‘शुद्ध ही शुभ है’ अभियान: उत्तर प्रदेश में 73 खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित; सुधार के बाद बीकानेरवाला और टुंडे कबाबी समेत 56 के लाइसेंस बहाल
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के नागरिकों को स्वच्छ, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खान-पान उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) का ‘शुद्ध ही शुभ है’ अभियान पूरे प्रदेश में सख्त रुख के साथ जारी है। 17 सितंबर 2026 से प्रारंभ हुए इस विशेष अभियान के तहत अब तक 253 खाद्य प्रतिष्ठानों की सघन जांच की जा चुकी है। गंभीर लापरवाही मिलने पर 73 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए गए, जबकि 152 को सुधार नोटिस थमाए गए। हालांकि, विभाग की सख्ती के बाद जिन 56 प्रतिष्ठानों ने खामियां दुरुस्त कर प्रमाण दिए, भौतिक सत्यापन के बाद उनके लाइसेंस बहाल कर दिए गए हैं।
📌 ‘शुद्ध ही शुभ है’ अभियान की मुख्य बातें:
- 253 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण: लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर सहित प्रमुख जिलों में जांच।
- सख्त कार्रवाई: गंभीर कमियों पर 73 के लाइसेंस निलंबित; 152 प्रतिष्ठानों को जारी हुए सुधार नोटिस।
- सुधार पर बहाली: कमियां दूर करने और मौके पर सत्यापन के बाद 56 आउटलेट्स को दोबारा कारोबार की अनुमति मिली।
- ऑनलाइन फूड में पारदर्शिता: EatSure (रेबेल फूड्स) जैसी क्लाउड किचन इकाइयों को ऑनलाइन ऑर्डर पर फ्रोजन और प्री-कुक्ड फूड की स्पष्ट जानकारी देना अनिवार्य।
- फूड लाइसेंस से हटेगा 'हुक्का बार': फूड लाइसेंस में 'हुक्का बार' शब्द दर्ज करने पर पूर्ण प्रतिबंध, संशोधन के कड़े निर्देश।
📊 FSDA कार्रवाई व प्रगति रिपोर्ट: एक नजर में
| प्रशासनिक पैमाना | आंकड़े एवं विवरण |
|---|---|
| अभियान प्रारंभ तिथि | 17 सितंबर 2026 |
| कुल निरीक्षण किए गए प्रतिष्ठान | 253 प्रतिष्ठान |
| निलंबित किए गए लाइसेंस | 73 लाइसेंस (गंभीर कमियों के कारण) |
| जारी किए गए सुधार नोटिस | 152 प्रतिष्ठान |
| सुधार के बाद बहाल लाइसेंस | 56 प्रतिष्ठान (अंडरटेकिंग व सत्यापन के बाद) |
जांच में क्या मिला: कालातीत सामग्री, चूहे-कॉकरोच और अस्वच्छ किचन
छापेमारी के दौरान कई नामी प्रतिष्ठानों में खाद्य सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ती पाई गईं। कुछ जगहों पर एक्सपायर्ड (कालातीत) सामग्री का इस्तेमाल हो रहा था, तो कई जगह रसोई और स्टोरेज एरिया में चूहे व कॉकरोच पाए गए। ड्रेनेज (नालियों) की सफाई नदारद थी और कुक व स्टाफ की व्यक्तिगत स्वच्छता (पर्सनल हाइजीन) भी असंतोषजनक मिली।
"विभाग ने साफ किया है कि यदि किसी भी प्रतिष्ठान में दोबारा कालातीत खाद्य सामग्री पाई गई, तो सीधे लाइसेंस रद्दीकरण और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
सुधार के बाद इन प्रमुख ब्रांड्स के लाइसेंस हुए बहाल
निलंबन के बाद कई बड़े प्रतिष्ठानों ने अपने किचन, स्टोरेज और ड्रेनेज सिस्टम का कायाकल्प किया और फोटो-वीडियो साक्ष्य विभाग को सौंपे। स्थलीय सत्यापन के बाद इनके संचालन को पुनः अनुमति दी गई:
- बीकानेरवाला (Bikanervala)
- टुंडे कबाबी (Tunday Kababi)
- चंपारण मीट (Champaran Meat)
- रेबेल फूड्स / EatSure (Rebel Foods)
- होटल रमाडा (Ramada Hotel Restaurant)
- ला पिनोज पिज्जा (La Pino'z Pizza)
- क्लब जलवा एवं न्यू कृष्णा भोजनालय
*नोट: इन सभी प्रतिष्ठानों से अनिवार्य अंडरटेकिंग ली गई है कि वे भविष्य में तय एसओपी (SOP) का शत-प्रतिशत पालन करेंगे।
ऑनलाइन ऑर्डर पर फ्रोजन फूड बताना जरूरी, 'हुक्का बार' पर रोक
डिजिटल दौर में ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा के लिए FSDA ने दो बड़े नीतिगत निर्देश जारी किए हैं:
- फ्रोजन और प्री-कुक्ड फूड का डिस्क्लोजर: अगर ऑनलाइन डिलीवरी ऐप पर बेचा जाने वाला भोजन पहले से फ्रोजन, प्री-कुक्ड या पार्शियली कुक्ड (आधा पका) है, तो मेनू में इसका स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य होगा, ताकि ग्राहक अपनी पसंद से निर्णय ले सकें।
- फूड लाइसेंस में 'हुक्का बार' अमान्य: विभाग ने स्पष्ट किया कि हुक्का किसी भी रूप में खाद्य श्रेणी में नहीं आता। अतः फूड लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन में 'हुक्का बार' शब्द नहीं लिखा जा सकता। जिन कारोबारियों ने इसे दर्ज करा रखा है, उन्हें तत्काल संशोधन कराना होगा।


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