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दीपावली पर चालू होगा लखनऊ का सबसे ऊंचा फ्लाईओवर: डालीगंज से पक्का पुल का सफर सिर्फ 2 मिनट में; ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट को मिली रफ्तार

ग्रीन कॉरिडोर: दीपावली पर चालू होगा लखनऊ का सबसे ऊंचा फ्लाईओवर; डालीगंज से पक्का पुल का सफर महज 2 मिनट में होगा पूरा, 10 लाख लोगों को बड़ी राहत

📍 स्थान: लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 📅 दिनांक: 06 अक्टूबर 2026 | 🌉 श्रेणी: ग्रीन कॉरिडोर परियोजना, लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर एवं शहरी विकास

लखनऊ: राजधानी के बहुप्रतीक्षित ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट के तहत बन रहा लखनऊ का सबसे ऊंचा फ्लाईओवर इसी दीपावली से पहले आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इस फ्लाईओवर के शुरू होते ही डालीगंज से पक्का पुल (हर्डिंग ब्रिज) के बीच लगने वाले लंबे जाम से मुक्ति मिल जाएगी और यह दूरी महज 02 मिनट में तय हो सकेगी। मंगलवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने निर्माण स्थल का स्थलीय निरीक्षण किया और यातायात को सुगम बनाने के लिए टीले वाली मस्जिद के पास इंटीग्रेटेड रोटरी विकसित करने के निर्देश दिए।

📌 लखनऊ के सबसे ऊंचे फ्लाईओवर के मुख्य बिंदु:

  • फ्लाईओवर की लंबाई व ऊंचाई: 1.1 किलोमीटर लंबा यह 2-लेन फ्लाईओवर जमीन से लगभग 25 मीटर की रिकॉर्ड ऊंचाई पर रेलवे ट्रैक के ऊपर बना है।
  • सफर में समय की भारी बचत: डालीगंज से पक्का पुल तक का सफर घटकर मात्र 2 मिनट रह जाएगा।
  • 10 लाख नागरिकों को लाभ: पुराने लखनऊ और चौक, डालीगंज, सीतापुर रोड क्षेत्र की करीब 10 लाख आबादी का समतामूलक चौराहे तक सीधा व सिग्नल-फ्री आवागमन होगा।
  • इंटीग्रेटेड रोटरी सिस्टम: टीले वाली मस्जिद के पास नई रोटरी और मरी माता मंदिर के पास 4-लेन री-मॉडलिंग से ट्रैफिक का डायवर्जन स्मूथ होगा।
  • पक्का पुल बनेगा पेडेस्ट्रियन ब्रिज: गोमती पर सेतु निगम का नया पुल बनते ही ऐतिहासिक पक्का पुल वाहनों के लिए बंद कर पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित किया जाएगा।

📊 ग्रीन कॉरिडोर फ्लाईओवर प्रोजेक्ट: एक नजर में

परियोजना घटक विवरण व तकनीकी आंकड़े
फ्लाईओवर का मार्ग पक्का पुल (हर्डिंग ब्रिज) से डालीगंज रोटरी के मध्य
कुल लंबाई व लेन 1.1 किलोमीटर (2-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर)
जमीन से ऊंचाई लगभग 25 मीटर (लखनऊ का सबसे ऊंचा फ्लाईओवर)
चालू होने की समय-सीमा अक्टूबर 2026 अंत (दीपावली से पूर्व)
तकनीकी सर्वे व डिजाइन IIT BHU और VNIT नागपुर की संयुक्त टीम द्वारा तैयार

स्ट्रक्चर तैयार, अब अंतिम चरण में डामरीकरण और स्ट्रीट लाइट्स का काम

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि रेलवे ब्रिज के ऊपर से गुजरने वाले इस चुनौतीपूर्ण एलिवेटेड फ्लाईओवर के मुख्य स्ट्रक्चर का निर्माण कार्य शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। वर्तमान में मौके पर बिटुमिनस डामरीकरण (सड़क की सतह तैयार करना), रेलिंग पेंटिंग और आधुनिक एलईडी स्ट्रीट लाइट्स लगाने का कार्य युद्धस्तर पर कराया जा रहा है।

