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अधिकारों की समझ, समानता की सोच: लखनऊ में बालिका लीडर्स के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न; POSH एक्ट और मानवाधिकारों पर हुआ मंथन

मानवाधिकार एवं विकास में लैंगिक समानता पर दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न: इनिशिएटिव फाउंडेशन इंडिया ने 45 बालिका लीडर्स को सिखाए समानता और अधिकारों के मायने

📍 स्थान: बुद्धेश्वर केंद्र, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) | 📅 दिनांक: 18 अक्टूबर 2026 | 👭 श्रेणी: महिला सशक्तीकरण, सामाजिक विकास, मानवाधिकार, गैर-सरकारी संगठन

लखनऊ: समाज में लैंगिक विभेद को समाप्त करने और किशोरियों को नेतृत्वकारी भूमिका के लिए तैयार करने के उद्देश्य से इनिशिएटिव फाउंडेशन इंडिया द्वारा बुद्धेश्वर केंद्र में आयोजित “मानवाधिकार एवं विकास में लैंगिक समानता” विषयक दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला रविवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस आवासीय एवं गतिविधि-आधारित कार्यशाला में संस्था से जुड़ी 45 बालिका लीडर्स ने सक्रिय सहभागिता की। मुख्य प्रशिक्षक प्रवेश वर्मा द्वारा संचालित इस सत्र में बालिकाओं को विधिक अधिकारों, सामाजिक समता, बाल अधिकार और संवैधानिक मूल्यों की व्यावहारिक जानकारी दी गई।

📌 दो दिवसीय बालिका प्रशिक्षण: मुख्य आकर्षण

  • 45 बालिका लीडर्स की भागीदारी: समुदाय में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए चयनित किशोरियों का गहन क्षमता संवर्धन।
  • समानता बनाम समता (Equality vs Equity): खेल, कहानियों और समूह संवाद के जरिए सामाजिक पूर्वाग्रहों और अवसरों की बाधाओं पर विमर्श।
  • POSH एक्ट की जानकारी: कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम कानून और सुरक्षा उपायों की समझ।
  • संविधान और मौलिक अधिकार: भारतीय संविधान की उद्देशिका, बाल अधिकार, माहवारी स्वच्छता प्रबंधन (MHM) और संस्थागत शिकायत तंत्र का प्रशिक्षण।
  • प्रमाणपत्र वितरण: संस्था की बोर्ड सदस्य व सामाजिक कार्यकर्ता शालिनी शुक्ला ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देकर किया सम्मानित।

📊 दो दिवसीय कार्यशाला: सत्रवार विषय एवं रूपरेखा

दिवस / सत्र प्रमुख विषय व मॉड्यूल प्रशिक्षण की विधि एवं माध्यम
प्रथम दिवस लैंगिक समानता, घरेलू श्रम का मूल्यांकन, POSH अधिनियम 'घर की मुर्गी दाल बराबर' वीडियो, सारस-लोमड़ी कहानी, समूह परिचर्चा
द्वितीय दिवस मानवाधिकार, बाल अधिकार, संवैधानिक मूल्य, माहवारी प्रबंधन केस स्टडी, सवाल-जवाब सत्र, संवैधानिक प्रस्तावना वाचन, आयोग तंत्र
समापन सत्र प्रतिक्रिया (Feedback) एवं नेतृत्वकारी संकल्प सहभागिता प्रमाणपत्र वितरण एवं समूह फोटो

कहानियों और गतिविधियों से टूटी रूढ़िवादिता: दो दिनों का विवरण

कार्यशाला के प्रथम दिन प्रशिक्षक प्रवेश वर्मा ने पारंपरिक व्याख्यान शैली से हटकर इंटरैक्टिव विधाओं को अपनाया। प्रतिभागियों ने अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक अनुभवों को बेबाकी से साझा किया।

  • घरेलू श्रम का सम्मान: “घर की मुर्गी दाल बराबर” लघु फिल्म के माध्यम से बालिकाओं ने समझा कि किस प्रकार समाज में महिलाओं के अवैतनिक घरेलू श्रम और देखभाल के कार्य को नजरअंदाज किया जाता है।
  • संवेदनशीलता का पाठ: पंचतंत्र की प्रसिद्ध 'सारस और लोमड़ी' की कहानी के जरिए प्रतिभागियों को यह समझाया गया कि किसी को समान अवसर देने के साथ-साथ उसकी परिस्थितियों के अनुरूप सुगमता (Equity) प्रदान करना कितना जरूरी है।
  • विधिक सुरक्षा: कार्यस्थल एवं सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं की गरिमा सुनिश्चित करने वाले POSH अधिनियम के मूल प्रावधानों से अवगत कराया गया।

प्रशिक्षण के दूसरे दिन भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों और उद्देशिका पर विस्तार से चर्चा हुई। किशोरियों को बाल विवाह, बाल श्रम और लैंगिक हिंसा के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराने की विधियों की जानकारी दी गई। साथ ही, राज्य महिला आयोग और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (SCPCR) की कार्यप्रणाली को समझाया गया ताकि संकट के समय वे सही संस्थागत मदद प्राप्त कर सकें।

'भेदभाव की पहचान कर समुदाय में बदलाव लाएं बालिकाएं': अमित मिश्रा

इनिशिएटिव फाउंडेशन इंडिया के निदेशक अमित मिश्रा ने संस्था के उद्देश्यों को साझा करते हुए कहा कि जब तक लड़कियां स्वयं अपने अधिकारों और कानून के प्रति जागरूक नहीं होंगी, तब तक लैंगिक न्याय की कल्पना अधूरी रहेगी।

“हमारा लक्ष्य किशोरियों को केवल सूचना देना नहीं, बल्कि उन्हें 'चेंज-मेकर' के रूप में तैयार करना है। जब एक बालिका अधिकारों को समझकर भेदभाव के खिलाफ अपनी आवाज उठाती है, तो वह न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समुदाय के सोच के ढांचे को बदलने की क्षमता रखती है।”
— अमित मिश्रा (निदेशक, इनिशिएटिव फाउंडेशन इंडिया)

प्रमाणपत्र वितरण एवं सामाजिक संकल्प

कार्यशाला के समापन अवसर पर संस्था की बोर्ड सदस्य एवं वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता शालिनी शुक्ला ने सभी 45 प्रतिभागी बालिकाओं को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने पर प्रमाणपत्र प्रदान किए। उन्होंने बालिकाओं का आह्वान किया कि वे अपने मोहल्लों और शिक्षण संस्थानों में जाकर अन्य बालिकाओं को भी इन अधिकारों से जोड़ें।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में संस्था की टीम के सदस्यों हेमा, रानी, अंचल, पुष्पा, श्रद्धा, वर्तिका, छाया और शांति सहित अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

निष्कर्ष: बुद्धेश्वर केंद्र में आयोजित यह दो दिवसीय प्रशिक्षण बालिकाओं के आत्मबल को मजबूत करने और उन्हें संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए तैयार करने की दिशा में एक सार्थक और प्रभावी कदम सिद्ध हुआ।

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