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'पढ़ाई छुड़ाकर शादी नहीं, बेटियों को पूरे करने दें सपने': अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर काकोरी में बाल विवाह रोकथाम रैली

'पढ़ाई छुड़ाकर शादी नहीं, बेटियों को अपने सपने पूरे करने दें': अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर काकोरी में बाल विवाह रोकथाम और अधिकारों के प्रति उठी मुखर आवाज

📍 स्थान: दसदोई, काकोरी ब्लॉक, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) | 📅 दिनांक: 11 अक्टूबर 2026 | 👧 श्रेणी: अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस, सामाजिक जागरूकता, बाल अधिकार, मिशन शक्ति

लखनऊ: अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर रविवार को इनिशिएटिव फाउंडेशन इंडिया के तत्वावधान में काकोरी ब्लॉक के ग्राम पंचायत दसदोई स्थित पंचायत भवन में एक दिवसीय विशेष जागरूकता कार्यक्रम एवं रैली का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बाल विवाह की कुप्रथा को समाप्त करने, बालिकाओं को उच्च शिक्षा दिलाने, घरेलू व सामाजिक निर्णयों में समानता देने और सुरक्षा अधिकारों पर विस्तृत विमर्श हुआ। परिचर्चा के उपरांत 80 से अधिक बालिकाओं और महिलाओं ने हाथों में तख्तियां लेकर जागरूकता रैली निकाली और समाज से बेटियों के सपनों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

📌 जागरूकता कार्यक्रम के प्रमुख बिंदु:

  • केंद्रीय नारा: “बाल विवाह समाप्त करें, बालिकाओं के अधिकारों में निवेश करें।”
  • शिक्षा बनाम विवाह: कम उम्र और पारिवारिक दबाव में शादी करने के बजाय बालिकाओं की पढ़ाई पूरी कराने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर बल।
  • मिशन शक्ति व पुलिस सहयोग: काकोरी थाने के वरिष्ठ उपनिरीक्षक अमित चौधरी ने बालिकाओं को सुरक्षा हेल्पलाइन और विधिक अधिकारों की जानकारी दी।
  • सामुदायिक रैली: दसदोई गांव में निकाली गई जन-जागरूकता रैली में 80 से अधिक युवतियों और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
  • निर्णय लेने की स्वतंत्रता: बेटियों को अपनी पसंद, उच्च शिक्षा और भविष्य के फैसलों में समान भागीदारी देने की मांग।

📊 कार्यक्रम रूपरेखा एवं विवरण: एक नजर में

घटक / पहलू आधिकारिक विवरण
आयोजन का अवसर अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस (11 अक्टूबर 2026)
आयोजक संस्था इनिशिएटिव फाउंडेशन इंडिया (Initiative Foundation India)
स्थल पंचायत भवन, ग्राम दसदोई, काकोरी ब्लॉक, लखनऊ
सहभागी तंत्र थाना काकोरी एवं 'मिशन शक्ति' टीम
भागीदारी 80 से अधिक ग्रामीण बालिकाएं व महिलाएं

डरने के बजाय खुलकर मांगें मदद: मिशन शक्ति प्रतिनिधि

काकोरी थाने और मिशन शक्ति के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित वरिष्ठ उपनिरीक्षक (SSI) अमित चौधरी ने बालिकाओं को उनके कानूनी अधिकारों और सुरक्षा उपायों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि आज के परिवेश में कानून बेटियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

“लड़कियों को अपनी सुरक्षा, पोक्सो एक्ट (POCSO) और बाल विवाह निषेध अधिनियम की जानकारी होनी चाहिए। किसी भी प्रकार के उत्पीड़न, छेड़छाड़ या जबरन शादी के दबाव की स्थिति में चुप रहने या डरने के बजाय पुलिस हेल्पलाइन नंबरों (112, 1090) पर तुरंत सहायता मांगनी चाहिए।”
— अमित चौधरी (वरिष्ठ उपनिरीक्षक, थाना काकोरी)

बाल विवाह से टूटते हैं सपने: सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रखी बात

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानी और शशि ने ग्रामीण अंचलों में बालिकाओं के सामने आने वाली वास्तविक चुनौतियों को साझा किया। उन्होंने रेखांकित किया कि कम उम्र में विवाह कर देने से न केवल किशोरी का स्वास्थ्य खतरे में पड़ता है, बल्कि उसकी औपचारिक पढ़ाई भी हमेशा के लिए छूट जाती है।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बेटियों को 'बोझ' समझने की संकीर्ण मानसिकता को त्यागकर उन्हें डॉक्टर, शिक्षक, अधिकारी और उद्यमी बनने का पूरा अवसर दें। जब एक बेटी शिक्षित होती है तो वह पूरे परिवार और समाज को सशक्त बनाती है।

संस्थागत सहयोग और नेतृत्व क्षमता का विकास

इनिशिएटिव फाउंडेशन इंडिया के निदेशक अमित ने कहा कि बाल विवाह उन्मूलन केवल सरकारी आदेशों से संभव नहीं है, इसके लिए पंचायत, समाज, शिक्षक और स्वयंसेवी संस्थाओं का साझा प्रयास आवश्यक है।

बालिका एवं सामुदायिक नेतृत्व से जुड़ी रानी और शालिनी ने कहा कि घर-परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में लड़कियों की इच्छा और राय का भी सम्मान होना चाहिए।

  • सक्रिय टीम लीडर्स: रैली का नेतृत्व सृष्टि, मुस्कान, वर्तिका, आकांक्षा और अंशी ने किया।
  • सहभागी प्रतिभागी: नेहा, मुस्कान, सोनी, सालू, सानिया, शगुन, शिवानी, अनिता, माधुरी, वंदना, पूनम, कमलेशा, रेखा, कमलेश, चांदनी, सुनिता सहित 80 ग्रामीण युवतियों ने गांव की गलियों में नारे लगाकर लोगों को बाल विवाह के दुष्प्रभावों से सचेत किया।
निष्कर्ष: अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर काकोरी का यह आयोजन स्पष्ट संदेश देता है कि बालिकाओं की जबरन शादी रोकने और उनकी शिक्षा में निरंतर निवेश करने से ही एक सशक्त, स्वावलंबी और प्रगतिशील समाज का निर्माण संभव है।

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