यूपीआई पर MDR शुल्क और स्टील परिवहन चालान के विरोध में सीमेंट व्यापार संघ ने खोला मोर्चा: सांसद अशोक बाजपेयी व जेसीपी को सौंपा मांग-पत्र
लखनऊ: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाए जाने की आशंकाओं और निर्माण सामग्री की आपूर्ति के दौरान स्टील परिवहन पर हो रहे भारी-भरकम चालानों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सीमेंट व्यापार संघ ने कड़ा विरोध जताया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्याममूर्ति गुप्ता के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यसभा सांसद अशोक बाजपेयी, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रजबहादुर, वाणिज्य कर विभाग के डीसी अनिल हरित तथा लखनऊ के संयुक्त पुलिस आयुक्त (JCP) बबलू कुमार से मुलाकात कर व्यापारियों की समस्याओं से अवगत कराते हुए ज्ञापन सौंपा।
📌 सीमेंट व्यापार संघ के प्रमुख मांग बिंदु:
- यूपीआई को पूर्ववत शुल्कमुक्त रखें: डिजिटल लेन-देन पर किसी भी प्रकार का MDR शुल्क न लगाया जाए ताकि कैशलेस अर्थव्यवस्था को धक्का न लगे।
- स्टील परिवहन पर अनुचित चालान बंद हों: सरिया (TMT स्टील) के भौतिक आकार को देखते हुए वाहनों पर 2 से 3 लाख रुपये तक के भारी चालान रोके जाएं।
- शीर्ष नेतृत्व को पत्र: यूपीआई के संरक्षण हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वित्त मंत्री और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को ईमेल द्वारा विस्तृत ज्ञापन प्रेषित।
- कारोबारियों पर आर्थिक बोझ: भवन निर्माण सामग्री के कम मुनाफे वाले कारोबार में अतिरिक्त शुल्क से उपभोक्ता कीमतों में वृद्धि और नकदी लेन-देन बढ़ने का खतरा।
- प्रशासनिक आश्वासन: पुलिस व कर प्रशासन से व्यावहारिक दिशा-निर्देश जारी कर परिवहन गतिरोध दूर करने का आग्रह।
📊 व्यापार संघ की मुख्य आपत्तियां एवं प्रस्तुत समाधान
| मुद्दा / विषय | व्यापारियों की प्रमुख समस्या व चिंता | संघ द्वारा प्रस्तावित मांग / समाधान |
|---|---|---|
| UPI पर संभावित MDR शुल्क | डिजिटल लेन-देन महंगा होने से छोटे कारोबारी और उपभोक्ता पुनः नकद लेन-देन (कैश) की ओर लौट सकते हैं। | यूपीआई को पूर्णतः निशुल्क रखा जाए और डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन मिले। |
| स्टील परिवहन पर भारी चालान | सरिया की लंबाई के कारण वाहन से बाहर रहने पर प्रति वाहन ₹2 से ₹3 लाख तक का दंडात्मक जुर्माना। | स्टील की तकनीकी प्रकृति को ध्यान में रखकर व्यावहारिक दिशानिर्देश व चालान से राहत मिले। |
| निर्माण सामग्री व्यापार पर असर | अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और 1-2% के बेहद कम मार्जिन में अतिरिक्त कर/शुल्क वहन करना असंभव। | मध्यमवर्गीय मकान निर्माताओं और खुदरा व्यापारियों को अतिरिक्त लागत से बचाया जाए। |
MDR शुल्क लगने से नकदी लेनदेन बढ़ने की गंभीर आशंका
राज्यसभा सांसद अशोक बाजपेयी को ज्ञापन सौंपते हुए संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्याममूर्ति गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से आज भारत में यूपीआई सबसे सुरक्षित, पारदर्शी और तीव्र भुगतान माध्यम बन चुका है। इससे व्यापारियों को नकद धन रखने और लाने-ले जाने के जोखिम से मुक्ति मिली है तथा कारोबार में वित्तीय अनुशासन आया है।
"सीमेंट और भवन निर्माण सामग्री का व्यापार बहुत कम लाभ मार्जिन पर निर्भर है। यदि यूपीआई पर एमडीआर शुल्क थोपा गया तो व्यापारियों के पास इसे अंतिम उपभोक्ता पर डालने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा। इससे आम मध्यम वर्ग के लिए घर बनाना और महंगा होगा तथा लोग डिजिटल भुगतान छोड़कर दोबारा कैश लेन-देन की ओर रुख करने लगेंगे, जो डिजिटल इंडिया अभियान के मूल उद्देश्य के विपरीत होगा।"
— श्याममूर्ति गुप्ता (प्रदेश अध्यक्ष, उ.प्र. सीमेंट व्यापार संघ)
स्टील परिवहन पर ₹3 लाख तक का जुर्माना: व्यापारियों पर दोहरी मार
प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस और यातायात अधिकारियों के समक्ष स्टील (सरिया) ढुलाई में आ रही गंभीर व्यावहारिक दिक्कतों को उठाया। पदाधिकारियों ने बताया कि टीएमटी स्टील और लोहे की छड़ों की बनावट ऐसी होती है कि मानक ट्रकों या लोडर वाहनों में उसका कुछ हिस्सा बाहर निकलना तकनीकी रूप से अपरिहार्य हो जाता है।
इसके बावजूद ट्रैफिक और परिवहन विभाग द्वारा वाहनों पर दो से तीन लाख रुपये तक का अस्वाभाविक जुर्माना लगाया जा रहा है। इतनी बड़ी राशि का चालान सीधे तौर पर छोटे और मध्यम व्यापारियों की पूंजी को नष्ट कर रहा है। संघ ने याद दिलाया कि इस संबंध में पूर्व में पुलिस आयुक्त लखनऊ को भी अवगत कराया गया था, जिस पर अब तक कोई ठोस राहत नहीं मिली है।
प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख व्यापारी नेता रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष श्याममूर्ति गुप्ता के अलावा भाजपा नेता एवं संघ के राजनीतिक प्रभारी अजय त्रिपाठी 'मुन्ना', मनीष मोदी, कुलदीप गुप्ता, अभिषेक मंसानी और मुद्दसिर भाई सहित सीमेंट एवं बिल्डिंग मैटेरियल व्यापार संघ के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी प्रमुख रूप से शामिल रहे।



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