'रूल ऑफ माफिया' से मुक्त हुआ यूपी, अब 'रूल ऑफ लॉ' का राज: डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बोले सीएम योगी
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (RMLNLU) के पंचम दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब 'रूल ऑफ माफिया' से पूरी तरह मुक्त होकर 'रूल ऑफ लॉ' (कानून के राज) के दौर में स्थापित हो चुका है। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में कानून-व्यवस्था और निवेश को लेकर संशय रहता था तथा माफिया तंत्र विकास में बाधक बना हुआ था। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि अन्याय सामने हो तो चुप रहना कोई विकल्प नहीं है; अंतिम फैसला इतिहास सुनाएगा, परंतु न्याय के पक्ष में निर्भीक बहस आपको ही करनी होगी।
📌 पंचम दीक्षांत समारोह के मुख्य बिंदु:
- संवैधानिक सर्वोच्चता: कोई व्यक्ति या पद संविधान से ऊपर नहीं हो सकता; आपातकाल ने देश को 'रूल ऑफ लॉ' और 'रूलर ऑफ लॉ' का अंतर समझाया।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर संदेश: एआई को अपना सहायक बनाएं, सारथी नहीं; अंतिम निर्णय हमेशा मनुष्य के मानवीय विवेक से होना चाहिए।
- डॉ. लोहिया के विचार: एक कुशल विधिवेत्ता के पास शिव जैसा शांत मस्तिष्क, कृष्ण जैसा संवेदनशील हृदय और राम जैसा अटल वचन होना चाहिए।
- साइबर सुरक्षा व ट्रिलियन डॉलर विजन: यूपी के 75 जिलों में साइबर थाने क्रियाशील, 'एआई प्रज्ञा' से 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण और 2029-30 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य।
- मेधावियों को पदक: एलएलएम में रुपाली जायसवाल तथा एलएलबी ऑनर्स में तेजस्वनी कौशल को स्वर्ण पदक; ईशा अग्रवाल को मिले 3 प्रायोजित गोल्ड मेडल।
📊 RMLNLU दीक्षांत समारोह 2026: प्रमुख पदक विजेता
| पाठ्यक्रम / विधा | स्वर्ण पदक विजेता | रजत एवं कांस्य पदक विजेता |
|---|---|---|
| एलएलएम (LL.M) | रुपाली जायसवाल | चित्रा सिंह (रजत), सौम्या गिरी (कांस्य) |
| एलएलबी ऑनर्स (LL.B Hons.) | तेजस्वनी कौशल | ईशा अग्रवाल (रजत), निशा वर्मा (कांस्य) |
| प्रायोजित स्वर्ण पदक | ईशा अग्रवाल (3 मेडल: क्रिमिनल लॉ, कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ, स्टूडेंट ऑफ द ईयर) | तान्या वर्मा (टैक्सेशन), मालविका पचौरी (सर्वश्रेष्ठ मूटिंग) |
| डिप्लोमा: साइबर लॉ | भास्कर पांडे | जयंत अग्रवाल (रजत), चिराग निगम (कांस्य) |
| डिप्लोमा: आईपीआर व मीडिया लॉ | आशी पांडे (IPR), अंशुमान सिंह (मीडिया लॉ) | रितेश मेहता व ईशा अस्थाना (IPR), संतुष्ट सोनकर (मीडिया लॉ) |
'सत्यं वद, धर्मं चर' को चैंबर की दीवार पर नहीं, हृदय में उतारें
मुख्यमंत्री ने युवा अधिवक्ताओं को नैतिक आचरण और निरंतर अध्ययन का संदेश देते हुए कहा कि अधिवक्ता की सबसे बड़ी पूंजी उसकी साख (Credibility) होती है। गलत काम या तात्कालिक लाभ के दबाव में सिद्धांतों से समझौता कभी नहीं करना चाहिए।
“15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 के साथ-साथ 25 जून 1975 की तारीख भी हमारे लोकतांत्रिक इतिहास में बेहद अहम है। आपातकाल ने सिद्ध किया था कि कानून के शासन और शासक के शासन में क्या अंतर होता है। न्यायमूर्ति एचआर खन्ना द्वारा असहमति में दिया गया फैसला आज भी संवैधानिक सिद्धांतों की मशाल है। युवा अधिवक्ताओं को वंचितों के हक में और विकसित भारत के संकल्प की पैरवी ईमानदारी से करनी होगी।”
— योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)
एआई पर आगाह: मानवीय विवेक ही रखेगा न्याय की गरिमा
कानूनी क्षेत्र में तकनीकी बदलावों का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विवेकपूर्ण इस्तेमाल पर बल दिया:
- लापरवाह ड्राफ्टिंग का खतरा: सीएम ने चेताया कि एआई टूल से तैयार एक असावधानीपूर्ण ड्राफ्ट किसी निर्दोष नागरिक की स्वतंत्रता छीन सकता है, इसलिए अंतिम जांच मानवीय विवेक से ही होनी चाहिए।
- डीपफेक व डिजिटल साक्ष्य: साइबर अपराधों और डीपफेक के दौर में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की सत्यता परखना कानूनी बिरादरी के लिए नई चुनौती है।
- प्रशासनिक तैयारी: प्रदेश के सभी 75 जनपदों में साइबर थानों की स्थापना हो चुकी है तथा 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क सक्रिय हैं। 'एआई प्रज्ञा' पहल के जरिए 10 लाख युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली के विचार
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों से कहा कि डिग्री केवल एक पड़ाव है, वास्तविक जीवन की परीक्षा अदालत और समाज के बीच शुरू होती है। सफलता इस बात से आंकी जाएगी कि आपने पीड़ित व जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाया।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने कहा कि इस विश्वविद्यालय ने न्यायिक सेवा और बार को उत्कृष्ट प्रतिभाएं दी हैं। उन्होंने छात्रों से विधिक परंपराओं के उच्च मानक स्थापित करने की अपील की। वहीं, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने प्रगति आख्या प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले 20 वर्षों में इस संस्थान ने विभिन्न राज्यों की न्यायपालिका को 250 से अधिक न्यायिक अधिकारी दिए हैं।

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