लखनऊ विश्वविद्यालय: छात्रावासों में घटिया व गुणवत्ताहीन भोजन को लेकर छात्रों का प्रदर्शन; कुलपति को ज्ञापन सौंपकर मेस जांच व सख्त कार्रवाई की मांग
लखनऊ: लखनऊ विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्रावासों में अंतःवासियों को लगातार मिल रहे खराब, अस्वच्छ और गुणवत्ताहीन भोजन को लेकर छात्रों का आक्रोश सामने आया है। मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को समाजवादी छात्रसभा से जुड़े छात्र प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के कुलपति को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर हॉस्टल मेस की तत्काल निष्पक्ष जांच कराने और लापरवाह मेस संचालकों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। छात्रों ने दो-टूक कहा कि मेस डाइट का पूरा शुल्क चुकाने के बावजूद छात्रों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
📌 ज्ञापन एवं छात्रों की प्रमुख मांगें:
- गुणवत्ता और स्वच्छता की जांच: सभी छात्रावासों के मेस का विश्वविद्यालय स्तरीय जांच दल द्वारा तत्काल औचक निरीक्षण कराया जाए।
- स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं: अस्वच्छ व बासी भोजन से छात्रों के बीमार पड़ने की आशंका; मानक अनुरूप पौष्टिक भोजन अनिवार्य हो।
- सख्त दंडात्मक कार्रवाई: निरीक्षण में गड़बड़ी मिलने पर मेस ठेकेदारों व जिम्मेदार वार्डन/अधिकारियों के विरुद्ध पारदर्शी दंडात्मक कदम उठाए जाएं।
- स्थायी शिकायत निगरानी तंत्र: भोजन संबंधी शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए नियमित मॉनिटरिंग कमेटी गठित करने की मांग।
- छात्र प्रतिनिधिमंडल: छात्रनेता रोहित यादव, आदित्य पाण्डेय और प्रदेश सचिव अक्षय वर्मा की अगुवाई में सौंपा गया ज्ञापन।
📊 विश्वविद्यालय छात्रावास मेस प्रकरण: एक नजर में
| प्रमुख पहलू | विवरण व जानकारी |
|---|---|
| संस्थान | लखनऊ विश्वविद्यालय (LU), पुराना व नवीन परिसर |
| मामला | विभिन्न हॉस्टल्स में निम्न स्तरीय, अस्वच्छ व गुणवत्ताहीन भोजन |
| ज्ञापन प्राप्तकर्ता | कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय |
| प्रतिनिधित्व | समाजवादी छात्रसभा एवं छात्रावास अंतःवासी छात्र |
| मूल मांग | मेस का तत्काल निरीक्षण, फूड सैंपलिंग, मानक गुणवत्ता व दोषी संचालकों पर कार्रवाई |
"शुल्क लेकर खराब खाना परोसना अस्वीकार्य": छात्रनेता आदित्य पाण्डेय
ज्ञापन सौंपने के दौरान छात्रनेता आदित्य पाण्डेय ने छात्रावासों की बदहाल स्थिति पर कड़ा रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश के विभिन्न जनपदों से छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय आते हैं और छात्रावासों में रहते हैं।
"छात्रावासों में रहने वाले छात्र-छात्राओं से मेस का पूरा शुल्क विधिवत अग्रिम लिया जाता है। इसके बावजूद उन्हें घटिया सामग्री से बना, पोषणविहीन और अस्वास्थ्यकर भोजन परोसा जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए तत्काल सभी हॉस्टल मेस की रैंडम सैंपलिंग करानी चाहिए। यदि मेस संचालकों की मनमानी और लापरवाही साबित होती है, तो उनके टेंडर निरस्त कर कानूनी कार्रवाई की जाए। छात्रों की सेहत के साथ समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगा।"
— आदित्य पाण्डेय (छात्रनेता, लखनऊ विश्वविद्यालय)
नियमित निरीक्षण और स्थायी शिकायत प्रणाली की मांग
छात्रों ने कुलपति को सौंपे मांग-पत्र में रेखांकित किया कि मेस में गुणवत्ता का अभाव केवल एक दिन की बात नहीं है, बल्कि नियमित जांच न होने के कारण व्यवस्था लगातार चरमरा रही है। छात्रों ने प्रशासन से निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह किया:
- फूड सेफ्टी इंस्पेक्शन: खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत दाल, तेल, आटा, सब्जियों व मसालों की गुणवत्ता की प्रयोगशाला जांच कराई जाए।
- मेस स्वच्छता प्रमाणन: रसोई घर (किचन) और बर्तन धोने के स्थानों पर स्वच्छता और स्वच्छ पेयजल (RO Water) की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित हो।
- छात्र मेस कमेटी: प्रत्येक हॉस्टल में छात्रों की भागीदारी वाली एक सशक्त समिति बने, जिसकी संस्तुति के बिना बिलों का भुगतान न हो।
- केंद्रीकृत शिकायत पोर्टल: खराब भोजन की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए एक पारदर्शी और प्रभावी शिकायत प्रणाली लागू की जाए।
प्रतिनिधिमंडल में ये छात्र नेता रहे उपस्थित
कुलपति कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में शोध छात्र और विभिन्न छात्रावासों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:
प्रतिनिधिमंडल सदस्य: छात्रनेता रोहित यादव, छात्रनेता आदित्य पाण्डेय, प्रदेश सचिव अक्षय वर्मा, रवि नन्दन यादव, अक्षय पाण्डेय, अंकित पाण्डेय, वैभव यादव एवं आर्यन कुशवाहा सहित कई अन्य छात्र उपस्थित रहे।

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