पूजा घी की नई नियमावली के अनुपालन के लिए व्यापारियों ने मांगा पर्याप्त समय: संजय गुप्ता बोले— 'नियम सही, पर तत्काल लागू करना अव्यावहारिक'
लखनऊ: उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) द्वारा पूजा, हवन और दीपक प्रज्वलन के लिए उपयोग किए जाने वाले अखाद्य वसा (Non-Edible Fat) उत्पादों पर लागू की गई नई नियमावली को लेकर व्यापारियों ने व्यावहारिक मोहलत की मांग की है। उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल ने स्पष्ट किया है कि संगठन जनस्वास्थ्य की दृष्टि से बनाए गए इस नियम का विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने से विनिर्माण इकाइयों और खुदरा व्यापारियों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। नई पैकेजिंग तैयार करने और बाजार में मौजूद पुराने स्टॉक को निकालने के लिए विभाग को पर्याप्त समय देना चाहिए।
📌 व्यापार मंडल की प्रमुख मांगें व रुख:
- नियम का समर्थन, पर समय की दरकार: संगठन ने माना कि अखाद्य वसा के लिए कड़े नियम स्वास्थ्य हित में उचित हैं, परंतु व्यावहारिक क्रियान्वयन के लिए मोहलत जरूरी है।
- आयुक्त से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल: आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष संजय गुप्ता के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब से मिलकर ज्ञापन सौंपेगा।
- पैकेजिंग बदलाव में चुनौती: निर्माता कंपनियों को नई वैधानिक चेतावनी और नए लेबलिंग मानकों के अनुसार पैकिंग रोल तैयार कराने में समय लगेगा।
- पुराने स्टॉक का संकट: त्योहारों के सीजन में दुकानों और गोदामों में पहले से डंप पड़े स्टॉक के निस्तारण का समय दिए बिना कार्रवाई से उत्पीड़न की आशंका।
📊 पूजा घी नियमावली विवाद: एक नजर में
| पहलू / घटक | व्यापारियों का पक्ष एवं प्रशासनिक विवरण |
|---|---|
| नियामक संस्था | खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA), उत्तर प्रदेश |
| संबंधित उत्पाद | हवन, पूजा व दीपक हेतु अखाद्य वसा / पूजा घी (Non-Edible Fat Products) |
| व्यापारिक संगठन का नेतृत्व | संजय गुप्ता (प्रदेश अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल) |
| मूल मांग | नई पैकेजिंग अपनाने और मौजूदा स्टॉक क्लीयर करने के लिए व्यावहारिक समयावधि |
| आगामी प्रशासनिक कदम | आयुक्त डॉ. रोशन जैकब से शिष्टाचार व वार्ता हेतु मुलाकात |
व्यावहारिक कठिनाइयों पर ध्यान दे प्रशासन: संजय गुप्ता
उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष संजय गुप्ता ने बयान जारी करते हुए कहा कि मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए बनाए गए नियमों का व्यापारी वर्ग सदैव स्वागत करता है। किंतु जब कोई नीति रातों-रात लागू कर दी जाती है, तो जमीनी स्तर पर विनिर्माता और खुदरा व्यापारी असमंजस में पड़ जाते हैं।
“हम नियमावली का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि उसके सुचारु क्रियान्वयन की वकालत कर रहे हैं। अचानक आदेश जारी कर कार्रवाई शुरू करने से व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होता है और पुराने स्टॉक को लेकर उत्पीड़न का भय बना रहता है। विभाग को नियम लागू करने के साथ ही उसके जमीनी और व्यावहारिक पहलुओं को भी समझना चाहिए।”
— संजय गुप्ता (प्रदेश अध्यक्ष, उप्र आदर्श व्यापार मंडल)
उत्पादन इकाइयों और खुदरा विक्रेताओं के सामने दोहरी चुनौती
व्यापारियों का कहना है कि आगामी शारदीय नवरात्रि और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों के चलते थोक और खुदरा बाजारों में पूजा सामग्री व दीपक जलाने वाले घी का पर्याप्त स्टॉक पहले से मंगाया जा चुका है:
- प्रिंटिंग व डाई बदलाव: नए पैकेजिंग दिशा-निर्देशों (जिसमें अखाद्य होने की स्पष्ट घोषणा और विशिष्ट रंग कोड अनिवार्य हैं) को लागू करने के लिए पैकेजिंग निर्माताओं को नए सिलेंडर और प्रिंटिंग डाई तैयार करने में कम से कम 30 से 60 दिन का समय लगता है।
- वित्तीय नुकसान की आशंका: यदि बाजार में पहले से मौजूद स्टॉक को तत्काल प्रभाव से जब्त या प्रतिबंधित किया जाता है, तो छोटे दुकानदारों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ेगी।
- उत्पीड़न से संरक्षण: व्यापार मंडल ने मांग की है कि जब तक निर्धारित संक्रमण काल (Transition Period) पूरा नहीं हो जाता, तब तक फील्ड अधिकारियों द्वारा दंडात्मक छापों के बजाय जागरूकता अभियान चलाए जाएं।


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