नवरात्रि का तीसरा दिन आज: मां चंद्रघंटा की पूजा, जानिए दिव्य स्वरूप, संपूर्ण पूजा विधि, प्रिय भोग, मंत्र और जीवन में साहस का महत्व
लखनऊ: शक्ति की उपासना के महापर्व नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। मां चंद्रघंटा साहस, शौर्य, आत्मबल, शांति और पराक्रम की अधिष्ठात्री देवी हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है, जिसकी ध्वनि से दुष्ट और आसुरी शक्तियां भयभीत रहती हैं। मां चंद्रघंटा की आराधना से साधक के अंतःकरण से भय, संशय और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है तथा जीवन की कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना करने की अदम्य शक्ति मिलती है।
📌 मां चंद्रघंटा साधना के प्रमुख तत्व:
- दिव्य स्वरूप: सिंह पर सवार, दस भुजाएं, मस्तक पर घंटे के आकार का दैदीप्यमान अर्धचंद्र।
- शुभ रंग: पीले और सुनहरे (Golden/Yellow) रंग के वस्त्र धारण कर पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- प्रिय नैवेद्य (भोग): दूध और दूध से बनी मिठाइयां (खीर, पेड़ा या रसमलाई) अर्पित करने की परंपरा।
- साधना चक्र: योग साधना में मां चंद्रघंटा का ध्यान मणिपुर चक्र (Manipur Chakra - नाभि केंद्र) पर केंद्रित किया जाता है।
- आध्यात्मिक फल: भयमुक्ति, आत्मविश्वास में वृद्धि, मानसिक शांति और शत्रुओं पर विजय का आशीर्वाद।
📊 माता चंद्रघंटा: शास्त्रीय एवं आध्यात्मिक विवरण
| आयाम / पहलू | शास्त्रीय व धार्मिक मान्यता |
|---|---|
| नवदुर्गा क्रम | तृतीय स्वरूप (तीसरा दिन) |
| वाहन एवं मुद्रा | सिंह (शेर) की सवारी, युद्ध के लिए तत्पर मुद्रा में भी सौम्य और शांत भाव |
| हस्त आयुध व प्रतीक | दस भुजाओं में त्रिशूल, गदा, तलवार, धनुष-बाण, खड्ग, जपमाला, कमंडल आदि |
| प्रिय भोग | दूध, खीर तथा दुग्ध निर्मित सात्विक मिष्ठान्न |
| योग साधना चक्र | मणिपुर चक्र (नाभि चक्र — पराक्रम और तेज का केंद्र) |
दिव्य स्वरूप: शक्ति, शांति और धर्म-रक्षा का अनुपम संतुलन
मां चंद्रघंटा का शरीर स्वर्ण के समान चमकीला और देदीप्यमान है। उनकी दस भुजाएं हैं और वे विभिन्न अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित हैं। देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र इस बात का द्योतक है कि वे निरंतर भक्तों की रक्षा के लिए जागृत हैं।
“देवी चंद्रघंटा का स्वरूप यह सिखाता है कि साधक को शांत, सौम्य और दयालु होना चाहिए, किंतु जब धर्म और सत्य की रक्षा का प्रश्न आए, तो सिंह के समान निर्भीक होकर अधर्म का सामना करने के लिए भी सदैव तत्पर रहना चाहिए।”
मां की मुद्रा युद्ध के लिए सन्नद्ध दिखाई देती है, किंतु उनके नेत्रों में मातृत्व की असीम करुणा छलकती है। वे अपने सच्चे भक्तों को अभय मुद्रा से सुरक्षा और आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
पूजा विधि: तीसरे दिन कैसे करें मां की आराधना?
नवरात्रि के तीसरे दिन प्रातःकाल से ही विधि-विधान से पूजा की जाती है:
- शुद्धि एवं वस्त्र: प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ, संभव हो तो पीले या सुनहरे रंग के वस्त्र धारण करें।
- आवाहन व कलश पूजन: पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित कर सर्वप्रथम प्रथम पूज्य गणपति और कलश का स्मरण करें, फिर मां चंद्रघंटा का ध्यान करें।
- उपचार अर्पण: देवी को गंगाजल से प्रतीकात्मक स्नान कराएं, लाल या पीले पुष्प, रोली, अक्षत, धूप और सुगंधित चंदन अर्पित करें।
- भोग समर्पण: मां चंद्रघंटा को गाय के दूध की खीर या दूध से बनी मिठाई का नैवेद्य अर्पित करें। इससे परिवार में शांति और आरोग्यता आती है।
- पाठ एवं आरती: दुर्गा सप्तशती के तीसरे अध्याय का पाठ करें, मंत्रों का 108 बार जप करें और अंत में कपूर से आरती उतारें।
मां चंद्रघंटा के सिद्ध मंत्र
🔹 ध्यान एवं स्तुति मंत्र:
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
🔹 सरल दैनिक बीज मंत्र:
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
मणिपुर चक्र जागरण और जीवन संदेश
योग मार्ग में तीसरे दिन साधक का चित्त नाभि स्थित मणिपुर चक्र में प्रवेश करता है। मां चंद्रघंटा की कृपा से इस चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति के भीतर आंतरिक आलस्य और भय समाप्त होता है तथा नेतृत्व क्षमता और आत्मसम्मान में अप्रत्याशित वृद्धि होती है।
मां चंद्रघंटा की साधना यह संदेश देती है कि समाज में शांति और सदाचार की स्थापना के लिए आंतरिक साहस का होना अनिवार्य है। अन्याय के समक्ष मौन रहने के बजाय धर्म के पथ पर अडिग रहना ही सच्ची भक्ति है।


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