पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा पर बोले सीएम योगी; बोले— कच्चे घर थे, लेकिन इरादे पक्के थे

📍 स्थान: लोकभवन सभागार, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) | 📅 दिनांक: 14 अक्टूबर 2026 | 📚 श्रेणी: पुस्तक विमोचन, आत्मकथा, प्रेरणादायक जीवन यात्रा, उत्तर प्रदेश शासन

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन सभागार में बुधवार को भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण का भव्य विमोचन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व राष्ट्रपति के जीवन को परिश्रम, पुरुषार्थ और लोकतांत्रिक मूल्यों का अद्वितीय आदर्श बताया। उन्होंने कहा कि कानपुर देहात के परौंख गांव में एक साधारण मिट्टी के घर में जन्म लेकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने वाले रामनाथ कोविन्द ने कभी अभावों को पलायन की ढाल नहीं बनाया, बल्कि संघर्ष और आत्मबल से अपनी मंजिल तय की।

📌 विमोचन समारोह एवं संबोधन के प्रमुख बिंदु:

  • आत्मकथा का हिंदी लोकार्पण: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व में विमोचित आत्मकथा के हिंदी रूपांतरण का गृह राज्य उत्तर प्रदेश में विमोचन।
  • कच्चे घर, पक्के इरादे: विपरीत परिस्थितियों में बिना किसी से याचना किए स्वावलंबन और न्याय की लड़ाई लड़ते हुए सर्वोच्च पद तक की यात्रा।
  • जन्मभूमि से अटूट नाता: सर्वोच्च पद से निवृत होने के बाद भी परौंख गांव, पुराने मित्रों, चाय-चाट विक्रेताओं से जीवंत संपर्क बनाए रखना कृतज्ञता की मिसाल।
  • युवाओं को सोशल मीडिया से सीख: 5 से 7 घंटे रील देखकर आभासी लाइक्स बटोरने के बजाय 1-2 घंटे महापुरुषों की पुस्तकें पढ़ने का आह्वान।
  • 57,600 ग्राम सचिवालयों में पुस्तकालय: प्रदेश के हर गांव में लाइब्रेरी कक्ष और डिजिटल लाइब्रेरी का तेजी से हो रहा विस्तार।

📊 जीवन यात्रा एवं विमोचन कार्यक्रम: संक्षिप्त रूपरेखा

विवरण / मानक आधिकारिक तथ्य व संदर्भ
आत्मकथा का शीर्षक ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’
केंद्रीय व्यक्तित्व श्री रामनाथ कोविन्द (पूर्व राष्ट्रपति, भारत गणराज्य)
जन्मस्थली एवं मूल पृष्ठभूमि परौंख गांव, जनपद कानपुर देहात (उत्तर प्रदेश)
सार्वजनिक सेवा के पड़ाव वकील, राज्यसभा सांसद, बिहार के राज्यपाल, भारत के 14वें राष्ट्रपति
शैक्षिक नवाचार पहल 57,600 ग्राम सचिवालयों में पुस्तकालय कक्ष एवं डिजिटल लाइब्रेरी विस्तार

'अभावों को पलायन नहीं, सामर्थ्य का आधार बनाया'

संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामनाथ कोविन्द का जीवन यह सिखाता है कि महानता केवल अनुकूल परिस्थितियों से नहीं, बल्कि प्रतिकूलताओं से टकराने के अदम्य साहस से उपजती है। बाल्यावस्था में मातृ छाया छिन जाने और निर्धनता के बावजूद उन्होंने कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया।

“घर कच्चे थे, लेकिन इरादे पक्के थे। यही संकल्प उनकी जीवन यात्रा का मूल आधार बना। जब परिस्थितियां अनुकूल हों तो हर कोई लोककल्याण कर सकता है, लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब विपरीत समय में भी व्यक्ति अपने आदर्शों से डिगे बिना संघर्ष करे। उन्होंने 145 करोड़ भारतवासियों के संवैधानिक प्रमुख के रूप में पांच वर्षों तक देश का गौरव पूरी दुनिया में बढ़ाया।”
— योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)

मातृभूमि के प्रति अनुराग: भगवान राम के आदर्शों का स्मरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी रामनाथ कोविन्द का अपने गांव परौंख और पुराने साथियों से जीवंत लगाव बना हुआ है। वे जब भी कानपुर या लखनऊ आते हैं, अपने पुराने परिचितों, चाट-चाय वालों से स्नेहपूर्वक मिलते हैं।

इस प्रसंग को रेखांकित करने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रभु श्रीराम के लंका विजय के बाद के उद्गार का उल्लेख किया:

‘अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते, जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।’

(अर्थात: हे लक्ष्मण! सोने की लंका भी मुझे आकर्षित नहीं करती, क्योंकि माता और मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।)

मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति चाहे कितने भी बड़े मुकाम पर पहुंच जाए, उसे अपने मूल, गांव और समाज के उन लोगों को कभी नहीं भूलना चाहिए जिन्होंने उसके निर्माण में योगदान दिया।

सोशल मीडिया के सम्मोहन से निकलें युवा, किताबों से संवारें भविष्य

आधुनिक युग में स्मार्टफोन की लत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों और युवाओं से सीधा संवाद साधा:

  • समय का सार्थक उपयोग: आज युवा प्रतिदिन 5 से 7 घंटे मोबाइल और सोशल मीडिया पर व्यतीत कर रहे हैं। यदि इसमें से केवल एक से दो घंटे बचाकर ग्रंथों व महापुरुषों की जीवनियों को दिए जाएं, तो व्यक्तित्व का अभूतपूर्व विकास होगा।
  • रील बनाम रियल लाइफ: सोशल मीडिया पर रील बनाकर लाइक बटोरना आभासी है, जबकि पुस्तकों से प्राप्त संस्कार और ज्ञान ही व्यक्ति को वास्तविक जीवन (Real Life) की चुनौतियों से लड़ना सिखाते हैं।
  • पुस्तकों के प्रति रुझान: एनबीटी द्वारा लखनऊ और गोरखपुर में लगाए गए पुस्तक मेलों का उदाहरण देते हुए सीएम ने कहा कि युवाओं में अध्ययन की गहरी लालसा है, शासन का दायित्व केवल उन्हें उचित मंच और सुलभ पुस्तकें उपलब्ध कराना है।

57,600 ग्राम सचिवालयों में पुस्तकालय कक्ष; गणमान्यजनों की उपस्थिति

ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रतियोगी माहौल देने के लिए प्रदेश के सभी 57,600 ग्राम सचिवालयों में एक-एक सुसज्जित पुस्तकालय कक्ष तैयार किया गया है। साथ ही बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षण संस्थानों में डिजिटल लाइब्रेरी नेटवर्क स्थापित किया जा रहा है।

इस गरिमामयी समारोह में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द और उनकी धर्मपत्नी सविता कोविन्द, उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एवं ब्रजेश पाठक, वित्त व संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण तथा रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपिश मेहरा सहित शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

निष्कर्ष: 'भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा' केवल एक व्यक्तिगत यात्रा का दस्तावेज नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के उस सामर्थ्य का परिचायक है जहां निष्ठा, परिश्रम और त्याग के बल पर एक साधारण नागरिक राष्ट्र के सर्वोच्च शिखर पर आसीन हो सकता है। यह आत्मकथा आने वाली पीढ़ियों के लिए निरंतर प्रकाश स्तंभ का कार्य करेगी।

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