📘 🐦 📸
तेज़, सटीक और भरोसेमंद खबरें
🔴 Breaking
Loading news...

Pages

पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन के खिलाफ बिजली कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, हटाने से 22 की मौत; एसीएम को सौंपा ज्ञापन

पावर कॉरपोरेशन के खिलाफ प्रदर्शन: सीएम को सौंपा ज्ञापन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लखनऊ सहित प्रदेश के भिन्न-भिन्न जनपदों में संगठन पदाधिकारियों द्वारा जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन दिया गया। इसी क्रम में लखनऊ जनपद में संगठन पदाधिकारियों द्वारा संगीता पाण्डेय (ACM- प्रथम) के माध्यम से मुख्यमंत्री को एवं संगठन के मुख्य संरक्षक कौशल किशोर को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया गया।

लखनऊ में संगठन पदाधिकारियों द्वारा एसीएम प्रथम संगीता पाण्डेय को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए।
लखनऊ में एसीएम प्रथम संगीता पाण्डेय को ज्ञापन सौंपते संगठन पदाधिकारी।

🚨 कर्मचारियों की कमी से बड़ा संकट (मुख्य बिंदु):

  • 25,000 कर्मचारी हटाए गए: पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन द्वारा अपने स्वयं के आदेश (दिनांक 15 मई 2017) का उल्लंघन कर अब तक लगभग 25,000 आउटसोर्स कर्मचारियों को कार्य से हटा दिया गया है।
  • अत्यधिक कार्यभार: कर्मचारियों की भारी कमी के कारण 4 कर्मचारियों के स्थान पर महज 1 कर्मचारी से कार्य कराया जा रहा है।
  • 37 दिनों में 22 मौतें: अकुशल कर्मचारियों से लाइनों आदि का नियमविरुद्ध कार्य कराने के कारण पिछले 37 दिनों में 36 आउटसोर्स कर्मचारी दुर्घटना का शिकार हुए, जिनमें से 22 कर्मचारियों की मृत्यु हो गई तथा 14 गंभीर रूप से घायल हैं।
  • उपभोक्ता परेशान: कर्मचारियों की इस भारी कमी के कारण प्रदेश के आम उपभोक्ताओं को भी बिजली की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
यह खबर भी पढेंÞ

प्रबंधन की मनमानी और शोषण के आरोप

संगठन पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन द्वारा लेबर का अनुबंध कर लाइनमैन का कड़ा और जोखिमभरा कार्य कराया जा रहा है। इसके साथ ही वेतन भुगतान में भारी भेदभाव किया जा रहा है और न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये निर्धारित नहीं किया जा रहा है।

इसके अलावा, ऊर्जा मंत्री के स्पष्ट निर्देश के बावजूद मार्च 2023 में हटाए गए कर्मचारियों को कार्य पर वापस नहीं लिया जा रहा है। कर्मचारियों को 55 वर्ष की आयु का हवाला देकर जबरन सेवा से बाहर किया जा रहा है। संगठन ने ईपीएफ (EPF) घोटाले की जांच न कराने और दोषी ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई न होने पर भी गहरा रोष व्यक्त किया है। घायल कर्मचारियों का कैशलेस इलाज नहीं हो रहा है और न ही उनके उपचार में व्यय हुई धनराशि को संविदाकारों के बिल से काटकर भुगतान किया जा रहा है।

संगठन पदाधिकारियों की मुख्य मांगें:

  • उपभोक्ताओं की संख्या के सटीक अनुपात में नए कर्मचारियों को तैनात किया जाए।
  • विभिन्न कारणों से हटाए गए सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को तत्काल कार्य पर वापस लिया जाए।
  • कर्मचारियों के कार्य की प्रकृति के अनुरूप ही उनके साथ अनुबंध (Contract) किया जाए।
  • सभी आउटसोर्स कर्मियों का न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये निर्धारित किया जाए।
  • लाइन पर होने वाली दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए और सुरक्षा उपकरण दिए जाएं।
  • कार्य के दौरान घायल कर्मचारियों का पूरी तरह कैशलेस उपचार कराया जाए।
  • उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन एवं वितरण निगमों को आउटसोर्स सेवा निगम में शामिल किया जाए।
  • कर्मचारियों को 55 वर्ष के बजाय 60 वर्ष की आयु तक कार्य करने की अनुमति दी जाए।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

📢 WhatsApp से जुड़ें