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KGMU ने रोबोटिक सर्जरी से 9 वर्षीय बच्ची को दिया नया जीवन

पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की बड़ी कामयाबी

लखनऊ। 31 मई, 2026

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने एक बार फिर चिकित्सा क्षेत्र में अपनी उत्कृष्टता साबित की है। संस्थान में पहली बार रोबोटिक विधि के जरिए एक 9 वर्षीय बच्ची की जटिल सर्जरी कर उसे नया जीवन दिया गया है। यह ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ है।

क्या थी बीमारी?

फर्रुखाबाद के राजीव गांधी नगर की रहने वाली 9 वर्षीय बच्ची माही (पुत्री श्री अभिषेक तिवारी) कोलेडोकल सिस्ट (Choledochal Cyst) नामक एक दुर्लभ और जन्मजात बीमारी से पीड़ित थी। यह बीमारी पित्त नलिकाओं (Bile ducts) से जुड़ी होती है। यदि समय पर इसका इलाज न हो, तो लीवर से जुड़ी गंभीर और जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं। बच्ची के माता-पिता ने कई अस्पतालों में उसका इलाज कराने की कोशिश की, लेकिन कहीं कोई राहत नहीं मिली। आखिरकार वे निराश होकर KGMU के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की ओपीडी में पहुंचे।

रोबोटिक तकनीक से हुआ सफल ऑपरेशन

मामले की गंभीरता को देखते हुए पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. डाॅ. जे.डी. रावत और उनकी टीम ने तुरंत बच्ची की जरूरी जांचें कराईं और उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया। तेजी से रिकवरी और सटीक इलाज के लिए डॉक्टर्स ने बच्ची के परिजनों को रोबोटिक विधि से सर्जरी कराने की सलाह दी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। इसके बाद रोबोटिक तकनीक से बच्ची का सफल ऑपरेशन किया गया। विभाग में रोबोटिक विधि द्वारा इस बीमारी का यह पहला ऑपरेशन है।

KGMU Robotic Surgery Team with Patient

फोटो: KGMU के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में सफल रोबोटिक ऑपरेशन के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर मुस्कुराती 9 वर्षीय बच्ची माही, अपने परिजनों और डॉक्टर जे.डी. रावत व उनकी विशेषज्ञ मेडिकल टीम के साथ।

पारंपरिक सर्जरी से कितनी बेहतर है रोबोटिक सर्जरी?

विशेषज्ञों के अनुसार, इस सर्जरी में असामान्य पित्त नलिका को हटाकर लीवर से आंत तक पित्त के बहाव के लिए एक नया रास्ता बनाया जाता है। रोबोटिक तकनीक के निम्नलिखित फायदे देखने को मिले:

  • बारीकी और स्पष्टता: सर्जन टीम को बेहद छोटे चीरों के माध्यम से अधिक स्पष्टता और सूक्ष्म सटीकता के साथ काम करने में मदद मिली।
  • कम दर्द और खून का बहाव: पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में इस विधि में ऑपरेशन के बाद दर्द बहुत कम होता है और खून का बहाव भी न्यूनतम रहता है।
  • तेज रिकवरी: मरीज बहुत जल्दी ठीक होता है। यही कारण रहा कि ऑपरेशन के बाद बच्ची तेजी से स्वस्थ हुई और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

इस टीम ने रचा इतिहास

इस ऐतिहासिक और सफल सर्जरी को अंजाम देने वाली टीम में मुख्य रूप से डॉ. जे.डी. रावत, डॉ. सुधीर सिंह, डॉ. गुरमीत सिंह, डॉ. कृति पटेल, डॉ. अमोल और डॉ. रौनक शामिल रहे। साथ ही नर्सिंग स्टाफ से रीता, संजय और रिंकेश ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। एनेस्थीसिया विभाग की ओर से डॉ. मनीष सिंह ने अहम भूमिका निभाई।

KGMU की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानन्द ने इस बड़ी कामयाबी और सर्जरी की सफलता पर पूरी मेडिकल व सर्जिकल टीम को बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

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