यूपी रेरा ने पांच जिलों की 11 नई रियल एस्टेट परियोजनाओं को दी मंजूरी: ₹2,086 करोड़ का निवेश; 1,873 आवासीय एवं व्यावसायिक इकाइयों का होगा विकास
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर को नई गति देने और पारदर्शी आवास विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (UP RERA) ने बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण की 215वीं आधिकारिक बैठक में प्रदेश के पांच प्रमुख जनपदों में प्रस्तावित 11 नई रियल एस्टेट परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान कर दी गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से राज्य में कुल ₹2,086.06 करोड़ का भारी-भरकम पूंजी निवेश धरातल पर उतरेगा और कुल 1,873 आवासीय एवं व्यावसायिक इकाइयों का निर्माण पूरा किया जाएगा।
📌 स्वीकृत परियोजनाओं के मुख्य बिंदु:
- कुल निवेश व दायरा: ₹2,086.06 करोड़ के कुल निवेश से पांच जिलों में 1,873 फ्लैट्स, विला और व्यावसायिक दुकानें बनेंगी।
- गौतमबुद्ध नगर में सबसे बड़ा निवेश: नोएडा/ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में 2 बड़ी आवासीय परियोजनाओं में रिकॉर्ड ₹1,800.36 करोड़ का पूंजी निवेश और 1,398 इकाइयां प्रस्तावित।
- परियोजनाओं में लखनऊ अव्वल: राजधानी लखनऊ में सर्वाधिक 5 प्रोजेक्ट्स (2 आवासीय और 3 व्यावसायिक) स्वीकृत, जिनमें 198 यूनिट्स का निर्माण होगा।
- गाजियाबाद, बाराबंकी और मुरादाबाद: गाजियाबाद में 211 यूनिट्स (₹106.84 करोड़), बाराबंकी में 53 आवासीय यूनिट्स और मुरादाबाद में व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स को हरी झंडी।
- घर खरीदारों का संरक्षण: अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने स्पष्ट किया कि समयबद्ध डिलीवरी और पारदर्शिता का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा।
📊 यूपी रेरा 215वीं बैठक: जनपद-वार स्वीकृत परियोजनाओं का विस्तृत विवरण
| जनपद / जिला | परियोजनाओं की संख्या | प्रस्तावित इकाइयां (Units) | अनुमानित निवेश (करोड़ में) |
|---|---|---|---|
| गौतमबुद्ध नगर | 02 (आवासीय) | 1,398 इकाइयां | ₹1,800.36 करोड़ |
| लखनऊ | 05 (2 आवासीय, 3 व्यावसायिक) | 198 इकाइयां | ₹169.53 करोड़ |
| गाजियाबाद | 02 (आवासीय) | 211 इकाइयां | ₹106.84 करोड़ |
| बाराबंकी | 01 (आवासीय) | 53 इकाइयां | ₹5.78 करोड़ |
| मुरादाबाद | 01 (व्यावसायिक) | 13 इकाइयां | ₹3.55 करोड़ |
| कुल योग (Total) | 11 नई परियोजनाएं | 1,873 इकाइयां | ₹2,086.06 करोड़ |
यूपी रेरा की 215वीं बैठक में प्रस्तावों की सघन जांच के बाद मिली मंजूरी
यह निर्णय यूपी रेरा मुख्यालय में आयोजित प्राधिकरण की 215वीं अथॉरिटी बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री संजय भूसरेड्डी ने की। बैठक के दौरान विधिक, तकनीकी और वित्तीय मानकों पर विभिन्न बिल्डरों व प्रमोटरों द्वारा दाखिल किए गए प्रोजेक्ट्स के ले-आउट, भूमि स्वामित्व, पर्यावरण क्लीयरेंस और बैंक एस्क्रो अकाउंट विवरण की विस्तृत पड़ताल की गई।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि सभी अनुमोदित परियोजनाओं के प्रमोटरों को रेरा अधिनियम के प्रावधानों के तहत तय समयसीमा के भीतर ही निर्माण पूरा करना अनिवार्य होगा। परियोजनाओं की प्रगति की नियमित त्रैमासिक रिपोर्ट (QPR) पोर्टल पर सार्वजनिक करनी होगी।
आर्थिक विकास, रोजगार और एलाइड सेक्टर्स को मिलेगा बूस्ट
₹2,086 करोड़ से अधिक का यह निवेश केवल इमारतों के निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका मल्टीप्लायर प्रभाव प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर दिखेगा:
- निर्माण सामग्री उद्योग को गति: सीमेंट, स्टील, पेंट, टाइल्स, इलेक्ट्रिकल फिटिंग और सैनिटरी वेयर की मांग में बड़ा उछाल आएगा।
- रोजगार के व्यापक अवसर: सिविल इंजीनियरों, आर्किटेक्ट्स, साइट सुपरवाइजर्स और निर्माण श्रमिकों के लिए स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।
- लॉजिस्टिक्स व ट्रांसपोर्ट: भारी वाहनों, ढुलाई और वेयरहाउसिंग कारोबार को गति मिलेगी।
- व्यवस्थित शहरीकरण: बाराबंकी और मुरादाबाद जैसे टियर-2/टियर-3 शहरों में नियोजित व्यावसायिक व आवासीय परिसरों का विस्तार होगा।
"पारदर्शिता और खरीदारों के विश्वास की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता": संजय भूसरेड्डी
"उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट क्षेत्र को पारदर्शी, जवाबदेह और खरीदार-हितैषी बनाना हमारा मूल संकल्प है। परियोजनाओं को केवल समयबद्ध स्वीकृति देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी हमारी जिम्मेदारी है कि प्रमोटर तय समय में गुणवत्तापूर्ण आवास खरीदारों को सौंपें। रेरा अधिनियम का कड़ाई से पालन कराया जाएगा ताकि घर खरीदार का अपनी गाढ़ी कमाई पर पूरा भरोसा कायम रहे।"
— संजय भूसरेड्डी (अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण)


0 टिप्पणियाँ