आयुष विभाग में 30 वर्षों से नहीं आया यूनानी फार्मासिस्ट का विज्ञापन: 264 में से 210 पद रिक्त; संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर उठाई शीघ्र भर्ती व आयु-सीमा में छूट की मांग
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के राजकीय यूनानी चिकित्सालयों एवं औषधालयों में यूनानी फार्मासिस्टों की भर्ती का विज्ञापन पिछले लगभग तीन दशकों (30 वर्षों) से जारी न होने के कारण मानव संसाधन का भारी संकट खड़ा हो गया है। आयुष फार्मासिस्ट संघ उत्तर प्रदेश (रजि.) ने इस गंभीर समस्या को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करने, न्यायालयीन विवादों का प्रभावी निस्तारण कराने और लंबे विलंब के कारण ओवरएज हो चुके पात्र अभ्यर्थियों को आयु-सीमा में शिथिलीकरण देने की मांग की है।
📌 यूनानी फार्मासिस्ट संवर्ग संकट के मुख्य बिंदु:
- 79% पद रिक्त: कुल 264 स्वीकृत पदों में से लगभग 210 पद खाली पड़े हैं, जिससे जमीनी स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं।
- अत्यधिक कार्यभार: स्थिति यह है कि एक-एक फार्मासिस्ट को 15 से 16 चिकित्सालयों का अतिरिक्त प्रभार देकर 50 किमी की दूरी तक दौड़ाया जा रहा है।
- 2014 से लंबित न्यायालयीन विवाद: रिट याचिका संख्या 6115 (S/S) और विधिक अड़चनों के कारण भर्ती प्रक्रिया वर्षों से अटकी हुई है।
- ओवरएज अभ्यर्थियों का दर्द: भर्ती न आने से हजारों योग्य डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों की निर्धारित आयु-सीमा समाप्त हो चुकी है।
- उम्र छूट की विधिक मांग: 'उत्तर प्रदेश लोक सेवा (आयु सीमा में शिथिलीकरण) नियमावली, 1992' के नियम-3 के तहत पात्र अभ्यर्थियों को आगामी भर्ती में अवसर देने की अपील।
📊 यूनानी फार्मासिस्ट संवर्ग: स्वीकृत पद बनाम रिक्तियों की स्थिति
| विवरण घटक | आधिकारिक आंकड़े व स्थिति |
|---|---|
| कुल स्वीकृत पद | 264 पद (राजकीय यूनानी चिकित्सालय एवं औषधालय) |
| वर्तमान में रिक्त पद | लगभग 210 पद (स्वीकृत पदों का करीब 79%) |
| विधानसभा 2025 में दर्ज आंकड़ा | तृतीय सत्र में आयुष विभाग द्वारा 190 पद रिक्त बताए गए थे |
| कार्यभार की जमीनी हकीकत | 1 फार्मासिस्ट पर 15-16 अस्पतालों का प्रभार (50 किमी तक का दायरा) |
| न्यायालयीन संदर्भ | वर्ष 2014 की रिट याचिका संख्या 6115 (S/S) के कारण भर्ती प्रक्रिया प्रभावित |
एक फार्मासिस्ट पर 16 अस्पतालों का भार: दवा वितरण व स्टॉक प्रबंधन प्रभावित
आयुष फार्मासिस्ट संघ के प्रदेश अध्यक्ष अम्मार जाफरी ने पत्र के माध्यम से शासन को अवगत कराया कि प्रदेश भर में यूनानी चिकित्सा सेवाओं को सुचारू रखने के लिए फार्मासिस्ट रीढ़ की हड्डी हैं। लेकिन 79% पद खाली होने से व्यवस्था चरमरा गई है।
"प्रदेश में यूनानी फार्मासिस्टों की ऐसी दुर्गति है कि एक-एक कर्मचारी को 15 से 16 अस्पतालों का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा है। लगभग 50 किलोमीटर की परिधि में दौड़भाग करने के कारण दवाओं का वैज्ञानिक रख-रखाव, दैनिक वितरण, स्टॉक रजिस्टर का रखरखाव और मरीजों की देखभाल जैसे अत्यंत संवेदनशील कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।"
— अम्मार जाफरी (प्रदेश अध्यक्ष, आयुष फार्मासिस्ट संघ उ.प्र.)
विभागीय व विधिक विलंब की मार: ओवरएज हुए अभ्यर्थियों को मिले आयु-शिथिलीकरण
संघ ने रेखांकित किया कि वर्ष 2014 में योजित रिट याचिका संख्या 6115 (S/S) के चलते विधिक अड़चनें उत्पन्न हुईं। हालांकि, इस अदालती व विभागीय लेटलतीफी का सबसे बड़ा नुकसान उन युवाओं को उठाना पड़ा, जिन्होंने वर्षों पूर्व यूनानी फार्मेसी का विधिवत प्रशिक्षण और डिग्री/डिप्लोमा प्राप्त किया था।
विज्ञापन न निकलने के कारण हजारों पात्र युवा सामान्य भर्ती की अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके हैं। संघ ने मांग की है कि:
- आयु-सीमा में छूट: शासन स्तर से 'उत्तर प्रदेश लोक सेवा (आयु सीमा में शिथिलीकरण) नियमावली, 1992' के नियम-3 का प्रयोग करते हुए ओवरएज अभ्यर्थियों को विशेष विधिक छूट दी जाए।
- आवेदन का अधिकार: जो अभ्यर्थी पात्रता के समय योग्य थे, उन्हें आगामी भर्ती प्रक्रिया में बैठने का पूर्ण अवसर मिले, बशर्ते वे अन्य शैक्षिक व तकनीकी योग्यताएं पूरी करते हों।
आयुष फार्मासिस्ट संघ का प्रमुख मांग-पत्र
- यूनानी फार्मासिस्ट के वर्तमान रिक्त 210 पदों को तत्काल नई भर्ती प्रक्रिया में शामिल कर विज्ञप्ति प्रकाशित की जाए।
- वर्ष 2014 से संबंधित न्यायालयीन प्रकरण की शासन स्तर पर समीक्षा कर वरिष्ठ व प्रभावी अधिवक्ताओं के माध्यम से पैरवी कराई जाए।
- यदि कोई विधिक रोक प्रभावी है, तो न्यायालय से विधिसम्मत अनुमति लेकर भर्ती का मार्ग प्रशस्त किया जाए।
- न्यायालयीन मामलों की निरंतर व समयबद्ध विभागीय मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो ताकि भविष्य में मुकदमेबाजी में प्रक्रिया न उलझे।
- एक फार्मासिस्ट पर कई अस्पतालों के गैर-व्यावहारिक प्रभार की व्यवस्था को समाप्त करने हेतु पर्याप्त मैनपावर की तैनाती हो।
- प्रदेश में यूनानी चिकित्सा के बढ़ते दायरे को देखते हुए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नए पदों के सृजन पर नीतिगत निर्णय लिया जाए।


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