नगर निगम का बजट लापता! बैकुंठ धाम में 'संत सोमवारी महाराज संस्थान' संभाल रहा है जिम्मेदारी
राजधानी लखनऊ के प्रमुख शवदाह गृह 'बैकुंठ धाम (भैंसाकुंड)' की बदहाली और सुविधाओं को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। वैसे तो शवदाह गृह की देखरेख और वहाँ आने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने का असली दायित्व नगर निगम लखनऊ का है, लेकिन हकीकत धरातल पर कुछ और ही बयां कर रही है।
नगर निगम का भारी-भरकम बजट कहाँ जा रहा है, इसका किसी को अता-पता नहीं है। इस बीच, नगर निगम की इसी नाकामी को छुपाने और दुखी परिवारों को सहारा देने के लिए 'संत सोमवारी महाराज सेवा संस्थान' संकटमोचक बनकर सामने आया है। संस्थान ने अपनी निस्वार्थ सेवा से बैकुंठ धाम की सूरत बदल दी है, जिसका लाभ आम जनता से लेकर बड़े-बड़े वीआईपी (VIP) लोगों को भी मिल रहा है।
निशुल्क अंतिम संस्कार
संस्थान की ओर से अब तक लगभग 180 लावारिस या जरूरतमंद शवों का पूरी तरह से निशुल्क और ससम्मान अंतिम संस्कार कराया जा चुका है।
शुद्ध पेयजल बोतलें
पिछले 5 वर्षों में बैकुंठ धाम आने वाले शोकाकुल परिजनों के लिए लगभग डेढ़ लाख पानी की बोतलें मुफ्त बांटी गई हैं। हाल ही में अध्यक्ष एस.एन. सिंह एडवोकेट के नेतृत्व में 50 पेटी बोतलें और भेजी गई हैं।
बैठने के लिए कुर्सियां
परिसर में लोगों के बैठने और विश्राम के लिए फाउंडेशन द्वारा पिछले 5 वर्षों में लगभग 200 आरामदायक कुर्सियों की उत्तम व्यवस्था की गई है।
अस्थि संचय बॉक्स
पवित्र अस्थियों को विसर्जन से पूर्व सुरक्षित और गरिमापूर्ण तरीके से रखने के लिए संस्थान ने विशेष रूप से 10 अस्थि बॉक्स बनवाकर वहाँ स्थापित करवाए हैं।
नगर निगम के बजट पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का साफ कहना है कि जो काम टैक्स के भारी-भरकम पैसे से नगर निगम को करना चाहिए था, वह काम एक सामाजिक संस्था अपने दम पर कर रही है। जब बैकुंठ धाम की बुनियादी सुविधाओं का सारा जिम्मा फाउंडेशन ही उठा रहा है, तो नगर निगम का सालाना बजट आखिर कहाँ ठिकाने लगाया जा रहा है?
एस.एन. सिंह के नेतृत्व में निरंतर सेवा
संस्थान के अध्यक्ष एस.एन. सिंह एडवोकेट के नेतृत्व में यह सेवा कार्य बिना किसी रुकावट के लगातार जारी है। दुख की इस विकट घड़ी में जब अपनों का साथ छूट जाता है, तब 'संत सोमवारी महाराज सेवा संस्थान' के सेवादार वहाँ आने वाले हर व्यक्ति को संबल प्रदान करते हैं। यह कार्य सिद्ध करता है कि आज के दौर में भी 'मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।'


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