"फ्लाईओवर के समस्त अवशेष कार्य अक्टूबर माह के अंत तक पूरे कर लिए जाएंगे ताकि दीपावली से पूर्व शहरवासियों को यह बड़ा तोहफा दिया जा सके। इसके शुरू होने से पक्का पुल से लेकर समतामूलक चौराहे तक का सीधा आवागमन सुगम होगा और पुराने शहर की 10 लाख की आबादी को जाम से स्थायी निजात मिलेगी।"
— प्रथमेश कुमार (उपाध्यक्ष, लखनऊ विकास प्राधिकरण)

IIT BHU और VNIT नागपुर की डिजाइन से तैयार होगी 'इंटीग्रेटेड रोटरी'

फ्लाईओवर पर चढ़ने और उतरने वाले वाहनों का दबाव अचानक जमीन पर जाम का कारण न बने, इसके लिए वैज्ञानिक ट्रैफिक इंजीनियरिंग अपनाई जा रही है। देश के दो शीर्ष तकनीकी संस्थानों—आईआईटी बीएचयू (IIT BHU) और वीएनआईटी नागपुर (VNIT Nagpur) की संयुक्त विशेषज्ञ टीम ने पूरे क्षेत्र का ट्रैफिक सिमुलेशन सर्वे कर इंटीग्रेटेड रोटरी की ड्राइंग तैयार की है:

  • टीले वाली मस्जिद के पास नई रोटरी: फ्लाईओवर से उतरने वाले और पक्का पुल की तरफ जाने वाले वाहनों को व्यवस्थित गति देने के लिए नई चौड़ी रोटरी बनेगी।
  • मरी माता मंदिर रोटरी का री-मॉडलिंग: पूर्व से निर्मित रोटरी को री-डिजाइन करके वाहनों के लिए 4-लेन पैसेज बनाया जाएगा, जिससे मोड़ पर लगने वाले जाम की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

ऐतिहासिक पक्का पुल बनेगा 'पेडेस्ट्रियन ब्रिज', बगल में तैयार हो रहा नया पुल

नवाब आसिफुद्दौला के दौर की ऐतिहासिक पहचान रखने वाले पक्का पुल (हर्डिंग ब्रिज) के संरक्षण के लिए भी ठोस कार्ययोजना बनाई गई है। राज्य सेतु निगम द्वारा पक्का पुल के समानांतर गोमती नदी पर एक नया अत्याधुनिक सेतु बनाया जा रहा है।

नया पुल चालू होते ही ब्रिटिश काल के इस पुराने पक्का पुल पर चार पहिया व दो पहिया वाहनों का प्रवेश हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। इसके बाद इस ऐतिहासिक पुल को केवल पैदल चलने वाले पर्यटकों और नागरिकों के लिए ‘पेडेस्ट्रियन ब्रिज’ (Pedestrian Bridge) के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां लोग गोमती नदी के किनारे टहलने का आनंद ले सकेंगे।

निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे वरिष्ठ अधिकारी

मंगलवार को आयोजित इस उच्चस्तरीय निरीक्षण में एलडीए के प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (PIU) के प्रभारी ए.के. सिंह सेंगर, जोनल अधिकारी प्रभाकर सिंह, अधिशासी अभियंता अजीत कुमार एवं मनोज सागर सहित कार्यदायी संस्था के प्रोजेक्ट इंजीनियर्स मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

निष्कर्ष: गोमती नदी के किनारे विकसित हो रहा ग्रीन कॉरिडोर न केवल लखनऊ के ट्रांसपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई दे रहा है, बल्कि पुराने और नए लखनऊ के बीच की दूरी और सफर के समय को ऐतिहासिक रूप से घटाने में मील का पत्थर साबित होगा।
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