हिंदी विश्वविद्यालय और बैंक ऑफ इंडिया मिलकर आयोजित करेंगे अंतरराष्ट्रीय राजभाषा संगोष्ठी: 10-11 जनवरी 2027 को होगा आयोजन; नराकास वर्धा की बैठक में निर्णय
वर्धा: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (MGAHV), वर्धा और देश के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) के संयुक्त तत्वावधान में आगामी 10 एवं 11 जनवरी 2027 को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण निर्णय मंगलवार को विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय स्थित संवाद कक्ष में आयोजित नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास - TOLIC), वर्धा की छमाही समीक्षा बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने की, जबकि बैंक ऑफ इंडिया की सहायक महाप्रबंधक (राजभाषा) मऊ मैत्रा विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
📌 नराकास बैठक एवं संगोष्ठी के मुख्य बिंदु:
- अंतरराष्ट्रीय आयोजन: 10 और 11 जनवरी 2027 को विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय राजभाषा सम्मेलन का आयोजन।
- अकादमिक व बैंकिंग समन्वय: उच्च शिक्षा संस्थान MGAHV और वित्तीय संस्था बैंक ऑफ इंडिया मिलकर प्रशासनिक व बैंकिंग क्षेत्रों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देंगे।
- ज्ञान और तकनीक की भाषा: कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने हिंदी को केवल संवाद ही नहीं, बल्कि वैश्विक विमर्श, विज्ञान और तकनीक की सशक्त भाषा बनाने का आह्वान किया।
- श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान: बीओआई की एजीएम मऊ मैत्रा ने कहा कि यह संगोष्ठी अधिकारियों व कर्मचारियों में राजभाषा के प्रति नई कार्य-संस्कृति विकसित करेगी।
- क्षेत्रीय कार्यालयों की भागीदारी: वर्धा, पुलगांव और देवली स्थित केंद्र सरकार के विभिन्न उपक्रमों और दफ्तरों के प्रमुख बैठक में सम्मिलित हुए।
📊 अंतरराष्ट्रीय राजभाषा संगोष्ठी: एक नजर में
| घटक / पहलू | आधिकारिक विवरण |
|---|---|
| आयोजनकर्ता संस्थाएं | महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय एवं बैंक ऑफ इंडिया |
| आयोजन की तिथियां | 10 एवं 11 जनवरी 2027 (दो दिवसीय) |
| मंच एवं संदर्भ | नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), वर्धा की छमाही बैठक |
| बैठक की अध्यक्षता | प्रो. कुमुद शर्मा (कुलपति, MGAHV वर्धा) |
| विशेष अतिथि | मऊ मैत्रा (सहायक महाप्रबंधक, राजभाषा, बैंक ऑफ इंडिया) |
| सदस्य सचिव (संचालन) | राजेश कुमार यादव (सदस्य सचिव, नराकास वर्धा) |
'ज्ञान, तकनीक और वैश्विक विमर्श की भाषा बने हिंदी': प्रो. कुमुद शर्मा
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने राजभाषा हिंदी के सामर्थ्य और उसकी व्यापकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल पारस्परिक बातचीत या सामान्य पत्राचार का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय एकता का आधार स्तंभ है।
“सरकारी कार्यालयों और वित्तीय संस्थानों में राजभाषा हिंदी का सहज, सरल और प्रभावी प्रयोग बढ़ाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके साथ ही हिंदी को वैश्विक पटल पर ज्ञान-विज्ञान, आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी और अकादमिक अनुसंधान की भाषा के रूप में स्थापित करना समय की मांग है। बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से जनवरी 2027 में होने वाली यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।”
— प्रो. कुमुद शर्मा (कुलपति, MGAHV वर्धा)
बैंकिंग और केंद्रीय कार्यालयों में राजभाषा का संस्थागत दायित्व
बैंक ऑफ इंडिया की सहायक महाप्रबंधक (राजभाषा) मऊ मैत्रा ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और केंद्रीय प्रतिष्ठानों में राजभाषा नीतियों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करना केवल वैधानिक नियम नहीं, बल्कि एक संस्थागत उत्तरदायित्व है।
- कार्य-संस्कृति में प्रोत्साहन: उच्च शिक्षण संस्थानों और बैंकिंग सेक्टर का यह साझा मंच कर्मचारियों में हिंदी के प्रयोग के प्रति झिझक को दूर करेगा।
- सर्वोत्तम पद्धतियों का आदान-प्रदान: सम्मेलन के माध्यम से विभिन्न विभागों में प्रयुक्त हो रहे हिंदी सॉफ्टवेयर, अनुवाद टूल्स और प्रशासनिक शब्दावली की श्रेष्ठ तकनीकों को साझा किया जाएगा।
केंद्रीय कार्यालयों के प्रमुखों की व्यापक भागीदारी
नराकास की इस महत्वपूर्ण छमाही बैठक में वर्धा, पुलगांव और देवली क्षेत्र में स्थित केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, आयुध डिपो, डाक विभाग, दूरसंचार, रेलवे और राष्ट्रीयकृत बैंकों के प्रशासनिक प्रमुखों तथा राजभाषा प्रभारियों ने भाग लिया।
बैठक का कुशल संचालन नराकास वर्धा के सदस्य सचिव राजेश कुमार यादव द्वारा किया गया। उन्होंने पिछले छह माह में सदस्य कार्यालयों द्वारा हिंदी के प्रगामी प्रयोग की समीक्षा प्रस्तुत की और आगामी अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की तैयारियों के लिए सभी संस्थाओं से सक्रिय सहयोग का आह्वान किया।


0 टिप्पणियाँ