ईको गार्डन लखनऊ में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों का धरना प्रदर्शन जारी: कैडर निर्माण, वेतन विसंगति और PBI मर्ज करने को लेकर एकजुट हुए प्रदेशभर के CHOs
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सुदूर ग्रामीण अंचलों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (Community Health Officers - CHOs) ने अपनी लंबित मांगों और सेवा संबंधी विसंगतियों के समाधान के लिए राजधानी के ईको गार्डन में मोर्चा खोल दिया है। CHO वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के आह्वान पर 28 सितंबर से शुरू हुआ यह शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन अनवरत जारी है। प्रदेश के सभी 75 जिलों से आए स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक स्वर में कैडर निर्माण, पारदर्शी स्थानांतरण नीति, वेतन विसंगति दूर करने और पीबीआई (PBI) को मूल वेतन में समाहित करने की पुरजोर मांग उठाई है।
📌 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) की प्रमुख मांगें:
- नियमित कैडर का सृजन: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत CHOs के सुरक्षित भविष्य के लिए सेवा नियमावली व नियमित कैडर का गठन।
- PBI को मूल वेतन में विलय: परफॉरमेंस बेस्ड इंसेंटिव (PBI) की जटिल प्रक्रिया समाप्त कर उसे स्थायी रूप से मूल मानदेय/वेतन में जोड़ा जाए।
- समान कार्य, समान वेतन: अन्य अग्रणी राज्यों की तर्ज पर उत्तर प्रदेश के CHOs को भी सम्मानजनक मानदेय और भत्ते दिए जाएं।
- पारदर्शी स्थानांतरण नीति: गृह जनपद अथवा निकटवर्ती जनपदों में रिक्त पदों पर मानवीय आधार पर स्थानांतरण (Transfer) की सुविधा मिले।
- वेतन विसंगति का निवारण: वर्षों से लंबित वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ते और सेवा शर्तों की विसंगतियों को तत्काल दूर किया जाए।
📊 CHO धरना प्रदर्शन 2026: एक नजर में
| प्रमुख पहलू | विवरण |
|---|---|
| धरना स्थल | ईको गार्डन धरना स्थल, लखनऊ |
| आंदोलन प्रारंभ तिथि | 28 सितंबर 2026 (अनिश्चितकालीन धरना जारी) |
| नेतृत्वकारी संगठन | सीएचओ वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश |
| कार्य क्षेत्र / भूमिका | आयुष्मान आरोग्य मंदिर (HWC) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं |
| मुख्य एजेंडा | कैडर निर्माण, ट्रांसफर पॉलिसी, PBI मर्जर एवं वेतन विसंगति निस्तारण |
"ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़, फिर भी भविष्य अनिश्चित": एसोसिएशन का दर्द
धरने को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) पर सीएचओ 12 प्रकार की व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं (CPHC), टेली-परामर्श, गैर-संचारी रोगों (NCD) की स्क्रीनिंग और मातृत्व व शिशु स्वास्थ्य की सतत निगरानी कर रहे हैं।
"कोरोना महामारी से लेकर संचारी रोग नियंत्रण तक, सीएचओ ने सदैव अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर सेवा दी है। इसके बावजूद हमें स्थायी सेवा कैडर से वंचित रखा गया है। पीबीआई के नाम पर मानदेय में की जाने वाली अनावश्यक कटौतियां मानसिक तनाव पैदा करती हैं। हमारी स्पष्ट मांग है कि अन्य राज्यों की भांति उत्तर प्रदेश में भी पीबीआई को मूल वेतन में समाहित किया जाए और एक निश्चित सेवा नियमावली बनाई जाए।"
— देव सिंह तोमर (प्रदेश अध्यक्ष, CHO वेलफेयर एसोसिएशन UP)
रिक्त पदों पर स्थानांतरण और महिला कर्मियों की चुनौतियां
प्रदर्शनकारी अधिकारियों ने विशेष रूप से महिला सीएचओ और दूरदराज के जनपदों में तैनात कर्मियों के स्थानांतरण का मुद्दा उठाया। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष सपना पांडे ने बताया कि सैकड़ों महिला अधिकारी अपने गृह जनपद से 500 से 700 किलोमीटर दूर विषम परिस्थितियों में सेवाएं दे रही हैं। पारिवारिक और चिकित्सीय कारणों के आधार पर रिक्त पदों पर स्थानांतरण नीति लागू होना नितांत आवश्यक है।
अभ्यर्थियों ने शासन को आगाह किया कि उनका यह आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और अनुशासित है, किंतु जब तक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग उनकी न्यायोचित मांगों पर ठोस शासनादेश जारी नहीं करता, तब तक वे धरना स्थल से पीछे नहीं हटेंगे।
धरना स्थल पर जुटे प्रमुख पदाधिकारी
ईको गार्डन में चल रहे इस व्यापक आंदोलन को सफल बनाने के लिए राज्य कार्यकारिणी और विभिन्न जनपदों के प्रतिनिधि लगातार डटे हुए हैं। इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित पदाधिकारियों में:
- देव सिंह तोमर — प्रदेश अध्यक्ष
- मंजीत सिंह — प्रदेश मीडिया प्रभारी
- आकाश गंगवार — प्रदेश प्रभारी
- राजनाथ सिंह गौर — प्रदेश कोषाध्यक्ष
- आशीष राय — प्रदेश मीडिया सलाहकार
- अनुराग सिंह — संगठन मंत्री
- दुर्गेश राय — प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य
- रामेंद्र यादव — प्रदेश प्रवक्ता
- सपना पांडे — प्रदेश अध्यक्ष (महिला मोर्चा)
- विजय दिवाकर सहित विभिन्न जनपदों से आए जिला अध्यक्ष, सचिव एवं सैकड़ों पुरुष व महिला सीएचओ उपस्थित रहे।

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