“बिना कर्म के सिद्धि नहीं प्राप्त होती, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण श्री हनुमान जी हैं”: स्वामी विष्णु दास जी महाराज; लेटे हुए हनुमान मंदिर में शबरी प्रसंग व हनुमान मिलन पर भावविभोर हुए श्रद्धालु
लखनऊ: चौक स्थित पंचवटी घाट पर ऐतिहासिक एवं प्राचीन श्री लेटे हुए हनुमान जी मंदिर में चल रही सप्त दिवसीय श्रीराम कथा के छठे दिन भक्ति और ज्ञान की अविरल धारा बही। कथा व्यास परम पूज्य स्वामी विष्णु दास जी महाराज ने माता शबरी की नवधा भक्ति, प्रभु श्रीराम और पवनपुत्र हनुमान जी के पावन मिलन, सुग्रीव मित्रता, बालि वध और माता सीता की खोज के मार्मिक प्रसंगों का सजीव वर्णन किया। उन्होंने कहा कि हनुमान जी का संपूर्ण जीवन कर्म, निष्काम सेवा और निरभिमानता का अनुपम आदर्श है।
📌 कथा के मुख्य प्रेरणादायी बिंदु:
- कर्म और सिद्धि: केवल ज्ञान या भक्ति पर्याप्त नहीं; भक्ति को प्रभु-समर्पित कर्म में रूपांतरित करना ही सच्ची साधना है।
- नवधा भक्ति का सार: भगवान को रिझाने के लिए आडंबर नहीं, सच्ची निष्ठा और निष्कपट भाव से की गई एक प्रकार की भक्ति भी मोक्ष का द्वार खोलती है।
- हनुमान जी का जीवन दर्शन: असीम बल और ज्ञान के स्वामी होने के बावजूद अहंकार-शून्य होकर लोककल्याण व प्रभु सेवा में समर्पित रहना ही वास्तविक शक्ति है।
- बाढ़ के बावजूद अटूट आस्था: गोमती नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था अडिग रही और कथा पंडाल 'जय श्रीराम' के जयकारों से गूंजता रहा।
📊 सप्त दिवसीय श्रीराम कथा: षष्ठम दिवस विवरण
| विवरण घटक | तथ्य व प्रसंग |
|---|---|
| आयोजन स्थल | प्राचीन श्री लेटे हुए हनुमान जी मंदिर, पंचवटी घाट, चौक, लखनऊ |
| कथा व्यास | परम पूज्य स्वामी विष्णु दास जी महाराज |
| प्रमुख प्रसंग | शबरी नवधा भक्ति, श्रीराम-हनुमान मिलन, सुग्रीव सख्य, बालि वध व लंका गमन संकल्प |
| विशिष्ट अतिथि | महंत श्री बजरंग दास जी (श्री तुलसी पीठाधीश्वर, नीमसार हनुमानगढ़) |
| कथा संयोजक | डॉ. पंकज सिंह भदौरिया |
कर्म, भक्ति और निरभिमानता के शिखर हैं बजरंगबली
कथा व्यास स्वामी विष्णु दास जी महाराज ने पवनसुत हनुमान जी के पावन चरित्र की मीमांसा करते हुए कहा कि बिना कर्म किए किसी भी लक्ष्य की सिद्धि संभव नहीं है।
“बिना कर्म के सिद्धि नहीं प्राप्त होती, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण श्री हनुमान जी हैं। संसार में उन जैसा निष्काम भक्त मिलना दुर्लभ है। उन्होंने कभी अपनी शक्ति का प्रदर्शन निजी अहंकार की तुष्टि के लिए नहीं किया, बल्कि उसे प्रभु श्रीराम के संकल्प और धर्म की रक्षा में समर्पित कर दिया। जब कर्म में समर्पण का भाव जुड़ जाता है, तो साधारण कर्म भी पूजा और साधना बन जाता है।”
— स्वामी विष्णु दास जी महाराज
उन्होंने कहा कि आज के समाज को हनुमान जी के चरित्र से विनम्रता और स्वामीभक्ति की सीख लेनी चाहिए। जिनके जीवन का एकमात्र ध्येय सेवा और परोपकार बन जाता है, उनके मार्ग में आने वाली समुद्र जैसी विशाल बाधाएं भी बौनी साबित होती हैं।
शबरी प्रसंग से लेकर समुद्र लांघने के संकल्प तक भावुक हुए श्रद्धालु
कथा में माता शबरी के आश्रम में प्रभु श्रीराम के आगमन और नवधा भक्ति के उपदेश का वर्णन करते हुए स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि परमात्मा जाति, कुल या बाह्य पांडित्य नहीं देखते, वे केवल हृदय की निर्मलता और निष्कपट प्रेम के भूखे हैं।
इसके बाद ऋष्यमूक पर्वत पर श्रीराम-हनुमान मिलन, सुग्रीव से मित्रता और बालि के उद्धार का प्रसंग प्रस्तुत हुआ। जब कथा व्यास ने माता जानकी की खोज के लिए जाम्बवंत जी द्वारा हनुमान जी को उनका बल स्मरण कराने और विशाल समुद्र को लांघने के संकल्प का ओजस्वी वर्णन किया, तो पूरा पंडाल "जय बजरंगबली" और "जय श्रीराम" के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
गोमती के बढ़ते जलस्तर पर भारी पड़ी आस्था: डॉ. पंकज सिंह भदौरिया
कथा संयोजक डॉ. पंकज सिंह भदौरिया ने बताया कि लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने और घाटों के आसपास जलभराव की स्थिति के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। प्रतिकूल मौसम और भौगोलिक चुनौतियों के बीच भी प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु समय से पूर्व पहुंचकर कथा रसपान कर रहे हैं, जो सनातन आस्था की जीवंतता को दर्शाता है।
प्रमुख संतों व आयोजन समिति की गरिमामयी उपस्थिति
षष्ठम दिवस के इस धार्मिक अनुष्ठान में नीमसार हनुमानगढ़ के पीठाधीश्वर महंत श्री बजरंग दास जी ने विशेष रूप से व्यासपीठ का पूजन-अर्चन किया।
उपस्थित गणमान्य: कथा व्यवस्थापक प्रहलाद अग्रवाल, रिद्धि किशोर गौड़, आशीष अग्रवाल, अभिषेक गुप्ता, अजय मेहरोत्रा, अतुल गुप्ता, उषा अग्रवाल, अखिलेश कुमार एवं अमित शर्मा सहित मंदिर प्रबंधन के पदाधिकारी व बड़ी संख्या में मातृशक्ति और श्रद्धालु उपस्थित रहे।


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