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यूपी में तूफान और अतिवृष्टि की सटीक सूचना देगा डॉप्लर रडार: योगी सरकार खर्च कर रही ₹22.45 करोड़; 5 शहरों में 500 किमी तक होगी निगरानी

डॉप्लर रडार देगा यूपी में तूफान और अतिवृष्टि की पूर्व सूचना: योगी सरकार 5 शहरों में लगा रही अत्याधुनिक सिस्टम, ₹22.45 करोड़ से मजबूत होगा आपदा प्रबंधन

📍 स्थान: लखनऊ (उत्तर प्रदेश) | 📅 दिनांक: 16 अक्टूबर 2026 | 🌦️ श्रेणी: मौसम विज्ञान, आपदा प्रबंधन, राहत आयुक्त कार्यालय, उत्तर प्रदेश शासन

लखनऊ: मौसम संबंधी प्राकृतिक आपदाओं से जन-धन की हानि रोकने और समय रहते सटीक पूर्वानुमान उपलब्ध कराने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार आधुनिक तकनीक का व्यापक इस्तेमाल करने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के 5 प्रमुख शहरों में डॉप्लर वेदर रडार (Doppler Weather Radar) स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना को गति दी गई है। इनमें से आजमगढ़ और वाराणसी में रडार स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि लखनऊ, झांसी और अलीगढ़ में स्थापना कार्य तेजी से प्रगति पर है। इस संपूर्ण परियोजना पर शासन द्वारा कुल ₹22.45 करोड़ की धनराशि व्यय की जा रही है।

📌 यूपी डॉप्लर वेदर रडार नेटवर्क: प्रमुख बिंदु

  • 5 चिन्हित शहर: आजमगढ़, वाराणसी, लखनऊ, झांसी और अलीगढ़ में अत्याधुनिक वेदर रडार नेटवर्क।
  • 500 किमी तक कवरेज रेंज: प्रत्येक रडार 250 से 500 किलोमीटर के दायरे में बादलों की सघनता, चक्रवात और वर्षा की सटीक निगरानी करेगा।
  • दो शहरों में स्थापना पूर्ण: आजमगढ़ व वाराणसी में रडार क्रियाशील; लखनऊ, झांसी व अलीगढ़ में स्थापना कार्य प्रक्रियाधीन।
  • कुल ₹22.45 करोड़ की लागत: रडार उपकरणों पर ₹19.50 करोड़ तथा संबंधित साइट्स पर सिविल निर्माण कार्यों के लिए ₹2.95 करोड़ का प्रावधान।
  • राहत से पहले बचाव नीति: भारी वर्षा, वज्रपात और आंधी-तूफान का समयपूर्व अलर्ट जारी कर किसानों और आमजन को सुरक्षित करना मुख्य लक्ष्य।

📊 उत्तर प्रदेश डॉप्लर रडार परियोजना: शहरवार स्थिति एवं वित्तीय आवंटन

पैमाना / विवरण परियोजना की स्थिति एवं आधिकारिक आंकड़े
रडार स्थापना स्थल (5 शहर) आजमगढ़, वाराणसी, लखनऊ, झांसी और अलीगढ़
वर्तमान स्थापना स्थिति आजमगढ़ व वाराणसी में स्थापित; 3 अन्य शहरों में प्रक्रियाधीन
रडार निगरानी क्षमता (रेंज) 250 किमी से लेकर 500 किमी प्रति रडार परिधि
उपकरण एवं रडार लागत लगभग ₹19.50 करोड़
साइट सिविल निर्माण व्यय लगभग ₹2.95 करोड़
कुल स्वीकृत बजट ₹22.45 करोड़

'राहत से पहले बचाव पर फोकस': राहत आयुक्त डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद

प्रदेश के राहत आयुक्त डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में मौसमी असंतुलन, अचानक होने वाली भारी अतिवृष्टि और चक्रवाती तूफानों की तीव्रता बढ़ी है। ऐसी स्थिति में परंपरागत पूर्वानुमानों के बजाय रियल-टाइम डाटा अनिवार्य हो चुका है।

“शासन की प्राथमिकता राहत वितरण से अधिक पूर्व-बचाव (Proactive Mitigation) पर है। आजमगढ़ और वाराणसी में डॉप्लर रडार पूरी तरह लग चुके हैं और शेष तीन शहरों में साइट कार्य तीव्र गति से चल रहा है। 500 किलोमीटर की रेंज में मौसम के हर सूक्ष्म बदलाव की निगरानी होने से जिला प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य की योजना बनाने के लिए बहुमूल्य समय मिल सकेगा।”
— डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद (राहत आयुक्त, उत्तर प्रदेश)

अन्नदाता किसानों और आम नागरिकों को सीधे मिलेंगे ये 4 बड़े लाभ

  • फसलों के नुकसान में कमी: बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज आंधी की पूर्व चेतावनी मिलने से किसान पकी फसलों की कटाई, भंडारण और कीटनाशक छिड़काव का समय नियंत्रित कर सकेंगे।
  • पशुधन व संपत्ति की रक्षा: आकाशीय बिजली और भारी जलभराव की स्थिति में ग्रामीण व तराई इलाकों के पशुपालकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का मौका मिलेगा।
  • प्रशासनिक त्वरित सक्रियता: संवेदनशील और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय आपदा प्रबंधन टीमों को आपदा से पहले ही अलर्ट पर तैनात किया जा सकेगा।
  • शहरी जलभराव प्रबंधन: लखनऊ, कानपुर और वाराणसी जैसे बड़े शहरों में भारी वर्षा का सटीक समय ज्ञात होने पर नगर निगम के पंपिंग स्टेशनों और ड्रेनेज सिस्टम को पहले से सक्रिय रखा जा सकेगा।

कैसे काम करता है डॉप्लर वेदर रडार?

डॉप्लर रडार विद्युत चुंबकीय तरंगों (Electromagnetic Waves) के माध्यम से वातावरण में तैर रही पानी की बूंदों, बर्फ के कणों और हवा की गति व दिशा को मापता है। यह बादलों के आंतरिक घनत्व और उनकी गतिशीलता का 3D विश्लेषण करता है, जिससे यह अनुमान लगाना संभव होता है कि किस क्षेत्र में अगले कुछ घंटों में कितने मिलीमीटर वर्षा या कितना तीव्र तूफान आ सकता है।

निष्कर्ष: उत्तर प्रदेश सरकार का ₹22.45 करोड़ का यह निवेश राज्य को मौसम संबंधी आपदाओं से निपटने में आत्मनिर्भर बनाएगा। आजमगढ़, वाराणसी, लखनऊ, झांसी और अलीगढ़ में यह रडार ग्रिड न केवल आमजन की जान-माल की रक्षा करेगा, बल्कि कृषि आधारित राज्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।

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