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यूपी पुलिस के बेड़े में 87 नए इंटरसेप्टर वाहन शामिल: CM योगी ने दिखाई हरी झंडी; स्पीड गन और ब्रेथ एनालाइजर से लैस गाड़ियां रखेंगी ट्रैफिक पर नजर

यूपी पुलिस के बेड़े में शामिल हुए 87 नए इंटरसेप्टर वाहन: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिखाई हरी झंडी; 700 दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों में कड़ी निगरानी

📍 स्थान: लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 📅 दिनांक: 1 अक्टूबर 2026 | 🚔 श्रेणी: यूपी पुलिस, सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन एवं आधुनिक पुलिसिंग

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने और यातायात नियमों का कड़ाई से अनुपालन कराने के लिए यूपी पुलिस के आधुनिक बेड़े में गुरुवार को 87 नए इंटरसेप्टर वाहन शामिल किए गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 चार-पहिया और 62 दो-पहिया अत्याधुनिक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही प्रदेश में सक्रिय इंटरसेप्टर वाहनों की कुल संख्या बढ़कर 172 हो गई है, जिससे हाईवे और प्रमुख शहरों में रैश ड्राइविंग, ओवरस्पीडिंग और ड्रंकन ड्राइविंग पर 24 घंटे शिकंजा कसा जा सकेगा।

📌 यूपी पुलिस ट्रैफिक बेड़े के मुख्य आकर्षण:

  • फ्लीट में विस्तार: 87 नए वाहनों (25 चार-पहिया + 62 दो-पहिया) के साथ राज्य में अब कुल 172 इंटरसेप्टर (35 फोर-व्हीलर, 137 टू-व्हीलर)।
  • हाई-टेक गैजेट्स से लैस: स्पीड लेजर गन, डिजिटल ब्रेथ एनालाइजर, टिंट मीटर और ध्वनि प्रदूषण जांचने के लिए डेसिबल मीटर मौजूद।
  • हादसों में गिरावट: पिछले 8 महीनों में सड़क हादसों में करीब 7% और मृतकों की संख्या में 8% की कमी; लगभग 1,107 लोगों की बचाई गई जान।
  • जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (ZFD): प्रदेश के सभी 75 जिलों के 700 संवेदनशील थाना क्षेत्रों में 801 टीमें (3,500 पुलिसकर्मी) तैनात।
  • जाम से मुक्ति: 'UP GATI' प्लेटफॉर्म के जरिए 20 जिलों के 109 प्रमुख मार्गों की लाइव मॉनिटरिंग; कंजेशन पॉइंट्स में 49% की आई गिरावट।

📊 उत्तर प्रदेश सड़क सुरक्षा एवं ट्रैफिक फ्लीट रिपोर्ट

पैरामीटर / श्रेणी नवीनतम आंकड़े प्रभाव व विवरण
कुल इंटरसेप्टर वाहन 172 वाहन 35 चार-पहिया एवं 137 दो-पहिया त्वरित प्रवर्तन वाहन
सड़क हादसों में कमी (8 माह) ~7% की कमी ब्लैक स्पॉट्स और क्रिटिकल कॉरिडोर्स पर सघन पेट्रोलिंग का असर
सड़क दुर्घटना मौतों में कमी ~8% की कमी (1,107 जानें बचीं) समय पर इमरजेंसी रिस्पॉन्स और प्राथमिक चिकित्सीय समन्वय
ZFD निगरानी नेटवर्क 75 जिले, 700 थाने, 801 टीमें लगभग 3,500 विशेष पुलिसकर्मियों की फील्ड में तैनाती
कंजेशन पॉइंट्स में सुधार (UP GATI) 49% की गिरावट मार्च में 16,723 से घटकर अगस्त में 8,569 हुए जाम वाले बिंदु

आधुनिक सेंसर और उपकरणों से लैस हैं नए इंटरसेप्टर

पुलिस के बेड़े में शामिल किए गए ये नए इंटरसेप्टर वाहन केवल साधारण गश्ती गाड़ियां नहीं हैं, बल्कि यह चलते-फिरते डिजिटल एनफोर्समेंट स्टेशन हैं। वाहनों में आधुनिक स्पीड लेजर गन लगाई गई है जो काफी दूर से ही ओवरस्पीड वाहनों की सटीक रफ्तार दर्ज कर लेती है।

इसके अलावा शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों को पकड़ने हेतु डिजिटल ब्रेथ एनालाइजर, गाड़ियों के शीशों पर अवैध काली फिल्म जांचने के लिए टिंट मीटर और अनधिकृत प्रेशर हॉर्न से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को मापने के लिए डेसिबल मीटर दिए गए हैं। आपातकालीन स्थिति में ये वाहन सीधे 'ट्रैफिक रिस्पॉन्स व्हीकल' की भूमिका भी निभाएंगे।

जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (ZFD) मॉडल से बचीं 1,107 जानें

मुख्यमंत्री के निर्देश पर डीजीपी राजीव कृष्ण के नेतृत्व में राज्यभर में 'जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' (ZFD) परियोजना को मिशन मोड पर लागू किया गया है। प्रदेश के सभी 75 जनपदों के 700 सबसे जोखिम भरे (Accident-Prone) थाना क्षेत्रों को चिन्हित कर 801 समर्पित टीमें बनाई गई हैं।

"इन 801 टीमों में तैनात 3,500 पुलिसकर्मी ब्लैक स्पॉट्स, हाईवे कट्स और संवेदनशील चौराहों पर लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं। इसी वैज्ञानिक और तकनीक-आधारित निगरानी का परिणाम है कि पिछले आठ महीनों में राज्य में सड़क हादसों में 7% और मौतों में 8% की कमी आई है तथा 1,107 अमूल्य जीवन बचाए जा सके हैं।"

UP GATI, ITMS और सेफ सिटी कैमरों से रियल-टाइम चालान

शहरों में ट्रैफिक जाम और बोतलनेक्स को खत्म करने के लिए UP GATI प्लेटफॉर्म के जरिए 20 प्रमुख जिलों के 109 व्यस्ततम मार्गों की 24 घंटे लाइव सैटेलाइट व कैमरा निगरानी की जा रही है। रूट मार्शल जाम की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर अवरोध हटाते हैं।

साथ ही, ITMS (इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) और Safe City कैमरा नेटवर्क के तहत ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR), रेड लाइट जंपिंग डिटेक्शन (RLVD) और स्पीड डिटेक्शन कैमरों से सीधे कमांड सेंटर से निगरानी हो रही है। घनी आबादी वाले बाजारों में ड्रोन कैमरों की मदद ली जा रही है और नियम तोड़ने वालों पर मौके पर चालान के साथ-साथ ऑटोमैटिक ई-चालान सीधे मोबाइल पर भेजे जा रहे हैं।

निष्कर्ष: तकनीक, डिजिटल निगरानी और ऑन-ग्राउंड इंटरसेप्टर फ्लीट के इस तालमेल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस का उद्देश्य केवल चालान काटना नहीं, बल्कि प्रदेश की सड़कों को सुरक्षित बनाकर प्रत्येक नागरिक की जीवन रक्षा सुनिश्चित करना है।

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