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नीता अंबानी की पहल: दृष्टिबाधितों के लिए अब हर सप्ताह आएगा ब्रेल अखबार; रिलायंस फाउंडेशन ने NAB इंडिया के साथ बढ़ाई आवृत्ति

नीता अंबानी की पहल: दृष्टिबाधित पाठकों के लिए अब हर सप्ताह प्रकाशित होगा ब्रेल अखबार; हिंदी व मराठी में पाक्षिक से साप्ताहिक हुई आवृत्ति

📍 स्थान: मुंबई (महाराष्ट्र) | 📅 दिनांक: 13 अक्टूबर 2026 | 👁️ श्रेणी: सामाजिक सरोकार, रिलायंस फाउंडेशन, दिव्यांगजन सशक्तिकरण, स्वास्थ्य व शिक्षा

मुंबई: दृष्टिबाधित व्यक्तियों तक समसामयिक घटनाओं और उपयोगी जानकारियों की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रिलायंस फाउंडेशन (Reliance Foundation) ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। फाउंडेशन के फ्लैगशिप 'दृष्टि कार्यक्रम' के अंतर्गत प्रकाशित होने वाले हिंदी और मराठी भाषा के ब्रेल अखबार अब पाक्षिक (15 दिन) के स्थान पर साप्ताहिक (Weekly) आधार पर प्रकाशित होंगे। नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड (NAB India) के सहयोग से प्रकाशित होने वाले इन अखबारों के माध्यम से 30 हजार से अधिक नियमित पाठकों को अब हर सप्ताह देश-दुनिया की ताजा खबरों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।

📌 रिलायंस फाउंडेशन दृष्टि पहल के मुख्य बिंदु:

  • साप्ताहिक ब्रेल अखबार: हिंदी और मराठी भाषा में निकलने वाला ब्रेल अखबार अब हर सप्ताह दृष्टिबाधित पाठकों तक पहुंचेगा।
  • 30,000+ पाठक वर्ग: एनएबी इंडिया के सहयोग से वितरित होने वाले इस पत्र से हजारों दृष्टिबाधित छात्र, शिक्षक और नागरिक सीधे जुड़े हैं।
  • ₹5 करोड़ का विशेष अनुदान: चेयरपर्सन नीता अंबानी ने जनवरी में एनएबी इंडिया के 75वें स्थापना दिवस पर पांच करोड़ रुपये की सहायता देने की घोषणा की थी।
  • 22,500 से अधिक लोगों की लौटी रोशनी: वर्ष 2003 से संचालित 'दृष्टि' अभियान के तहत कॉर्निया ट्रांसप्लांट के जरिए 22,500 से अधिक लोगों को दृष्टि मिली।
  • समेकित नेत्र स्वास्थ्य सेवा: शंकर आई फाउंडेशन और अरविंद आई केयर सिस्टम के समन्वय से 2 लाख से अधिक लोगों को मुफ्त नेत्र परीक्षण व चश्मे उपलब्ध कराए गए।

📊 रिलायंस फाउंडेशन 'दृष्टि' पहल: एक नजर में

घटक / मानक आधिकारिक विवरण व प्रभाव
अखबार का प्रकाशन स्वरूप पाक्षिक से बदलकर 'साप्ताहिक' (Weekly Braille Edition)
प्रकाशन भाषाएं हिंदी एवं मराठी (ब्रेल लिपि)
सहयोगी संस्था नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड (NAB India)
नियमित पाठक संख्या 30,000 से अधिक दृष्टिबाधित पाठक
दृष्टि कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2003 (2 लाख+ लाभार्थी, 22,500+ कॉर्निया प्रत्यारोपण)

सूचना तक पहुंच: नीता अंबानी का समावेशी दृष्टिकोण

रिलायंस फाउंडेशन की संस्थापक और चेयरपर्सन नीता एम. अंबानी लंबे समय से दिव्यांगजनों और विशेष रूप से दृष्टिबाधित नागरिकों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रयासरत रही हैं। इसी वर्ष जनवरी में मुंबई में आयोजित एनएबी इंडिया के 75वें स्थापना दिवस समारोह में उन्होंने फाउंडेशन की तरफ से 5 करोड़ रुपये का विशेष सहयोग देने की घोषणा की थी।

“सूचना और ज्ञान पर हर नागरिक का समान अधिकार है। दृष्टिबाधित व्यक्तियों को देश-दुनिया के बदलते घटनाक्रम से जोड़े रखना उनके आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के लिए बेहद जरूरी है। पाक्षिक के बजाय साप्ताहिक ब्रेल अखबार का प्रकाशन उन्हें समय पर सूचनाएं उपलब्ध कराकर उनके सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

2003 से जारी 'दृष्टि' अभियान: 22,500 से अधिक लोगों को मिली रोशनी

रिलायंस फाउंडेशन के 'दृष्टि कार्यक्रम' की शुरुआत वर्ष 2003 में की गई थी। इस अभियान का मूल उद्देश्य समाज के वंचित तबकों तक उच्च स्तरीय और नि:शुल्क नेत्र चिकित्सा पहुंचाना है:

  • मुफ्त कॉर्निया प्रत्यारोपण: देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के साथ मिलकर फाउंडेशन ने 22,500 से अधिक दृष्टिबाधित लोगों की कॉर्निया सर्जरी कराकर उनकी आंखों की रोशनी लौटाई है।
  • संस्थागत साझेदारी: इस मानवीय कार्य के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए NAB India, शंकरा आई फाउंडेशन (Shankara Eye Foundation) और अरविंद आई केयर सिस्टम (Aravind Eye Care System) के साथ दीर्घकालिक साझेदारी की गई है।
  • निवारक नेत्र जांच: अब तक 2 लाख से अधिक लोगों के नेत्र स्वास्थ्य की जांच की जा चुकी है, साथ ही जरूरतमंदों को निशुल्क चश्मे और प्राथमिक दवाएं वितरित की गई हैं।

नियमित खबरों से बढ़ेगा आत्मविश्वास और सामान्य ज्ञान

डिजिटल तकनीक के प्रसार के बावजूद ब्रेल लिपि में छपी सामग्री दृष्टिबाधित विद्यार्थियों और पाठकों के लिए साक्षरता और बौद्धिक विकास का सबसे प्रामाणिक माध्यम बनी हुई है। पाक्षिक अखबार मिलने पर कई खबरें पुरानी हो जाती थीं, लेकिन अब साप्ताहिक संस्करण आने से:

  • पाठकों को राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, खेल, विज्ञान और समसामयिक विषयों की त्वरित और ताजा जानकारियां मिल सकेंगी।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे दृष्टिबाधित युवाओं को करंट अफेयर्स की नियमित तैयारी में सीधी मदद मिलेगी।
  • समाज में दिव्यांगजनों के बौद्धिक समावेशन (Intellectual Inclusion) को नया संबल मिलेगा।
निष्कर्ष: रिलायंस फाउंडेशन और एनएबी इंडिया का यह साझा प्रयास समाज के उस वर्ग के लिए उम्मीद की नई किरण है जो शब्दों को स्पर्श के माध्यम से महसूस करते हैं। साप्ताहिक ब्रेल अखबार का यह विस्तार समावेशी समाज और सूचना की समानता की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण है।

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