मुख्य बातें:
- लखनऊ के जनपद न्यायाधीश मलखान सिंह के नेतृत्व में न्यायिक अधिकारियों ने की साइकिल यात्रा।
- चीफ जस्टिस अरुण भंसाली के मार्गदर्शन में शुरू हुआ यह विशेष अभियान।
- साइकिल चलाने में असमर्थ अधिकारी करेंगे बैटरी रिक्शा (ई-रिक्शा) का इस्तेमाल।
- पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत के प्रति आम जनता को जागरूक करने की अनूठी पहल।
लखनऊ, 30 मई 2026।(रवींद्र सिंह) बढ़ते प्रदूषण और ईंधन की खपत को कम करने के लिए उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से बदलाव की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण का बड़ा संदेश देते हुए लखनऊ जनपद के न्यायिक अधिकारी शनिवार को गाड़ियों का काफिला छोड़कर साइकिल से अदालत पहुंचे। इस अनूठी पहल को देखकर सड़कों पर लोग रुक गए और न्यायपालिका के इस कदम की हर तरफ सराहना हो रही है।
डालीबाग सेशंस हाउस से शुरू हुई यात्रा
शनिवार सुबह जनपद न्यायाधीश (District Judge) लखनऊ मलखान सिंह के नेतृत्व में सभी न्यायिक अधिकारी डालीबाग स्थित सेशंस हाउस पर एकत्र हुए। यहाँ से सभी अधिकारी एक साथ साइकिल चलाते हुए न्यायालय परिसर के लिए रवाना हुए। इस अभियान का उद्देश्य न केवल ईंधन की बचत करना है, बल्कि आम नागरिकों को पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारियों का अहसास कराना भी है।
हर शनिवार को 'नो कार डे' का संकल्प
जनपद न्यायाधीश मलखान सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में ईंधन संरक्षण और पर्यावरण की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए देश के सामने एक नजीर पेश की है।
उच्च न्यायालय के मार्गदर्शन में अभियान का दूसरा चरण
आपको बता दें कि यह अभियान मुख्य न्यायमूर्ति, इलाहाबाद उच्च न्यायालय अरूण भंसाली के मार्गदर्शन और शुभाशीष से प्रारम्भ किया गया है। इसकी शुरुआत बीते 22 मई 2026 को प्रशासनिक न्यायमूर्ति लखनऊ राजेश सिंह चौहान द्वारा हरी झंडी दिखाकर की गई थी। शनिवार को इस अभियान का दूसरा चरण था, जिसमें अधिकारियों ने एक बार फिर साइकिल यात्रा कर ऊर्जा और पर्यावरण सुरक्षा का संदेश दिया।
सोशल मीडिया पर हो रही तारीफ
अदालत के शीर्ष अधिकारियों को इस तरह साइकिल पर और उनकी साइकिलों पर "एक राष्ट्र, एक संकल्प - ईंधन बचाओ, हरित एवं मजबूत राष्ट्र बनाओ" के नारे देखकर आम जनता और अधिवक्ताओं में भारी उत्साह है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस पहल की सराहना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब समाज का इतना प्रतिष्ठित वर्ग खुद जमीन पर उतरकर ऐसी पहल करता है, तो इसका समाज पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
लखनऊ न्यायपालिका की यह कोशिश निश्चित रूप से देश के अन्य सरकारी विभागों और शहरों के लिए एक बेहतरीन नजीर (मिसाल) पेश करती है।
रिपोर्ट: Ravindra singh

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