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दृष्टि दिव्यांगजनों के डिजिटल सशक्तिकरण के लिए 'सॉल्यूशन वीक': स्क्रीन रीडर और आधुनिक तकनीक से उच्च शिक्षा व आत्मनिर्भरता की पहल

जयति भारतम् एवं इनेबल इंडिया द्वारा 'सॉल्यूशन वीक' का सफल आयोजन: 'सी अ मिलियन' अभियान के तहत दृष्टि दिव्यांगजनों के डिजिटल सशक्तिकरण पर जोर

📍 स्थान: जानकीपुरम, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) | 📅 दिनांक: 10 अक्टूबर 2026 | ♿ श्रेणी: दिव्यांगजन सशक्तिकरण, सामाजिक सरोकार, डिजिटल साक्षरता, लखनऊ समाचार

लखनऊ: राजधानी के जानकीपुरम स्थित बालाजी लॉन परिसर में जयति भारतम् एवं इनेबल इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विशेष ‘सॉल्यूशन वीक’ का शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को समापन हुआ। यह वृहद कार्यक्रम देशव्यापी ‘सी अ मिलियन’ (See a Million - 10 लाख को देखें) अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य समाज में दृष्टि दिव्यांगजनों के लिए सुगम्यता (Accessibility), तकनीकी साक्षरता और सामाजिक समावेशन की नई राह प्रशस्त करना है।

📌 'सॉल्यूशन वीक' एवं 'सी अ मिलियन' अभियान के प्रमुख बिंदु:

  • 10 लाख लोगों तक पहुंच का लक्ष्य: देश भर के 10 लाख (1 मिलियन) दृष्टिबाधित व लो-विज़न व्यक्तियों को डिजिटल रूप से साक्षर और आत्मनिर्भर बनाना।
  • आधुनिक सहायक उपकरण: स्क्रीन रीडर (पर्दा वाचक), मैग्नीफायर और सहायक डिजिटल तकनीकों की प्रदर्शनी व लाइव डेमो।
  • बिना लेखक के परीक्षा: दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को लैपटॉप पर स्वयं परीक्षा देने और उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम बनाना।
  • वित्तीय व दैनिक आत्मनिर्भरता: ऑनलाइन बैंकिंग, ई-मेल और डिजिटल संचार सेवाओं का स्वतंत्र उपयोग सिखाना।
  • व्यापक सहभागिता: दृष्टि दिव्यांग विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और सामाजिक प्रतिनिधियों सहित 600 से अधिक लोगों की उपस्थिति।

📊 'सॉल्यूशन वीक' कार्यक्रम: एक नजर में

घटक / पहलू विवरण व जानकारी
आयोजक संस्थाएं जयति भारतम् एवं इनेबल इंडिया (Enable India)
स्थान बालाजी लॉन, जानकीपुरम, लखनऊ
केंद्रीय अभियान 'सी अ मिलियन' (See A Million)
विशिष्ट अतिथि डॉ. विवेक सिंह तोमर (सभापति, उ.प्र. सहकारी ग्राम विकास बैंक लि.)
प्रमुख संस्थागत नेतृत्व सुश्री रंजना अग्निहोत्री (सचिव), डॉ. रेनू अग्निहोत्री (चीफ फंक्शनरी)

आधुनिक डिजिटल टूल्स की प्रदर्शनी: स्टॉलों का हुआ निरीक्षण

कार्यक्रम के दौरान लगाए गए विशेष स्टॉलों का निरीक्षण विशिष्ट अतिथि डॉ. विवेक सिंह तोमर और संस्था की सचिव रंजना अग्निहोत्री ने किया। अतिथियों ने दृष्टि दिव्यांगों के दैनिक जीवन और शैक्षणिक कार्यों को आसान बनाने वाले अत्याधुनिक डिजिटल उपकरणों (Assistive Devices) की कार्यप्रणाली को बारीकी से समझा और उनकी उपयोगिता की सराहना की।

“'सी अ मिलियन' केवल एक अभियान नहीं, बल्कि दृष्टिबाधित और कम दृष्टि वाले व्यक्तियों के लिए डिजिटल क्रांति की शुरुआत है। हमारा लक्ष्य देश भर के 10 लाख दृष्टिबाधित नागरिकों को डिजिटल टूल्स के माध्यम से सशक्त कर मुख्यधारा के सक्रिय नागरिक के रूप में स्थापित करना है।”
— रंजना अग्निहोत्री (सचिव, जयति भारतम्)

डिजिटल साक्षरता से रोजगार तक: अभियान के चार प्रमुख स्तंभ

जयति भारतम् की चीफ फंक्शनरी डॉ. रेनू अग्निहोत्री ने ‘सी अ मिलियन’ अभियान के तहत संचालित होने वाले चार प्रमुख कार्यक्षेत्रों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की:

  • 1. व्यावहारिक डिजिटल साक्षरता: स्क्रीन रीडर (Screen Reader) और मैग्नीफायर टूल्स के माध्यम से कंप्यूटर और लैपटॉप को सुगमता से संचालित करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण।
  • 2. स्वावलंबी शिक्षा एवं परीक्षा प्रणाली: आधुनिक डिजिटल टूल्स की सहायता से बिना किसी राइटर (Scribe) पर निर्भर हुए दृष्टिबाधित छात्रों द्वारा स्वयं लैपटॉप पर परीक्षा देने की क्षमता विकसित करना।
  • 3. वित्तीय एवं दैनिक आत्मनिर्भरता: ई-मेल, डिजिटल मैसेजिंग और सुरक्षित ऑनलाइन नेट-बैंकिंग जैसी आवश्यक सेवाओं का स्वतंत्र रूप से संचालन।
  • 4. दृष्टिबाधित प्रशिक्षकों का निर्माण: दृष्टिबाधित व्यक्तियों को ही मास्टर ट्रेनर बनाकर तकनीकी प्रशिक्षण देना, जिससे उनके लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हों और वे आगे चलकर स्वयं इस अभियान का नेतृत्व कर सकें।

समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता

यह कार्यक्रम जयति भारतम् की चीफ फंक्शनरी डॉ. रेनू अग्निहोत्री एवं कोऑर्डिनेटर अभिलाषा अग्निहोत्री के कुशल मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक आयोजित हुआ। कार्यक्रम में सामान्य स्कूलों के विद्यार्थियों ने भी भाग लेकर समावेशी समाज के निर्माण में सहयोग का संकल्प लिया।

प्रमुख गणमान्य उपस्थिति: जन उद्घोष व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र प्रताप सिंह, प्रदेश महामंत्री विनोद सिंह, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुशील कुमार सिंह, प्रदेश महामंत्री आर के सिंह चौहान, महानगर लखनऊ अध्यक्ष विपिन सिंह, जानकीपुरम महामंत्री रोहित कुमार सहित 600 से अधिक छात्र, अभिभावक और शिक्षक उपस्थित रहे।

निष्कर्ष: 'सॉल्यूशन वीक' जैसे अभिनव प्रयास तकनीकी पहुंच के जरिए दृष्टि दिव्यांगजनों को परावलंबन से मुक्ति दिलाकर आत्मनिर्भर, शिक्षित और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायी मिसाल हैं।

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