अस्पतालों की फार्मेसियों में दवाओं की कीमतों का खेल: खरीद और बिक्री मूल्य के अंतर पर FSDA सख्त; 17 जिलों के 52 अस्पतालों में छापेमारी, कंपनियों को नोटिस
लखनऊ: मरीजों को जीवनरक्षक और आवश्यक दवाएं उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA), उत्तर प्रदेश ने निजी व सरकारी अस्पतालों की इन-हाउस फार्मेसियों के खिलाफ व्यापक अभियान छेड़ दिया है। प्रदेशव्यापी विशेष जांच अभियान के तहत 17 जिलों के 9 राजकीय मेडिकल कॉलेज, 11 निजी मेडिकल कॉलेज और 32 बड़े निजी अस्पतालों की फार्मेसियों में एक साथ औचक निरीक्षण किया गया। जांच में दवाओं के खरीद मूल्य और मरीजों से वसूले जा रहे बिक्री मूल्य (MRP) के बीच भारी विसंगतियां, लाइसेंस संबंधी त्रुटियां और कोल्ड चेन मानकों में गंभीर लापरवाही उजागर हुई है।
📌 FSDA छापेमारी एवं जांच के प्रमुख बिंदु:
- 52 अस्पतालों में एक साथ जांच: 17 जिलों के 20 मेडिकल कॉलेजों एवं 32 निजी अस्पतालों की फार्मेसियों का गहन भौतिक सत्यापन।
- सस्ती खरीद, पूरी एमआरपी वसूली: निर्माता कंपनियों द्वारा फार्मेसी को भारी छूट पर दवाएं देने के बावजूद मरीजों से पूरी एमआरपी वसूलने का खेल पकड़ा गया।
- निर्माता व सप्लायर्स को नोटिस: खरीद और बिक्री दर के भारी अंतर पर अस्पतालों, थोक विक्रेताओं और दवा निर्माता कंपनियों से जवाब तलब।
- लाइसेंस व रिकॉर्ड में विसंगति: टेंडर पाल्म, टीएस मिश्रा, वाराणसी हॉस्पिटल, एपेक्स, फोर्टिस और सर्वोदय हॉस्पिटल में मिले अधूरे स्टॉक और बिलिंग रिकॉर्ड।
- दवा बिक्री पर रोक व कोल्ड चेन उल्लंघन: जावित्री हॉस्पिटल लखनऊ में थोक फर्म की बिक्री रोकी गई; कई अस्पतालों में तापमान लॉगर्स और कोल्ड चेन में खामियां मिलीं।
📊 FSDA प्रदेशव्यापी औचक निरीक्षण: अभियान का ब्यौरा
| प्रमुख घटक | विवरण व आंकड़े |
|---|---|
| कवर किए गए जिले व संस्थान | 17 जिले | कुल 52 अस्पताल (9 राजकीय + 11 निजी मेडिकल कॉलेज + 32 निजी अस्पताल) |
| जांच की मुख्य धाराएं | औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 तथा ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO), 2013 |
| मूल्य निर्धारण विसंगति | फोर्टिस हॉस्पिटल (नोएडा) सहित कई प्रमुख अस्पतालों में DPCO उल्लंघनों की जांच |
| दवा बिक्री पर रोक (Ban on Sale) | जावित्री हॉस्पिटल (लखनऊ) में संचालित थोक फर्म पर भंडारण मानकों के उल्लंघन पर रोक |
| कोल्ड चेन में खामियां | टीएस मेडिकल कॉलेज, क्लाउड नाइन (लखनऊ) एवं फेलिक्स हॉस्पिटल (नोएडा) |
सस्ती खरीद के बाद भी मरीजों से पूरी MRP वसूली: सप्लायर्स व कंपनियों पर शिकंजा
जांच टीमों ने पाया कि अस्पताल प्रबंधन और फार्मा कंपनियों के बीच साठगांठ से दवाओं पर कृत्रिम रूप से अत्यधिक एमआरपी मुद्रित की जा रही थी। अस्पतालों की फार्मेसियों को दवाएं थोक दरों पर 50 से 70 प्रतिशत तक के भारी डिस्काउंट पर बेची जाती हैं, किंतु जब वही दवाएं अस्पताल में भर्ती असहाय मरीजों को दी जाती हैं, तो उनसे बिना किसी छूट के पूरी प्रिंटेड एमआरपी वसूली जाती है।
"मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर दवाओं के खरीद और बिक्री मूल्य में मनमाना अंतर रखना अत्यंत अनुचित है। औषधि विभाग न केवल दवाओं की प्रामाणिकता जांच रहा है, बल्कि ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO), 2013 के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों और दवा कंपनियों के विरुद्ध भी कड़ी विधिक कार्रवाई करेगा।"
— खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA), उत्तर प्रदेश
लखनऊ, नोएडा और वाराणसी के इन नामी अस्पतालों में मिलीं कमियां
औचक निरीक्षण के दौरान कई जाने-माने अस्पतालों की इन-हाउस फार्मेसियों में लाइसेंस, स्टॉक रजिस्टर और बिक्री बिलों में गंभीर विसंगतियां सामने आईं:
- लाइसेंस व बिलिंग में गड़बड़ी: लखनऊ के टेंडर पाल्म हॉस्पिटल व टीएस मेडिकल कॉलेज, वाराणसी के वाराणसी हॉस्पिटल व एपेक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, तथा नोएडा के फोर्टिस हॉस्पिटल व सर्वोदय हॉस्पिटल की फार्मेसियों में लाइसेंस और बिलों पर दर्ज पते और स्टॉक रिकॉर्ड में गंभीर अंतर पाया गया।
- फार्मासिस्टों की अनुपस्थिति: वाराणसी हॉस्पिटल में नियमों के विपरीत अधिकृत फार्मासिस्टों की भौतिक उपस्थिति और उनकी ऑनलाइन मैपिंग में कमियां पाई गईं, जिस पर कानूनी नोटिस थमाया गया है।
- कोल्ड चेन व तापमान की अनदेखी: टीएस मेडिकल कॉलेज (लखनऊ), क्लाउड नाइन (लखनऊ) और फेलिक्स हॉस्पिटल (नोएडा) में जीवनरक्षक टीकों व संवेदनशील दवाओं के सुरक्षित भंडारण के लिए जरूरी तापमान लॉगर और कोल्ड चेन प्रणाली में घोर लापरवाही पाई गई।
- स्टॉक जब्ती व रोक: जावित्री हॉस्पिटल (लखनऊ) परिसर में संचालित थोक औषधि फर्म के गोदाम में अनुचित भंडारण मिलने पर दवाओं की बिक्री तत्काल प्रभाव से रोक दी गई।
औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 के तहत नोटिस जारी
FSDA अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन भी फार्मेसियों में स्टॉक रजिस्टर, बिलिंग और लाइसेंस की शर्तें अधूरी पाई गई हैं, उन्हें औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की सुसंगत धाराओं में कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर फार्मेसी लाइसेंस निलंबित या निरस्त किए जाएंगे।
दवा मूल्य निर्धारण से जुड़े मामलों में अस्पतालों के क्रय बिलों और निर्माताओं के इनवॉइस का मिलान नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) के नियमों के आधार पर किया जा रहा है।


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