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'पदक लाओ, पद पाओ': यूपी में खिलाड़ियों की सीधी भर्ती और करोड़ों के पुरस्कार; सीएम योगी ने गिनाईं खेल व नारी सशक्तिकरण की उपलब्धियां

'पदक लाओ, पद पाओ' के तहत खिलाड़ियों की सीधी भर्ती: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोले— भय और उपेक्षा नहीं, अब सुरक्षा और प्रोत्साहन है यूपी की पहचान

📍 स्थान: लखनऊ (उत्तर प्रदेश) | 📅 दिनांक: 16 अक्टूबर 2026 | 🏅 श्रेणी: खेल नीति, नारी सशक्तिकरण, सरकारी नौकरी, उत्तर प्रदेश शासन

लखनऊ: शारदीय नवरात्रि की षष्ठी तिथि पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आसुरी प्रवृत्तियों का संहार करने वाली मां कात्यायनी नारीशक्ति के अदम्य साहस, संकल्प और अजेय पराक्रम का जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने प्रदेश में आस्था, सुरक्षा और विकास के समन्वय से आए युगांतकारी परिवर्तन को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश अब भय और उपेक्षा के दौर से बाहर निकल चुका है। आज राज्य में ‘पदक लाओ, पद पाओ’ नीति के अंतर्गत पदक विजेता खिलाड़ियों को सीधे राजपत्रित व अन्य सरकारी पदों पर नियुक्तियां दी जा रही हैं।

📌 खेल प्रोत्साहन एवं महिला सशक्तिकरण: प्रमुख बिंदु:

  • सीधी सरकारी नौकरी: ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स के पदक विजेताओं को 'पदक लाओ, पद पाओ' के तहत सीधी सरकारी सेवा।
  • करोड़ों के नकद पुरस्कार: अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश व प्रदेश का नाम रोशन करने वाले एथलीटों को वित्तीय सुरक्षा और प्रोत्साहन राशि।
  • खेल ढांचे का विस्तार: ग्राम स्तर पर खेल मैदान, ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियम, जिला व मंडल स्तर पर स्पोर्ट्स कॉलेज और मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय।
  • अंतरराष्ट्रीय पटल पर बेटियां: पारुल चौधरी, अन्नू रानी, प्रियंका गोस्वामी, दीप्ति शर्मा, वंदना कटारिया और दिव्या काकरान जैसी खिलाड़ियों की वैश्विक उपलब्धियों की सराहना।
  • 2017 पूर्व के हालात पर प्रहार: पूर्ववर्ती सरकारों में खेल मैदानों पर माफिया का कब्जा था और बेटियां अवसरों के अभाव में उपेक्षित थीं।

📊 उत्तर प्रदेश खेल प्रोत्साहन नीति: प्रमुख स्तंभ एवं अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां

नीतिगत घटक / क्षेत्र प्रावधान, बुनियादी ढांचा एवं अग्रणी खिलाड़ी
सेवा सुरक्षा नीति ‘पदक लाओ, पद पाओ’ (अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं को राजपत्रित अधिकारी पदों पर सीधी भर्ती)
उच्च स्तरीय खेल संस्थान मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय (मेरठ), मंडलीय स्पोर्ट्स कॉलेज व जिला स्टेडियम
एथलेटिक्स (ट्रैक एंड फील्ड) पारुल चौधरी (दौड़), अन्नू रानी (भाला फेंक), प्रियंका गोस्वामी (पैदल चाल), प्राची चौधरी
टीम एवं कॉम्बैट स्पोर्ट्स दीप्ति शर्मा व मेघना सिंह (क्रिकेट), वंदना कटारिया (हॉकी), दिव्या काकरान (कुश्ती), अस्मिता डे (जूडो)
ग्रामीण स्तर पर ढांचा ग्राम पंचायत स्तर पर खेल मैदान और ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियमों का विकास

'2017 से पहले चारदीवारी में कैद थे बेटियों के सपने': सीएम का विपक्ष पर निशाना

मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए पिछली सरकारों के दौरान खेल और कानून-व्यवस्था की बदहाली का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में व्याप्त भय और अव्यवस्था के चलते बेटियों की प्रतिभा को अवसर नहीं मिल पाते थे।

“वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में ऐसा माहौल था जहां बेटियों के सपनों पर पहरे थे और हौसलों पर बंदिशें थीं। खेल के मैदानों पर भू-माफिया का कब्जा था, संसाधन नदारद थे और बेटियों की उड़ान को पंख देने के बजाय उनकी प्रतिभा को चारदीवारी में कैद कर दिया गया था। आज हमारी सरकार ने उन बंदिशों को तोड़कर बेटियों को खुला आसमान दिया है।”
— योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)

भय की जगह सुरक्षा, उपेक्षा की जगह प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने हर क्षेत्र में प्रगति की नई पटकथा लिखी है। खेल के क्षेत्र में शासन ने तीन सूत्रीय दृष्टिकोण अपनाया है:

  • प्रतिभा को प्रोत्साहन: शुरुआती स्तर पर ही खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें आधुनिक कोचिंग, आहार और उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
  • उपलब्धियों को सम्मान: ओलंपिक, एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतकर लौटने वाले खिलाड़ियों को लाखों-करोड़ों रुपये की पुरस्कार राशि से सम्मानित किया जा रहा है।
  • भविष्य को सुरक्षा: आर्थिक तंगी या करियर की अनिश्चितता से बचाने के लिए सीधी सरकारी भर्ती नीति लागू कर खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित किया गया है।

वैश्विक खेल पटल पर उत्तर प्रदेश की बेटियों का परचम

सीएम योगी ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार की सकारात्मक नीतियों का ही परिणाम है कि आज यूपी के ग्रामीण अंचलों से निकली बेटियां ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स जैसे महामंचों पर तिरंगा लहरा रही हैं।

एथलेटिक्स में पारुल चौधरी, अन्नू रानी और प्रियंका गोस्वामी के कीर्तिमान, क्रिकेट के मैदान पर दीप्ति शर्मा और मेघना सिंह का हरफनमौला खेल, अंतरराष्ट्रीय हॉकी में वंदना कटारिया की आक्रामकता, कुश्ती मैट पर दिव्या काकरान का दम और जूडो में अस्मिता डे का पराक्रम यह सिद्ध करता है कि अवसर मिलने पर उत्तर प्रदेश की नारीशक्ति अजेय है।

निष्कर्ष: 'पदक लाओ, पद पाओ' नीति और खेल अवसंरचना के त्रिस्तरीय विस्तार ने उत्तर प्रदेश को खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित करने की मजबूत आधारशिला रखी है। सुरक्षित माहौल और ठोस सरकारी समर्थन के दम पर प्रदेश की बेटियां आज आत्मविश्वास के साथ राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर नए कीर्तिमान गढ़ रही हैं।

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