हिंदी विश्वविद्यालय में दो दिवसीय मूट कोर्ट का सफल आयोजन: बीए-एलएलबी के विद्यार्थियों ने तार्किक दलीलों से दिखाया व्यावहारिक कानूनी ज्ञान
वर्धा: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के विधि विद्यापीठ (विधि विभाग) द्वारा 8 और 9 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। मूट कोर्ट हॉल में आयोजित इस अभ्यास अदालत में बीए-एलएलबी (BA-LLB) के विधि छात्रों ने वास्तविक अदालत जैसी परिस्थितियों में तीक्ष्ण तार्किक बहस, कानूनी धाराओं के सटीक संदर्भ और प्रभावी दलीलों के जरिए अपने व्यावहारिक कानूनी ज्ञान का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
📌 मूट कोर्ट प्रतियोगिता के प्रमुख बिंदु:
- 7 टीमों की सक्रिय सहभागिता: प्रथम चरण में कुल सात टीमों ने समसामयिक और जटिल कानूनी प्रकरणों पर पैरवी की।
- वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मार्गदर्शन: वर्धा के प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं ने जूरी के रूप में छात्रों की ड्राफ्टिंग और जिरह कौशल का सूक्ष्म मूल्यांकन किया।
- व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर: किताबी ज्ञान से परे जाकर वास्तविक अदालती कार्यप्रणाली, शिष्टाचार और वकालत के दांव-पेंच सिखाए गए।
- सफल समापन: 9 अक्टूबर को अंतिम चरण के मुकाबलों के साथ मूट कोर्ट हॉल में प्रतियोगिता संपन्न हुई।
📊 मूट कोर्ट प्रतियोगिता: एक नजर में
| पहलू / घटक | आधिकारिक विवरण |
|---|---|
| आयोजनकर्ता | विधि विभाग, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा |
| आयोजन तिथि व स्थल | 8-9 अक्टूबर 2026, मूट कोर्ट हॉल, विधि विभाग |
| सहभागी पाठ्यक्रम | बीए-एलएलबी (कुल 7 प्रतिस्पर्धी टीमें) |
| निर्णायक मंडल (Jury) | प्रो. जनार्दन कुमार तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र एम. गुरु, हरीश चांडक |
| मूट कोर्ट प्रभारी | डॉ. परमानंद राठौड़ |
तार्किक क्षमता और व्यावहारिक न्यायशास्त्र की पाठशाला: प्रो. जनार्दन कुमार तिवारी
समापन सत्र को संबोधित करते हुए विधि विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रोफेसर जनार्दन कुमार तिवारी ने कहा कि कानून के क्षेत्र में केवल सिद्धांतों को कंठस्थ करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि न्यायालय के समक्ष उन सिद्धांतों का सटीक अनुप्रयोग ही एक सफल अधिवक्ता की पहचान है।
“मूट कोर्ट विद्यार्थियों को अदालत के वास्तविक माहौल, तनाव प्रबंधन और तत्काल प्रत्युत्तर देने की कला से परिचित कराता है। तार्किक बहस और तथ्यों के सही प्रस्तुतीकरण से ही न्याय की अवधारणा मजबूत होती है। इस तरह के आयोजनों से भावी अधिवक्ताओं में निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है।”
— प्रो. जनार्दन कुमार तिवारी (अधिष्ठाता, विधि विद्यापीठ)
वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने परखे वकालत के हुनर
प्रतियोगिता के दौरान वर्धा के वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र एम. गुरु, अधिवक्ता रुचि चांडक और अधिवक्ता हरीश चांडक विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किए गए मेमोरियल, केस रिसर्च, वाक-कौशल और विपरीत परिस्थितियों में की गई दलीलों का सूक्ष्म परीक्षण किया।
- वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने विद्यार्थियों को केस लॉज (Precedents) को प्रभावी ढंग से उद्धृत करने के तरीके समझाए।
- कोर्ट रूम में आचरण (Court Etiquette) और न्यायाधीशों के सवालों का संयमित व सटीक उत्तर देने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
संकाय सदस्यों का सराहनीय योगदान
दो दिवसीय कार्यक्रम को सुचारु रूप से संपन्न कराने में मूट कोर्ट प्रभारी डॉ. परमानंद राठौड़, डॉ. वैभव सिंह यादव, डॉ. नितेश कुमार सिंह, डॉ. ज्योति सोनी, सुश्री सुचिता नारायण नागपुरे एवं श्रुति नाथ का विशेष योगदान रहा। विभाग के सभी प्राध्यापकों और शोधार्थियों की उपस्थिति में छात्रों ने विधि की बारीकियों को आत्मसात किया।


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