मुख्य बिंदु (Highlights)
- SIT रिपोर्ट अंतिम: कोर्ट ने जांच को दोबारा खोलने से पूरी तरह इनकार किया।
- वैध ट्रांसफर: विदेशों से लाए गए जानवरों के ट्रांसफर को कानूनी और नियमों के अनुकूल माना।
- अदालत की टिप्पणी: सुरक्षित माहौल से जानवरों को हटाना उनके साथ क्रूरता के दायरे में आएगा।
- वनतारा का दावा: हर जीवन की रक्षा का हमारा संकल्प अब और ज्यादा मजबूत हुआ है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने वन्यजीव बचाव, पुनर्वास और संरक्षण से जुड़े एक मामले में वनतारा के खिलाफ दायर नई अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि जिन आरोपों को फिर से उठाने की कोशिश की गई है, वे पहले ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल यानी SIT की विस्तृत जांच के दायरे में आ चुके हैं और उन पर अंतिम रूप से विचार हो चुका है
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि जिन मामलों की जांच SIT कर चुकी है और जिन पर कोर्ट पहले फैसला दे चुका है, उन्हें बार-बार दोबारा नहीं खोला जा सकता। कोर्ट ने वनतारा के खिलाफ जांच, जब्ती या अभियोजन जैसी मांगों को पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर पूरी तरह वैध और नियमों के अनुरूप
आदेश में कोर्ट ने कहा कि यूएई, वेनेजुएला, ब्राजील, चेक रिपब्लिक, दक्षिण अफ्रीका और अन्य देशों से जुड़े जानवरों के ट्रांसफर वैध दस्तावेजों, CITES परमिट और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) की मंजूरी के आधार पर हुए थे। कोर्ट ने इन्हें गैर-व्यावसायिक और जू-टू-जू (Zoo-to-Zoo) ट्रांसफर माना है।
सुरक्षित माहौल से जानवरों को हटाना 'क्रूरता'
सुप्रीम कोर्ट ने जामनगर में वनतारा के काम की अहमियत को भी माना। आदेश में विशेष रूप से लुप्तप्राय मैकॉ पक्षियों के संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम (Breeding Program) का जिक्र किया गया।
हर दिन निभाई जाने वाली जिम्मेदारी: विवान करणी
वनतारा के सीईओ विवान करणी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “यह फैसला दिखाता है कि हमारा काम सही दिशा में है। वनतारा में आया हर जानवर कानूनी प्रक्रिया के तहत आया है, उसकी पूरी संवेदनशीलता के साथ देखभाल की गई है और उसे जीवनभर सुरक्षा दी जा रही है। हमारे लिए संरक्षण सिर्फ कहने की बात नहीं, बल्कि हर दिन निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है।”

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