यूपीआई पर MDR लगाने का कड़ा विरोध, आयकर समाप्त करने की मांग: यूपी सीमेंट व्यापार संघ ने कंपनियों की व्यापार नीतियों पर भी उठाए सवाल
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सीमेंट व्यापार संघ ने डिजिटल लेन-देन यानी यूपीआई (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाए जाने की संभावित व्यवस्था का कड़ा विरोध करते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। हजरतगंज स्थित रॉयल कैफे में संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्याममूर्ति गुप्ता के नेतृत्व में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में व्यापारियों ने आयकर (Income Tax) को पूरी तरह समाप्त करने और सीमेंट विनिर्माता कंपनियों की मनमानी नीतियों में सुधार की मांग भी उठाई। हालांकि, बैठक में जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में कारोबारी सुगमता (Ease of Doing Business) के तहत लिए गए राहतकारी फैसलों का स्वागत किया गया।
📌 बैठक एवं प्रस्ताव के मुख्य बिंदु:
- UPI पर MDR का विरोध: एक प्रतिशत से भी कम मार्जिन वाले सीमेंट-सरिया कारोबार में MDR का अतिरिक्त वित्तीय बोझ असहनीय होने की बात कही गई।
- आयकर समाप्ति की मांग: व्यापारियों ने याद दिलाया कि जीएसटी लाते समय 'वन नेशन, वन टैक्स' की भावना के तहत सभी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष करों को समाहित करने की चर्चा थी।
- जीएसटी काउंसिल के निर्णयों का स्वागत: दंडात्मक जेल प्रावधानों में ढील, पेनाल्टी में कमी, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) सरलीकरण और तेज रिफंड का समर्थन।
- पीएम और वित्त मंत्री को पत्र: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और स्थानीय सांसदों को ज्ञापन भेजा गया।
- कंपनियों की नीतियों पर असंतोष: लागत बढ़ने और स्कीम्स में मनमाने बदलाव के कारण डीलरों को हो रहे घाटे पर चिंता जताई गई।
📊 व्यापार संघ की मांगें व प्रस्ताव: एक नजर में
| मुद्दा / विषय | व्यापारियों का रुख एवं शासकीय मांग |
|---|---|
| यूपीआई लेन-देन पर MDR | पूर्णतः अस्वीकार्य; कम मार्जिन वाले व्यापार को डिजिटल शुल्क से मुक्त रखा जाए |
| प्रत्यक्ष कर व्यवस्था | आयकर (Income Tax) को समाप्त कर केवल जीएसटी आधारित एकल कर व्यवस्था लागू हो |
| जीएसटी 57वीं काउंसिल निर्णय | जेल प्रावधानों में राहत, जुर्माना कम करने और तीव्र रिफंड का स्वागत |
| सीमेंट कंपनियों से टकराव | डीलरों के मार्जिन संरक्षण और पारदर्शी व्यापारिक नियमों की मांग |
| प्रतिनिधित्व तंत्र | पीएमओ, केंद्रीय वित्त मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय व वरिष्ठ सांसदों को ईमेल व पत्र |
1% से भी कम मुनाफे पर चलता है कारोबार: मनीष मोदी व अनिल जैन
बैठक में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी मनीष मोदी ने स्पष्ट किया कि सीमेंट और सरिया का थोक व खुदरा व्यापार बहुत बड़े टर्नओवर पर लेकिन न्यूनतम लाभ (Margin) पर संचालित होता है। अधिकांश मामलों में डीलर का शुद्ध मुनाफा 1 प्रतिशत से भी कम रहता है, जबकि लेन-देन लाखों और करोड़ों रुपये में होते हैं।
“यदि इतने कम मार्जिन वाले व्यापार पर यूपीआई लेन-देन के लिए एमडीआर (MDR) शुल्क थोप दिया जाएगा, तो व्यापारी उस खर्च को कैसे वहन करेगा? ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को दी जाने वाली छूट समाप्त हो जाएगी और कारोबार पर ताला लगाने की नौबत आ जाएगी।”
— मनीष मोदी (व्यापारी प्रतिनिधि)
कार्यवाहक अध्यक्ष अनिल जैन ने भुगतान सीधे व्यापारी के नाम से लेने पर बल दिया, जबकि प्रदेश कोषाध्यक्ष विजय अवस्थी ने आगाह किया कि यदि डिजिटल शुल्क का अतिरिक्त बोझ डाला गया तो व्यापारी डिजिटल माध्यम छोड़कर पुराने नकद या चेक लेन-देन के विकल्प पर लौटने को विवश होंगे।
आयकर समाप्ति की पैरवी: 'एक देश, एक कर' का तार्किक विस्तार
प्रदेश अध्यक्ष श्याममूर्ति गुप्ता और दीपक सिंघल ने आयकर व्यवस्था को समाप्त करने का तार्किक आधार पेश किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में जब देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया गया था, तब यह संकल्पना रखी गई थी कि जटिल कर संरचनाओं को समाप्त कर एक एकीकृत व्यवस्था बनाई जाएगी। चूंकि जीएसटी के माध्यम से हर स्तर पर उपभोग और लेन-देन पर कर स्वतः संग्रहित हो रहा है, ऐसे में व्यापारियों पर आयकर का दोहरा अनुपालन बोझ समाप्त किया जाना चाहिए।
संघ ने बताया कि इस संबंध में प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को ईमेल के जरिए ज्ञापन भेजा गया है। साथ ही लखनऊ सांसद व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नीरज सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रजबहादुर और राज्यसभा सांसद अशोक बाजपेयी को भी औपचारिक पत्र सौंपकर संसद में इस आवाज को उठाने का आग्रह किया गया है।
सीमेंट कंपनियों की नीतियों पर असंतोष, उचित मार्जिन की मांग
बैठक में डालमिया सीमेंट के अधिकारी अनुज तिवारी का स्वागत करते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने सकारात्मक व्यापार नीतियों की सराहना की, परंतु अन्य कंपनियों के रवैये पर गहरी चिंता प्रकट की:
- खरीद मूल्य से नीचे बिक्री का दबाव: प्रतिस्पर्धा और कंपनियों के अनमने लक्ष्यों के फेर में डीलरों को कई बार खरीद दर से भी कम कीमत पर सीमेंट बेचना पड़ता है।
- स्कीम और इंसेंटिव में कटौती: कंपनियों द्वारा बिना पूर्व सूचना नीतियों और इंसेंटिव योजनाओं में किए जाने वाले बदलावों से डीलरों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
- डीलरों से एकजुटता की अपील: गुप्ता ने सभी डीलरों से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों और उचित मुनाफे के लिए विनिर्माता कंपनियों से सामूहिक मोलभाव करें।
प्रमुख उपस्थिति: बैठक में लखनऊ जिलाध्यक्ष अभिषेक मंसानी, मनीष यादव, ज्ञानेंद्र अवस्थी, जीवन जोत सिंह, आरके सिंह, प्रेमनारायण, विजय साहू, महेश गर्ग, मुद्दसिर भाई, कुलदीप गुप्ता, संचित जैन, आकाश हूजा, जिम्मी गर्ग और निर्मल गुप्ता सहित बड़ी संख्या में व्यापारी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


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