सिल्क क्लस्टर के रूप में विकसित होंगे संत रविदास नगर, मिर्जापुर और वाराणसी: इंडिया कारपेट एक्सपो के 50वें संस्करण में सीएम योगी का उद्यमियों से सीधा संवाद; कालीन नीति पर सरकार लेगी संज्ञान
भदोही: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को संत रविदास नगर (भदोही) में आयोजित 'इंडिया कारपेट एक्सपो' के स्वर्ण जयंती (50वें) संस्करण में भाग लेते हुए बड़ा ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास नगर (भदोही), मिर्जापुर और वाराणसी के त्रिकोण को एक एकीकृत 'सिल्क क्लस्टर' के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही क्षेत्र के बुनियादी और आर्थिक ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए ‘वाराणसी-विंध्य रीजनल डेवलपमेंट प्लान’ भी शीघ्र धरातल पर उतरेगा। एक्सपो के दौरान मुख्यमंत्री ने देश-विदेश के निर्यातकों, निर्माताओं और बुनकरों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।
📌 कारपेट एक्सपो एवं संवाद के मुख्य बिंदु:
- सिल्क क्लस्टर का विस्तार: भदोही, मिर्जापुर और वाराणसी को जोड़कर आधुनिक सिल्क व टेक्सटाइल हब तैयार होगा।
- वाराणसी-विंध्य रीजनल डेवलपमेंट प्लान: विंध्य और वाराणसी परिक्षेत्र के औद्योगिक विकास हेतु व्यापक रीजनल प्लान जल्द लागू होगा।
- समर्पित कालीन नीति की मांग: उद्यमियों ने हस्तनिर्मित कालीनों के लिए विशेष नीति की मांग रखी; सीएम ने परीक्षण कर संज्ञान लेने का भरोसा दिया।
- CEPC में महिलाओं की हिस्सेदारी: कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (CEPC) में महिला उद्यमियों के लिए पद आरक्षित करने और भागीदारी बढ़ाने के निर्देश।
- स्थानीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीय मंच: पहले दिल्ली तक सीमित रहने वाला अंतरराष्ट्रीय एक्सपो अब भदोही के कारपेट मार्ट में नियमित रूप से आयोजित हो रहा है।
📊 कालीन व हस्तशिल्प परिक्षेत्र: प्रमुख विकास योजनाएं
| प्रमुख क्षेत्र / नीति | प्रस्तावित स्वरूप एवं सरकारी विजन |
|---|---|
| त्रिकोणीय सिल्क क्लस्टर | संत रविदास नगर (भदोही), मिर्जापुर और वाराणसी का एकीकृत विकास |
| रीजनल डेवलपमेंट प्लान | वाराणसी-विंध्य रीजनल डेवलपमेंट प्लान शीघ्र लागू किया जाएगा |
| हस्तनिर्मित कालीन नीति | पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग से अलग क्राफ्ट-विशिष्ट नीति पर शासन स्तर पर विचार |
| महिला उद्यमिता संवर्धन | कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (CEPC) में महिलाओं के लिए स्थान आरक्षण का सुझाव |
उद्यमियों ने रखीं अपनी मांगें: कनेक्टिविटी की सराहना और अलग नीति की दरकार
खुले संवाद सत्र के दौरान मिर्जापुर के कालीन कारोबारी अनिल कुमार ने प्रदेश में सुदृढ़ हुई फोर-लेन व एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी की सराहना करते हुए कहा कि इससे कच्चे माल की आवक और तैयार माल के निर्यात लॉजिस्टिक्स में बड़ा सुधार हुआ है। उन्होंने मिर्जापुर की ऐतिहासिक कालीन धरोहर के संरक्षण का भी मुद्दा उठाया।
उद्यमी इम्तियाज अहमद ने कहा कि राज्य सरकार की ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना ने भदोही के कालीन उद्योग को पुनर्जीवन दिया है। उन्होंने मांग की कि कालीन क्षेत्र के व्यापक दायरे को देखते हुए सरकार एक स्वतंत्र कालीन उद्योग नीति तैयार करे, जिससे ग्रामीण स्तर पर लाखों नए रोजगार सृजित हो सकें।
हस्तशिल्प निर्यातक पीयूष कुमार बरनवाल ने सुझाव दिया कि चूंकि हस्तनिर्मित कालीन (Handmade Carpet) तैयार होने में लंबा समय लगता है और इसमें अत्यधिक मानवीय श्रम शामिल होता है, इसलिए इसे भारी मशीनरी वाली सामान्य मैन्युफैक्चरिंग श्रेणी से अलग रखकर एक विशेष क्राफ्ट-फ्रेंडली नीति के तहत लाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने इस पर बुनकरों के कौशल को नमन करते हुए शीघ्र सकारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिया।
"नारी शक्ति वंदन के दौर में CEPC में भी मिले आरक्षण": सीएम योगी
संवाद के दौरान महिला उद्यमी आदर्श पूर्णिमा ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि कभी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सिमटा रहने वाला यह प्रतिष्ठित एक्सपो अब सीधे बुनकरों की धरती भदोही में भव्यता से आयोजित हो रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि कालीन उद्योग में कताई, बुनाई और डिजाइनिंग में लाखों महिलाएं जुड़ी हैं, किंतु कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (CEPC) के प्रशासनिक ढांचे में महिला उद्यमियों का प्रतिनिधित्व नगण्य है।
"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' लेकर आए हैं, जिससे नारी अब केवल नीतियों की लाभार्थी नहीं बल्कि स्वयं नीति-निर्माता बन रही है। कालीन उद्योग के निर्यात परिषद (CEPC) में भी महिला उद्यमियों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए और उनके लिए आवश्यक स्थान आरक्षित होना चाहिए। हमारी सरकार इस दिशा में संस्थागत सुधार के लिए पूरा सहयोग करेगी।"
— योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)
हस्तनिर्मित कालीन में भारत की बादशाहत बरकरार
मुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक पटल पर हस्तनिर्मित कालीन के क्षेत्र में भारत का कोई सानी नहीं है। उत्तर प्रदेश का यह परिक्षेत्र देश के कुल कालीन निर्यात में 60 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है।
सिल्क क्लस्टर के विकास से उच्च कोटि के रेशम धागे की उपलब्धता स्थानीय स्तर पर सुनिश्चित होगी, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी और कालीन की लागत प्रतिस्पर्धी बनेगी।


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